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पांच साल में बरेली से हिले एई गयूर अहमद
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Wed, 18 May 2016 02:05 AM IST
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नगर निगम में लंबे समय से तैनात रहे एई गयूर अहमद का इलाहाबाद नगर निगम में तबादला हो गया। इनके स्थान पर लखनऊ नगर निगम से विनय कुमार पाठक को एई के पद पर तैनाती दी गई है। गयूर अहमद का मूल पद भी एई ही था लेकिन सूबे के कद्दावर मंत्री और अफसरों की मेहरबानी से वह पांच साल से प्रभारी एक्सईएन का काम देख रहे थे। तबादले के बाद गयूर अहमद से प्रभारी एक्सईएन का चार्ज लेकर एक्सईएन सतीश कुमार को सौंप दिया गया है।
नगर निगम में गयूर अहमद को एई के रूप में तैनाती 2011 में हुई थी। वह गाजियाबाद से एई के पद से ट्रांसफर होकर आए थे। सूबे के कद्दावर मंत्री के अलावा पड़ोसी जिले में सांसद और दर्जा मंत्री तक पहुंच रखने वाले गयूर अहमद का ढाई साल पहले बहराइच ट्रांसफर हुआ था लेकिन वह वहां ज्वाइन करने नहीं गए और ट्रांसफर रुकवा लिया। रिलायंस, केईआई समेत अन्य निजी कंपनियों की रोड कटिंग, सड़क और नाली निर्माण, जर्जर सड़कों के पैच वर्क, कोलतार खरीद के अलावा गांधी उद्यान का सुंदरीकरण, अनाधिकृत कब्जे वाले तालाबों की फेंसिंग न बनवाकर कब्जेदारों को फायदा पहुंचाने और बिल्डरों की कालोनियों में सड़क निर्माण जैसे मामलों में विवादित रहे। गांधी उद्यान में पौने दो करोड़ से सुंदरीकरण कराया गया। इसमें अधिकांश कामों के टेंडर नहीं निकाले गए। अधिकांश काम ठेकेदारों ने मनमाने तरीके से चार से पांच गुनी कीमत दर्शाकर किए। पार्षद राजेश अग्रवाल ने बोर्ड और कार्यकारिणी में भी काम की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। प्रभारी एक्सईएन नगर निगम में ई टेंडरिंग व्यवस्था लागू होने से पहले सड़क और नाली निर्माण के टेंडर पूल करने समेत अन्य मामले विवादित रहे। सूत्रों के मुताबिक तबादला रुकवाने के लिए एई देर रात लखनऊ रवाना हो गए।
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नगर निगम में गयूर अहमद को एई के रूप में तैनाती 2011 में हुई थी। वह गाजियाबाद से एई के पद से ट्रांसफर होकर आए थे। सूबे के कद्दावर मंत्री के अलावा पड़ोसी जिले में सांसद और दर्जा मंत्री तक पहुंच रखने वाले गयूर अहमद का ढाई साल पहले बहराइच ट्रांसफर हुआ था लेकिन वह वहां ज्वाइन करने नहीं गए और ट्रांसफर रुकवा लिया। रिलायंस, केईआई समेत अन्य निजी कंपनियों की रोड कटिंग, सड़क और नाली निर्माण, जर्जर सड़कों के पैच वर्क, कोलतार खरीद के अलावा गांधी उद्यान का सुंदरीकरण, अनाधिकृत कब्जे वाले तालाबों की फेंसिंग न बनवाकर कब्जेदारों को फायदा पहुंचाने और बिल्डरों की कालोनियों में सड़क निर्माण जैसे मामलों में विवादित रहे। गांधी उद्यान में पौने दो करोड़ से सुंदरीकरण कराया गया। इसमें अधिकांश कामों के टेंडर नहीं निकाले गए। अधिकांश काम ठेकेदारों ने मनमाने तरीके से चार से पांच गुनी कीमत दर्शाकर किए। पार्षद राजेश अग्रवाल ने बोर्ड और कार्यकारिणी में भी काम की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। प्रभारी एक्सईएन नगर निगम में ई टेंडरिंग व्यवस्था लागू होने से पहले सड़क और नाली निर्माण के टेंडर पूल करने समेत अन्य मामले विवादित रहे। सूत्रों के मुताबिक तबादला रुकवाने के लिए एई देर रात लखनऊ रवाना हो गए।
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