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माता पिता का समावेश है भरतनाट्यम : अमृत
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अमृत सिन्हा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त अमृत ने कहा- अपनी विद्या की नींव मजबूत रखें कलाकार
बरेली। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त भरतनाट्यम कलाकार अमृत सिन्हा का कहना है कि यह पुरुष प्रधान नृत्य है, जो भगवान शंकर पर आधारित है। इसमें माता-पिता दोनों का समावेश है, जिसमें पुरुष और प्रकृति का अद्भुत संगम है। यह एक दूसरे के बिना अधूरा है और दूसरी नृत्य विद्याओं से खुद को अलग करता है।
रामायण कान्क्लेव में पहुंचे नृत्य कलाकार अमृत सिन्हा ने फिल्मों में शास्त्रीय नृत्य के साथ हो रही छेड़छाड़ पर कहा कि सिर्फ नृत्य ही नहीं, हर विधा के कलाकार को अपनी नींव मजबूत रखना चाहिए। ताकि उस कला की आत्मा जिंदा रहे और उसका मूल स्वरूप कायम रह सके।
उत्तर भारत में भरतनाट्यम की स्थिति पर अमृत ने कहा कि इस क्षेत्र में कत्थक शैली का ज्यादा चलन है। इस क्षेत्र में कुछ अलग करने के लिए उन्होंने दक्षिण भारत की विद्या को अपनाया और जगह-जगह कार्यक्रम भी कर रहे हैं, जिसका सार्थक परिणाम भी देखने को मिल रहा है।
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अमृत सिन्हा को 2017 में भरतनाट्यम के लिए राष्ट्रपति की ओर से पुरस्कृत किया गया। इसके बाद 2020 में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की ओर से अवार्ड दिया जा चुका है। वह भारत के कई बड़े शहरों के अलावा लगभग 15 देशों में अपने शो कर चुके हैं। साथ ही गुरु शिष्य की पुरानी परंपराओं को आगे बढ़ाने की कोशिश में लगे हैं।
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बरेली। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त भरतनाट्यम कलाकार अमृत सिन्हा का कहना है कि यह पुरुष प्रधान नृत्य है, जो भगवान शंकर पर आधारित है। इसमें माता-पिता दोनों का समावेश है, जिसमें पुरुष और प्रकृति का अद्भुत संगम है। यह एक दूसरे के बिना अधूरा है और दूसरी नृत्य विद्याओं से खुद को अलग करता है।
रामायण कान्क्लेव में पहुंचे नृत्य कलाकार अमृत सिन्हा ने फिल्मों में शास्त्रीय नृत्य के साथ हो रही छेड़छाड़ पर कहा कि सिर्फ नृत्य ही नहीं, हर विधा के कलाकार को अपनी नींव मजबूत रखना चाहिए। ताकि उस कला की आत्मा जिंदा रहे और उसका मूल स्वरूप कायम रह सके।
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उत्तर भारत में भरतनाट्यम की स्थिति पर अमृत ने कहा कि इस क्षेत्र में कत्थक शैली का ज्यादा चलन है। इस क्षेत्र में कुछ अलग करने के लिए उन्होंने दक्षिण भारत की विद्या को अपनाया और जगह-जगह कार्यक्रम भी कर रहे हैं, जिसका सार्थक परिणाम भी देखने को मिल रहा है।
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अमृत सिन्हा को 2017 में भरतनाट्यम के लिए राष्ट्रपति की ओर से पुरस्कृत किया गया। इसके बाद 2020 में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की ओर से अवार्ड दिया जा चुका है। वह भारत के कई बड़े शहरों के अलावा लगभग 15 देशों में अपने शो कर चुके हैं। साथ ही गुरु शिष्य की पुरानी परंपराओं को आगे बढ़ाने की कोशिश में लगे हैं।