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कोरोना को रोकना अब और मुश्किल
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श्यामगंज बाजार में लगी लोगों की भीड़।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
शहर के प्रमुख डॉक्टरों की राय- लॉकडाउन सरकार की ओर से सिर्फ ट्रेनिंग थी, अब सारी जिम्मेदारी खुद लोगों पर
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प्रवासियों के लौटने के साथ सामुदायिक संक्रमण के माफिक हो रहे हैं हालात
बरेली। एक तरफ कोरोना से बुरी तरह प्रभावित राज्यों और शहरों से लौटने वालों की तादाद लगातार बढ़ रही है, दूसरी ओर लॉकडाउन- 4 में सरकार ने पूरे प्रदेश में रियायतें दे दी हैं। मतलब साफ है कि आने वाले दिनों में भीड़ में कोरोना कब किसे कहां शिकार बना लेगा, कुछ पता भी नहीं चलेगा। प्रमुख डॉक्टरों का मानना है कि शहर के हालात अब सामुदायिक संक्रमण की तरफ बढ़ रहे हैं। ऐसे में कोरोना के खामोशी भरे खतरनाक वार से वही बच पाएगा जो खुद सतर्क रहेगा।
ध्यान रखें.. कोरोना न ओहदा देखेगा न रसूख
वरिष्ठ बालरोग विशेषज्ञ डॉ. रवि खन्ना का कहना है कि भीड़ की कोई दिशा नहीं होती, ठीक वैसे ही वायरस का भी कोई रूप नहीं होता। जो लोग मान रहे हैं कि उन्हें संक्रमण का खतरा नहीं है वे दरअसल नासमझ हैं। वायरस न किसी का ओहदा देखेगा न रसूख। उसके लिए प्रत्येक जीवित मनुष्य आसान शिकार है। अब जब लॉकडाउन में भी ढील दे दी गई है तो लोगों के पास उनकी समझदारी के अलावा इस वायरस से बचाव के लिए कोई हथियार नहीं बचा है। घर से बाहर निकलने पर मास्क लगाना, दूसरों से दो गज की दूरी रखना, वापस आकर हाथ-पांव धोकर या फिर संभव हो तो नहाकर घर में प्रवेश करने जैसी सतर्कता ही संक्रमण से बचा सकती है।
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लगातार मुश्किल होते जा रहे हैं हालात
संक्रामक रोग चैप्टर के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अतुल अग्रवाल का कहना है कि करीब हफ्ते भर में ही जिले में छह एक्टिव केस सामने आ चुके हैं, से सभी प्रवासी हैं जो कोरोना प्रभावित राज्यों से आए हैं। होम क्वारंटीन होने पर भी अगर वे परिजनों के संपर्क में हैं तो उन्हें भी संक्रमित कर सकते हैं। घर से बाहर निकलने पर मिलने वालों में भी संक्रमण फैलाएंगे। लॉकडाउन में सख्ती थी। मगर अब हालात पहले जैसे नहीं हैं। सड़कों पर ट्रैफिक और आवाजाही बढ़ रही है। हॉटस्पॉट एरिया में भी लोग घरों के अंदर नहीं हैं। यानी साफ है कि वे सजग नहीं हैं। ऐसे हालात में कोरोना के महामारी बनकर फैलने से अब इनकार नहीं किया जा सकता।
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बाहर से आने वालों को संक्रमित ही मानें
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सत्येंद्र सिंह का कहना है कि जो हालात दिख रहे हैं वह साफ इशारा कर रहे हैं कि आने वाले समय में संक्रमण तेजी से फैलेगा। बचाव का एक ही विकल्प है कि लोग सरकार की गाइडलाइन का पालन करें। पान मसाला या तंबाकू खाकर कहीं भी थूकने जैसी आदत को बदलें, परिवार और दोस्तों को भी अच्छी आदतें अपनाने के प्रति जागरूक करें। रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर करने के लिए खानपान स्वच्छ और सेहतमंद रखें। जो प्रवासी आ रहे हैं, उनमें से ज्यादातर एसिम्पटौमैटिक हैं। बचाव का रास्ता यही है कि इन सभी को संक्रमित मानकर चलें।
चांस न लें.. वक्त रहते संभल जाएं
बरेली। कोविड-19 संक्रमण के बारे में मंगलवार को डॉक्टरों ने वेबिनार से लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. सुदीप सरन ने बताया कि भारत में संक्रमितों की संख्या एक लाख से ज्यादा हो गई है मगर संक्रमितों के स्वस्थ्य होने की दर भी 40 फीसद है। लिहाजा हालात को अभी काबू में ही माना जाना चाहिए लेकिन अगर अपने बचाव के लिए गाइडलाइन का पालन नहीं किया तो लोगों को संक्रमण की चपेट में आने से बचाना मुश्किल हो जाएगा। डॉ. अजय खन्ना ने सुझाव दिया कि मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, डोरबेल, घर का प्रवेश द्वार भी बाहर से आने के बाद सैनिटाइज किया जाए। डॉ. अजीत साहनी ने संदिग्ध लक्षण दिखने पर तत्काल जांच कराने को कहा। डॉ. आरके महाजन ने दिमाग के मरीजों को दवा बंद न करने की हिदायत दी। डॉ. राकेश यदुवंशी ने रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर रखने के लिए साफसफाई और बेहतर खानपान का सुझाव दिया। ब्यूरो
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प्रवासियों के लौटने के साथ सामुदायिक संक्रमण के माफिक हो रहे हैं हालात बरेली। एक तरफ कोरोना से बुरी तरह प्रभावित राज्यों और शहरों से लौटने वालों की तादाद लगातार बढ़ रही है, दूसरी ओर लॉकडाउन- 4 में सरकार ने पूरे प्रदेश में रियायतें दे दी हैं। मतलब साफ है कि आने वाले दिनों में भीड़ में कोरोना कब किसे कहां शिकार बना लेगा, कुछ पता भी नहीं चलेगा। प्रमुख डॉक्टरों का मानना है कि शहर के हालात अब सामुदायिक संक्रमण की तरफ बढ़ रहे हैं। ऐसे में कोरोना के खामोशी भरे खतरनाक वार से वही बच पाएगा जो खुद सतर्क रहेगा।
ध्यान रखें.. कोरोना न ओहदा देखेगा न रसूख
वरिष्ठ बालरोग विशेषज्ञ डॉ. रवि खन्ना का कहना है कि भीड़ की कोई दिशा नहीं होती, ठीक वैसे ही वायरस का भी कोई रूप नहीं होता। जो लोग मान रहे हैं कि उन्हें संक्रमण का खतरा नहीं है वे दरअसल नासमझ हैं। वायरस न किसी का ओहदा देखेगा न रसूख। उसके लिए प्रत्येक जीवित मनुष्य आसान शिकार है। अब जब लॉकडाउन में भी ढील दे दी गई है तो लोगों के पास उनकी समझदारी के अलावा इस वायरस से बचाव के लिए कोई हथियार नहीं बचा है। घर से बाहर निकलने पर मास्क लगाना, दूसरों से दो गज की दूरी रखना, वापस आकर हाथ-पांव धोकर या फिर संभव हो तो नहाकर घर में प्रवेश करने जैसी सतर्कता ही संक्रमण से बचा सकती है।
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लगातार मुश्किल होते जा रहे हैं हालात
संक्रामक रोग चैप्टर के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अतुल अग्रवाल का कहना है कि करीब हफ्ते भर में ही जिले में छह एक्टिव केस सामने आ चुके हैं, से सभी प्रवासी हैं जो कोरोना प्रभावित राज्यों से आए हैं। होम क्वारंटीन होने पर भी अगर वे परिजनों के संपर्क में हैं तो उन्हें भी संक्रमित कर सकते हैं। घर से बाहर निकलने पर मिलने वालों में भी संक्रमण फैलाएंगे। लॉकडाउन में सख्ती थी। मगर अब हालात पहले जैसे नहीं हैं। सड़कों पर ट्रैफिक और आवाजाही बढ़ रही है। हॉटस्पॉट एरिया में भी लोग घरों के अंदर नहीं हैं। यानी साफ है कि वे सजग नहीं हैं। ऐसे हालात में कोरोना के महामारी बनकर फैलने से अब इनकार नहीं किया जा सकता।
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