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पहले अरहर डकारी अब मेंथा की बारी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Mon, 30 Apr 2018 06:55 PM IST
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फरीदपुर में नेशनल हाईवे किनारे स्थित रेशम विकास विभाग के फार्म में हो रही खेती को ‘सरकारी कीट’ ही चट कर रहे हैं। पहले फार्म में बोई गई अरहर की फसल अफसर डकार गए और अब मेंथा की फसल को डकारने की तैयारी है। अफसरों की इस कारगुजारी पर कोई ध्यान देने वाला नहीं है। इतना ही नहीं फार्म की पांच एकड़ बेशकीमती जमीन पर भूमाफिया ने कब्जा कर लिया है। कुछ जमीन पर तो बाउंड्रीवाल और भवन बनाने के लिए दीवारें तक खड़ी कर ली हैं। एसडीएम कोर्ट में जमीन को लेकर मुकदमा भी चल रहा है, लेकिन कब्जेदार विभाग पर भारी साबित होकर अपना कब्जा जमाए हैं।
फरीदपुर के गांव बकैनिया में रेशम विकास विभाग का फार्म है, जो 23.89 एकड़ क्षेत्रफल में फैला हुआ है। फार्म की करीब पांच बीघा जमीन पर बोई गई फसल पककर तैयार हुई तो दो माफिया ने उसे अपने पट्टे की अराजी बताकर काट ली। दरअसल, यह सब खेल अफसरों की ही मिलीभगत से चल रहा है सो कोई रोका-टोकी भी नहीं हुई। अब इस जमीन पर मेंथा की फसल है। इसे भी अरहर की तरह की ठिकाने लगा दिया जाएगा। राजस्व ग्राम बकैनिया के नक्शे में इस भूमि के नंबर एक से लेकर 106 तक दर्ज हैं। मगर वर्ष 1988 से यहां अवैध कब्जे होने शुरू हो गए। आसपास के लोग बताते हैं कि जब वहां राजकीय डिग्री कॉलेज बनाया गया तो उसका रास्ता रेशम विकास विभाग फार्म से होकर बना दिया गया। बस तभी से फार्म की जमीन कब्जाने की साजिश शुरू हो गई। माफिया ने धीरे-धीरे डिग्री कॉलेज की सड़क के पूर्वी ओर लगे शहतूत के पेड़ नष्ट कर रेशम विभाग का नाम मिटाने की कवायद शुरू कर दी। उन्हें इसमें कामयाबी भी मिली। धीरे-धीरे सड़क के पूर्वी ओर की पांच एकड़ जमीन पर भूमाफिया का कब्जा हो गया। फर्जी रजिस्ट्री आदि के जरिये इसकी प्लाटिंग भी कर दी गई।
18-20 लोगों का कब्जा
सूत्रों के मुताबिक फार्म की पांच एकड़ जमीन पर भूमाफिया ने कब्जा कर रखा है। यह कब्जा 18-20 लोगों का है। इस जमीन पर प्लाटिंग तो हो गई है लेकिन मुकदमे के चलते कई लोगों ने निर्माण कार्य टाल दिया है। कुछ अपना कब्जा बनाए रखने के लिए झोपड़ियां डालकर वहां रह रहे हैं।
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पूर्व विधायक भी फंसते-फंसते बचे
लोगों ने बताया कि इस पांच एकड़ जमीन में से कुछ जमीन एक पूर्व विधायक ने भी खरीद ली थी और इसके लिए उन्होंने 16 लाख रुपये बतौर पेशगी दे दिए थे। मगर जब उन्हें विवाद का पता चला तो उन्होंने जमीन खरीदने से हाथ खींच लिया और रुपये वापस ले लिए।
वर्ष 1985 के आसपास रेशम विभाग ने फार्म की जमीन खरीदी थी। उसमें से पांच एकड़ जमीन सड़क के पूर्वी ओर है, जिस पर कब्जा कर लिया गया है। उसे मुक्त कराने के लिए विभाग की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया है, जो कोर्ट में विचाराधीन है। - एमके गौतम, रेशम अधिकारी
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फरीदपुर के गांव बकैनिया में रेशम विकास विभाग का फार्म है, जो 23.89 एकड़ क्षेत्रफल में फैला हुआ है। फार्म की करीब पांच बीघा जमीन पर बोई गई फसल पककर तैयार हुई तो दो माफिया ने उसे अपने पट्टे की अराजी बताकर काट ली। दरअसल, यह सब खेल अफसरों की ही मिलीभगत से चल रहा है सो कोई रोका-टोकी भी नहीं हुई। अब इस जमीन पर मेंथा की फसल है। इसे भी अरहर की तरह की ठिकाने लगा दिया जाएगा। राजस्व ग्राम बकैनिया के नक्शे में इस भूमि के नंबर एक से लेकर 106 तक दर्ज हैं। मगर वर्ष 1988 से यहां अवैध कब्जे होने शुरू हो गए। आसपास के लोग बताते हैं कि जब वहां राजकीय डिग्री कॉलेज बनाया गया तो उसका रास्ता रेशम विकास विभाग फार्म से होकर बना दिया गया। बस तभी से फार्म की जमीन कब्जाने की साजिश शुरू हो गई। माफिया ने धीरे-धीरे डिग्री कॉलेज की सड़क के पूर्वी ओर लगे शहतूत के पेड़ नष्ट कर रेशम विभाग का नाम मिटाने की कवायद शुरू कर दी। उन्हें इसमें कामयाबी भी मिली। धीरे-धीरे सड़क के पूर्वी ओर की पांच एकड़ जमीन पर भूमाफिया का कब्जा हो गया। फर्जी रजिस्ट्री आदि के जरिये इसकी प्लाटिंग भी कर दी गई।
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18-20 लोगों का कब्जा
सूत्रों के मुताबिक फार्म की पांच एकड़ जमीन पर भूमाफिया ने कब्जा कर रखा है। यह कब्जा 18-20 लोगों का है। इस जमीन पर प्लाटिंग तो हो गई है लेकिन मुकदमे के चलते कई लोगों ने निर्माण कार्य टाल दिया है। कुछ अपना कब्जा बनाए रखने के लिए झोपड़ियां डालकर वहां रह रहे हैं।
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पूर्व विधायक भी फंसते-फंसते बचे
लोगों ने बताया कि इस पांच एकड़ जमीन में से कुछ जमीन एक पूर्व विधायक ने भी खरीद ली थी और इसके लिए उन्होंने 16 लाख रुपये बतौर पेशगी दे दिए थे। मगर जब उन्हें विवाद का पता चला तो उन्होंने जमीन खरीदने से हाथ खींच लिया और रुपये वापस ले लिए।
वर्ष 1985 के आसपास रेशम विभाग ने फार्म की जमीन खरीदी थी। उसमें से पांच एकड़ जमीन सड़क के पूर्वी ओर है, जिस पर कब्जा कर लिया गया है। उसे मुक्त कराने के लिए विभाग की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया है, जो कोर्ट में विचाराधीन है। - एमके गौतम, रेशम अधिकारी