Bareilly: रुहेलखंड विश्वविद्यालय में करोड़ों के घोटाले की आशंका, जांच शुरू; तीन अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने बताया कि विश्वविद्यालय में 18 अप्रैल को दोबारा पदस्थापित होने के बाद शासन का पत्र प्राप्त हुआ है। इसमें वित्तीय अनियमितता से जुड़े गंभीर आरोपों को लेकर रिपोर्ट मांगी गई है।
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शासन के पत्र के बाद रुहेलखंड विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितता के आरोपों की जांच शुरू हो गई है। कुलसचिव ने प्रकरण से संबंधित परीक्षा नियंत्रक, तत्कालीन बीएड प्रवेश परीक्षा समन्वयक और उप कुलसचिव प्रशासन से जवाब मांगा है।
विश्वविद्यालय की ओर से वर्ष 2022 में बीएड प्रवेश परीक्षा कराई गई थी। इससे संबंधित कोरोना किट की खरीदारी को लेकर चार करोड़ रुपये से अधिक का बिल भुगतान के लिए तत्कालीन वित्त अधिकारी के कार्यालय में भेजा गया था। आरोप है कि इसके भुगतान को लेकर कुलपति ने उन पर दबाव बनाया था। हालांकि, पर्याप्त धनराशि नहीं होने से वित्त अधिकारी ने भुगतान नहीं किया।
बाद में वित्त अधिकारी को जानकारी हुई कि कोरोना किट की खरीदारी के मामले की जांच एसटीएफ व सीबीआई कर रही हैं। वहीं, परीक्षा संबंधी गोपनीय मदों के भुगतान के लिए कुलपति ने 50.50 करोड़ रुपये अग्रिम तीन किस्तों में लिए, लेकिन इसका समायोजन प्रस्तुत नहीं किया। इसको लेकर वित्त अधिकारी ने भुगतान में गंभीर अनियमितता की आशंका जताते हुए जांच की मांग की थी।
तत्कालीन वित्त अधिकारी ने विश्वविद्यालय से कॉलेजों में गोपनीय पत्र ले जाने वाली गड़ियों के बिल की सूचना परीक्षा नियंत्रक से मांगी थी। इसके जवाब में परीक्षा नियंत्रक ने कहा था कि परीक्षा से संबंधित गाड़ियों को भेजे जाने का कार्य अतिगोपनीय प्रकृति का होता है। इसलिए ड्राइवर स्लिप उपलब्ध कराया जाना उचित नहीं है। तब वित्त अधिकारी ने इसकी विस्तृत जांच कराने की मांग की थी।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलसचिव अजय कृष्ण यादव ने बताया कि विश्वविद्यालय में 18 अप्रैल को दोबारा पदस्थापित होने के बाद शासन का पत्र प्राप्त हुआ है। इसमें वित्तीय अनियमितता से जुड़े गंभीर आरोपों को लेकर रिपोर्ट मांगी गई है। ऐसे में संबंधित को पत्र लिखकर जवाब देने के लिए कहा गया है।
तीन अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब
पूर्व वित्त अधिकारी की शिकायत पर शासन स्तर से कुलसचिव अजय कृष्ण यादव और वित्त अधिकारी विनोद कुमार से रिपोर्ट मांगी गई है। इसको लेकर कुलसचिव ने बीएड प्रवेश परीक्षा के तत्कालीन समन्वयक प्रो. पीबी सिंह, परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार और उप कुलसचिव (प्रशासन) सुनीता यादव से जवाब मांगा है। पूर्व वित्त अधिकारी केके शंखवार ने बताया कि उन्होंने विगत वर्ष राजभवन को पत्र भेजा था। प्रकरण अब उच्च शिक्षा विभाग के पास है।