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जरा याद करो कुर्बानी: बरेली कमिश्नरी में बरगद के पेड़ पर एक साथ 257 क्रांतिकारियों को दी गई थी फांसी

Mon, 14 Aug 2023 12:25 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 14 Aug 2023 12:25 PM IST
सार

जब देश गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा था, उस दौर में भी बरेली 10 माह पांच दिन तक आजाद रहा था। हालांकि बाद में अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों को हराकर बरेली पर फिर कब्जा कर लिया। इसके बाद अंग्रेजों ने 257 क्रांतिकारियों को एक साथ बरगद के पेड़ पर फांसी के फंदे से लटका दिया था।  

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Independence Day 257 freedom fighters hanged on a banyan tree in Bareilly by British
कमिश्नरी परिसर में बना शहीद स्मारक - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जिस आजादी का जश्न आज हर देशवासी मना रहा है, उसे हासिल करने के लिए न जाने कितने वीर सपूतों को अपनी कुर्बानियां देनी पड़ीं। आजादी की लड़ाई में बरेली के क्रांतिकारी भी प्राणों की आहुति देने से पीछे नहीं हटे। इसकी गवाही कमिश्नरी कार्यालय परिसर दे रहा है, जहां 257 क्रांतिकारियों को अंग्रेजों ने एक साथ फांसी पर लटका दिया था।

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बरेली कॉलेज के संग्रहालय में मौजूद दस्तावेजों के मुताबिक 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ शुरू हुई आजादी की जंग रुहेलखंड में भी छिड़ गई थी। एक दौर ऐसा था जब क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों को खदेड़कर 31 मई 1857 को बरेली को आजाद घोषित कर दिया था। 
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हुकूमत चलाने के लिए रुहेला सरदार नवाब खान बहादुर खां ने एक अन्य क्रांतिकारी नेता मुंशी शोभाराम को वजीर-ए-आजम घोषित किया। नियाज मोहम्मद को सूबेदार बनाया। जब देश गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा था, उस दौर में भी बरेली 10 माह पांच दिन तक आजाद रहा था। मगर नकटिया पुल पर हुई जंग में छह मई 1858 को अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों को परास्त कर बरेली पर फिर से कब्जा कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

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शहादत स्थल पर बना शहीद स्तंभ 

क्रांतिकारियों पर मुकदमा चला। अंग्रेजी हुकूमत की अदालत ने नवाब खान बहादुर खान समेत सभी को मौत की सजा सुनाई। 24 फरवरी 1860 को खान बहादुर खां को फांसी दी थी। जबकि 257 क्रांतिकारियों को कमिश्नरी स्थित बरगद के पेड़ से लटकाकर फांसी दी गई थी। दस्तावेजों के मुताबिक जिस पेड़ पर फांसी दी गई थी, वह सूख चुका है। वर्तमान कमिश्नरी कार्यालय के परिसर स्थित बरगद के पेड़ पर शहीद स्तंभ बना है, जिसका लोकार्पण 22 जुलाई 2006 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने किया था।

पुरानी कोतवाली पर नवाब खान बहादुर खान को दी थी फांसी

नवाब खान बहादुर खां को पुरानी कोतवाली पर बेड़ियों से बांधकर फांसी दी गई थी। पुरानी कोतवाली जर्जर हो चुकी है और वहां दुकानों ने निर्माण कार्य करा लिया है। हालांकि, जर्जर भवन के कुछ निशान अब भी मौजूद हैं। फांसी देने के बाद पुरानी जिला जेल में बेडियों के साथ ही नवाब खान बहादुर खान को पुरानी जिला जेल में दफनाया गया था। जेल के गेट पर उनकी मजार है, जो पहले जेल के अंदर हुआ करती थी।

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