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Bareilly News: बढ़ते तापमान का गेहूं पर असर, किसानों के लिए जारी की एडवाइजरी
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- जिन किसानों ने देरी से की बुवाई, उनकी फसलें हो सकती हैं प्रभावित
बरेली। इस बार जनवरी माह से तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। उसका असर रबी सीजन की फसलों पर पड़ने लगा है। इससे गेहूं के पौधों की लंबाई कम रहेगी। दाने भी हल्के और छोटे हो सकते हैं। तापमान में हुए बदलाव ने उन किसानों की चिंता अधिक बढ़ा दी है, जिन्होंने दिसंबर में बुवाई की है। अगले सप्ताह तक तापमान ऐसा ही रहा तो उत्पादन पर असर पड़ेगा।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. आरएल सागर ने बताया कि गेहूं के लिए रात के समय ओस और दिन के समय चमकदार धूप सबसे अनुकूल मौसम होता है। लेकिन इस बार गेहूं को चमकदार धूप तो मिल रही है, लेकिन रात में ओस मिलना लगभग बंद हो गई है। गेहूं को कई चरणों में अलग-अलग तापमान की आवश्यकता होती है। मार्च व अप्रैल में वसंत में तापमान बढ़ जाता है, लेकिन अब इस बार फरवरी में ही मार्च जैसा तापमान होने से किसानों की चिंता बढ़ गई हैं। कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि गेहूं के लिए अधिकतम तापमान 24 और न्यूनतम 10 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए।
न्यूनतम तापमान 14 डिग्री तक पहुंचा
जनवरी और फरवरी माह में छह बार अधिकतम पारा 25 से 30 डिग्री तक पहुंच गया। वहीं न्यूनतम तापमान 14 डिग्री से नीचे नहीं हो रहा है। जिला कृषि अधिकारी ऋतुषा तिवारी ने बताया कि गेहूं को कम और स्थिर तापमान की आवश्यकता होती है। इस बार तापमान बढ़ गया। इससे गेहूं की फसल प्रभावित हो रही है।
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आलू को लग रहा झुलसा रोग
- सरसों की फसल के लिए जिन किसानों ने समय पर उपाय नहीं किए। वह माहू का शिकार हो गए हैं। इसी तरह से आलू में भी तापमान में अचानक बढ़ोतरी होने से झुलसा रोग लगने लगा है।
किसान यह करें उपाय
- गेहूं की खेतों में नमी बनाए रखने के लिए 10-15 दिनों के अंतर पर सिंचाई करते रहें। तापमान की जानकारी लेते रहें। तेज हवाओं के दौरान सिंचाई न करें अन्यथा फसल गिर सकती है।
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- गेहूं की अधिक सिंचाई न करें। इससे फसल गिरने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। 15 से 20 दिनों में एक बार ही सिंचाई करें। जिन किसानों ने देरी से फसल की बुवाई की है। उनकी फसल प्रभावित होने की संभावना है। - ऋतुषा तिवारी, जिला कृषि अधिकारी
संवाद
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बरेली। इस बार जनवरी माह से तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। उसका असर रबी सीजन की फसलों पर पड़ने लगा है। इससे गेहूं के पौधों की लंबाई कम रहेगी। दाने भी हल्के और छोटे हो सकते हैं। तापमान में हुए बदलाव ने उन किसानों की चिंता अधिक बढ़ा दी है, जिन्होंने दिसंबर में बुवाई की है। अगले सप्ताह तक तापमान ऐसा ही रहा तो उत्पादन पर असर पड़ेगा।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. आरएल सागर ने बताया कि गेहूं के लिए रात के समय ओस और दिन के समय चमकदार धूप सबसे अनुकूल मौसम होता है। लेकिन इस बार गेहूं को चमकदार धूप तो मिल रही है, लेकिन रात में ओस मिलना लगभग बंद हो गई है। गेहूं को कई चरणों में अलग-अलग तापमान की आवश्यकता होती है। मार्च व अप्रैल में वसंत में तापमान बढ़ जाता है, लेकिन अब इस बार फरवरी में ही मार्च जैसा तापमान होने से किसानों की चिंता बढ़ गई हैं। कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि गेहूं के लिए अधिकतम तापमान 24 और न्यूनतम 10 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए।
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न्यूनतम तापमान 14 डिग्री तक पहुंचा
जनवरी और फरवरी माह में छह बार अधिकतम पारा 25 से 30 डिग्री तक पहुंच गया। वहीं न्यूनतम तापमान 14 डिग्री से नीचे नहीं हो रहा है। जिला कृषि अधिकारी ऋतुषा तिवारी ने बताया कि गेहूं को कम और स्थिर तापमान की आवश्यकता होती है। इस बार तापमान बढ़ गया। इससे गेहूं की फसल प्रभावित हो रही है।
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आलू को लग रहा झुलसा रोग
- सरसों की फसल के लिए जिन किसानों ने समय पर उपाय नहीं किए। वह माहू का शिकार हो गए हैं। इसी तरह से आलू में भी तापमान में अचानक बढ़ोतरी होने से झुलसा रोग लगने लगा है।
किसान यह करें उपाय
- गेहूं की खेतों में नमी बनाए रखने के लिए 10-15 दिनों के अंतर पर सिंचाई करते रहें। तापमान की जानकारी लेते रहें। तेज हवाओं के दौरान सिंचाई न करें अन्यथा फसल गिर सकती है।
- गेहूं की अधिक सिंचाई न करें। इससे फसल गिरने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। 15 से 20 दिनों में एक बार ही सिंचाई करें। जिन किसानों ने देरी से फसल की बुवाई की है। उनकी फसल प्रभावित होने की संभावना है। - ऋतुषा तिवारी, जिला कृषि अधिकारी
संवाद