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बरेली में ही बिक रहा है ‘मौत’ का सामान
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Tue, 21 Jun 2016 01:24 AM IST
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जिले के 3200 स्कूलों में पढ़ रहे साढ़े तीन लाख बच्चों को प्रधान अध्यापक, प्रधान और एनजीओ कमीशन खोरी के चक्कर में बरेली में ही बन रहे सस्ते तेल- मसाले इस्तेमाल कर रहे हैं। ये लोग बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य को भी नहीं देख रहे हैं। जिन बच्चों को यह जहर खिला रहे हैं, वह कल केभविष्य हैं। कम उम्र में सिंथेटिक कलर युक्त मसाले और तेल वाली सब्जी खिलाकर उन्हें जवान होने से पहले ही लाइलाज बीमारी की सौगात दे रहे हैं। सब्जी में इस्तेमाल होने वाले नकली सरसों तेल में पीलापन बनाने के लिए पीला सिंथेटिक रंग मिला रहे हैं। इससे तेल एक दम पीला हो जाता है। साथ मेें एसंस भी मिलाया जा रहा है। जो कि दिखने में एक दम असली तेल जैसा लगता है। इसी तरह पिसी हुई मिर्च भी मिर्च के साथ-साथ पाउडर मिलाते हैं, जिसे नारंगी और गहरा कत्थई कलर में बनाने के लिए चमक वाला प्लास्टिक कलर मिलाते हैं। ऐसे ही हल्दी में भी मैदा और सेलखड़ी मिलाते हैं, उसे पीला करने के लिए पीला सिंथेटिक कलर मिलाया जाता है। इन सब की अवैध फैक्ट्री बरेली में बने हुए हैं। जिनको कई बार एफएसडीए की टीम ने पकड़ा है और नमूने लिए हैं।
प्राइमरी स्कूलों में इस जहर को खिलाने की उम्मीद नहीं थी लेकिन यह खुलासा प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट में हुआ है। स्कूलों के शिक्षक और गांव के प्रधानों पर लोगों का भरोसा रहता है कि वह अपने गांव के बच्चों के साथ ऐसा नहीं करेंगे।
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प्राइमरी स्कूलों में इस जहर को खिलाने की उम्मीद नहीं थी लेकिन यह खुलासा प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट में हुआ है। स्कूलों के शिक्षक और गांव के प्रधानों पर लोगों का भरोसा रहता है कि वह अपने गांव के बच्चों के साथ ऐसा नहीं करेंगे।
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