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एक वैक्सीन के चक्कर में आईवीआरआई की साख पर बट्टा

Thu, 05 May 2016 01:25 AM IST
ब्यूराो अमर उजाला बरेली
ब्यूराो अमर उजाला बरेली Updated Thu, 05 May 2016 01:25 AM IST
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एफएमडी के नियंत्रण के लिए बनने वाली एक वैक्सीन के चक्कर में आईवीआरआई बदनाम हो रहा है। कास बता यह है कि इस बारे में मामला सबज्यूडिस बता कर अधिकारी मौन हैं और एक फेसबुक आईडी खबरों का सोर्स बनी हुई है। आईवीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. भोजराज सिंह ने वैक्सीन में कंटामिनेशन की बात कह कर जो जो जंग शुरू की थी, उन पर मानहानि का केस होने के बाद यह जंग अब लगातार फेसबुक पर चल रही है। यहीं समर्तन विरोध के खेल के साथ नए अपडेट मिल रहे हैं। डॉ. भोजराज सिंह ने इस संबंध में जांच के लिए बनी कमेटी पर भी सवाल उठाए हैं। इस पर विभागीय जांच हुई और अब यूपी वेटरीनरी एसोसिएशन और वेटरीनरी काउंसिल बीच में आने से आईवीआरआई ही विवादों में आ गया है।  
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2014 में आईवीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. भोजराज सिंह को पांच महीने के लिए सीसीएस एनआईएएच बागपत का डायरेक्टर बनाकर भेजा गया। एफएमडी की वैक्सीन वहां पर भेजी जाती है। बागपत वैक्सीन की टेस्टिंग के लिए आईवीआरआई बंगलूरू भेजता है। कायदे से आवीआरआई  बंगलूरू में टेस्टिंग होनी चाहिए। जबकि सीसीएस एनआईएएच बागपत के तत्कालीन डायरेक्टर डॉ. भोजराज सिंह ने खुद ही टेस्टिंग की और इस कंटामिनेटेड बता दिया।  डॉ. भोजराज सिंह ने सरकार को एक रिपोर्ट भी भेजने के साथ ही पूरे मामले को पब्लिक डोमेन में डाल दिया।  यह मामला प्रकाश में आते ही कृषि मंत्री ने जांच कमेटी बना दी। जांच कमेटी के चेयरमैन डॉ. गया प्रसाद को बनाया गया। कमेटी ने अपनी जांच में पाया कि डॉ. भोजराज सिंह ने गलत रिपोर्ट दी है। वैज्ञानिक पर कार्रवाई का भी निर्णय लिया गया। इसके साथ ही आईवीआरआई में वैक्सीन का परीक्षण कराया गया तो कंटामिनेशन नहीं मिला। वैक्सीन एकदम सही पाई गई, हालांकि यह वैक्सीन दूसरे बैच की थी। इस पूरे मामले के बाद वैक्सीन बनाने वाली कंपनी ने डॉ. भोजराज सिंह पर 105 करोड़ का मानहानि का मुकदमा कर दिया। सारा मामला कोर्ट में जाने की वजह से अब आईवीआरआई के  अधिकारी कोई बयान देने को तैयार नहीं हैं। लेकिन, डॉ. भोजराज सिंह लगातार फेसबुक पर अपडेट कर रहे हैं। 
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संसदीय समिति में नहीं उठा डॉ. भोजराज का मामला
बरेली। बुधवार को दिल्ली के पार्लियामेंट हाउस में हुई एग्रीकल्चर एंड फारमर्स वेलफेयर संसदीय समिति की बैठक में पशु रोग एफएमडी और पीपीआर पर तो बातचीत हुई, लेकिन आईवीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. भोजराज सिंह और वैक्सीन के संबंध कोई मुद्दा नहीं उठा। इस बैठक में आईवीआरआई के डायरेक्टर डॉ. आरके सिंह को भी बुलाया गया था। जबकि डॉ. भोजराज को लग रहा था कि उनका मामला बैठक में रखा जाएगा।    
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डॉ. भोजराज सिंह को पांच महीने के लिए सीसीएस एनआईएएच बागपत के डायरेक्टर बनाकर भेजा गया था। उन्हें वैक्सीन टेस्ट ही नहीं करनी थी, इसके बाद भी बागपत में टेस्ट कराया, वह भी ग्रेजुएशन के छात्रों से। कृषि मंत्री ने जांच समिति बनाई थी। जांच के बाद रिपोर्ट भी कृषि मंत्री को सौंप दी गई है। डॉ. भोजराज सिंह ने बिना डेटा और सबूत के वैक्सीन बनाने वाली भारत की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी पर आरोप लगाया है। 
- डॉ. गया प्रसाद, कुलपति, सरदार पटेल कृषि विश्वविद्यालय, मेरठ
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