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पत्रकार नवीन जोशी बोले- जेएनयू में नारेबाजी गलत
बरेली
Updated Sun, 14 Feb 2016 01:53 AM IST
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बरेली। जेएनयू में हिंदुस्तान के खिलाफ हुई नारेबाजी गलत है, लेकिन उसके नाम पर आतंक फैलाना भी ठीक नहीं। जांच पड़ताल कर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन जो इस समय पर हो रहा है, इससे सहमत नहीं हुआ जा सकता। रही बात अफजल गुरु की फांसी का तो उसका विरोध करने का हक है। पहले भी इस पर विमर्श होता रहा है। वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार नवीन जोशी ने अमर उजाला से बातचीत में अपनी राय कुछ इस तरह से जाहिर की। उन्होंने कहा कि दरअसल, इस समय पर केंद्र में सरकार भाजपा की है, वह पहले ही वामपंथियों के विरोध में रहती रही है। इसलिए, अब उसे जेएनयू में कार्रवाई करने का मौका मिल गया है।
देश में असहिष्णुता पर उन्होंने कहा कि यह मुद्दा अभी खत्म नहीं हुआ है। असहिष्णुता पर भी राजनीति की गई। लेखकों, वैज्ञानिकों, कलाकारों के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। दादरी में बीफ के नाम पर भीड़ एक व्यक्ति को मार डालती है और उसमें कार्रवाई ही नहीं होती है। प्रधानमंत्री चुप्पी साध लेते हैं। लोग चाहते हैं कि प्रधानमंत्री ऐसे मामलों पर बोलें। इन्हें यह समझना चाहिए कि इस देश में अद्भुत रूप से सहनशीलता, विचारों की स्वतंत्रता, खान-पान की आजादी रही है। सिर्फ यहीं पर ऐसा होता है कि हम भले ही मीट खाएं, लेकिन दूसरे को शाकाहारी परोसते हैं। खानपान निजी मसला है, इसे मुद्दा बनाना ठीक नहीं। यह बहुलतावादी देश है। इस समय जितने ऐसे हालत पैदा किए जा रहे हैं, ऐसी हरकतें कर देश को बिखेरने का प्रयास हो रहा है, उतना ही लोग एकजुट हो रहे हैं। इनके विरोध में लोगों की फौज खड़ी हो रही है।
जेएनयू में हुई नारेबाजी के गलत है, लेकिन उसके नाम पर पूरे कैंपस को ही देशद्रोही कह देना गलत है। ऐसा क्योें हुआ, कैसे हुआ, इसकी भी जांच होनी चाहिए। कैंपस में ऐसे बर्बरता ठीक नहीं है। पुलिस का कैंपस में घुसना गलत है। ऐसा नहीं होना चाहिए।
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- डॉ. सुबोध धवन, रुहेलखंड विश्वविद्यालय
जेएनयू में नारेबाजी के मामले में अभी तफ्तीश चल रही है। निष्पक्ष तौर पर जांच हो, उसके बाद कार्रवाई की बात हो। जेएनयू में आज तक ऐसे हालात नहीं हुए, लेकिन आज ऐसा कैसे हो सकता है। वहां के शिक्षक और विद्यार्थी ऐसे नहीं हैं।
- डॉ. अजय त्रिवेदी, रुहेलखंड विश्वविद्यालय
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देश में असहिष्णुता पर उन्होंने कहा कि यह मुद्दा अभी खत्म नहीं हुआ है। असहिष्णुता पर भी राजनीति की गई। लेखकों, वैज्ञानिकों, कलाकारों के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। दादरी में बीफ के नाम पर भीड़ एक व्यक्ति को मार डालती है और उसमें कार्रवाई ही नहीं होती है। प्रधानमंत्री चुप्पी साध लेते हैं। लोग चाहते हैं कि प्रधानमंत्री ऐसे मामलों पर बोलें। इन्हें यह समझना चाहिए कि इस देश में अद्भुत रूप से सहनशीलता, विचारों की स्वतंत्रता, खान-पान की आजादी रही है। सिर्फ यहीं पर ऐसा होता है कि हम भले ही मीट खाएं, लेकिन दूसरे को शाकाहारी परोसते हैं। खानपान निजी मसला है, इसे मुद्दा बनाना ठीक नहीं। यह बहुलतावादी देश है। इस समय जितने ऐसे हालत पैदा किए जा रहे हैं, ऐसी हरकतें कर देश को बिखेरने का प्रयास हो रहा है, उतना ही लोग एकजुट हो रहे हैं। इनके विरोध में लोगों की फौज खड़ी हो रही है।
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जेएनयू में हुई नारेबाजी के गलत है, लेकिन उसके नाम पर पूरे कैंपस को ही देशद्रोही कह देना गलत है। ऐसा क्योें हुआ, कैसे हुआ, इसकी भी जांच होनी चाहिए। कैंपस में ऐसे बर्बरता ठीक नहीं है। पुलिस का कैंपस में घुसना गलत है। ऐसा नहीं होना चाहिए।
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- डॉ. सुबोध धवन, रुहेलखंड विश्वविद्यालय
जेएनयू में नारेबाजी के मामले में अभी तफ्तीश चल रही है। निष्पक्ष तौर पर जांच हो, उसके बाद कार्रवाई की बात हो। जेएनयू में आज तक ऐसे हालात नहीं हुए, लेकिन आज ऐसा कैसे हो सकता है। वहां के शिक्षक और विद्यार्थी ऐसे नहीं हैं।
- डॉ. अजय त्रिवेदी, रुहेलखंड विश्वविद्यालय