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आईएमए में अब सवर्ण-दलित की सियासत
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Fri, 08 Apr 2016 01:28 AM IST
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डॉक्टरों की सम्मनित संस्था आईएमए में गुटों की लड़ाई अब सवर्ण और दलित की सियासत में फंस गई है। चिंगारी तो होली के दिन भड़की थी लेकिन ये बुझने की बजाए अंदर ही अंदर सुलग रही है और अब किसी धमाके का इंतजार हो रहा है। अध्यक्ष और सचिव के झगड़े में पड़े एक अनुसूचित जाति के डॉक्टर ओपी भास्कर को अपमानित करने पर डॉक्टर दो गुटों की लड़ाई में नया मुद्दा आ गया है। बात बढ़ी तो इसे एथिक्स कमेटी को सौंपा गया। कमेटी ने जांच के बाद डॉ भास्कर के साथ ही उनका पक्ष लेने वाले आइएमए के सचिव डॉ डीपी गंगवार कोे संगठन से बाहर करने की सिफारिश कर दी है। मसला एक्जीक्यूटिव कमेटी को देखना है। इधर डाक्टरों का एक गुट इस मसले पर आमसभा बुलाने की मांग कर रहा है। लड़ाई ह्वाट्सएप पर भी चल रही है। कुछ दिन पहले इस मसले पर डॉक्टर भास्कर से बात हुई तो उन्होंने बताया था कि बहुत आहत हैं। अब पता चला है कि वह मेदांता में भर्ती हो गए हैं। उनकी बीमारी को भी इस विवाद से ही जोड़ कर देखा जा रहा है।
आईएमए में इस बार भी अध्यक्ष मेयर गुट के डॉ. रवीश अग्रवाल हैं, जबकि सचिव डॉ. डीपी गंगवार दूसरे गुट के हैं। सचिव का आरोप रहा कि उन्हें हर बार टीम से अलग माना गया और सौतेला व्यवहार किया गया। इसको लेकर आए दिन किसी न किसी पार्टी में बहस हो ही जाती थी। होली पार्टी के दौरान बहस कुछ ज्यादा ही बढ़ गई। पुलिस बुलाने की नौबत आन पड़ी। किसी तरह सभी को शांत कराया गया। बताया जा रहा है कि डॉ. भास्कर ने सचिव का पक्ष लिया तो बहस के दौरान उन्हें जाति सूचक शब्द कहे गए। उन्हाेंने इसकी एफआईआर दर्ज करानी चाही लेकिन आईएमए की बदनामी से बचने के लिए ऐसा नहीं किया गया। होली पार्टी का मजा उस रात किरकिरा हो गया।
एथिक्स कमेटी भी विवाद में
26 मार्च को एथिक्स कमेटी बुलाई गई। डॉ. अजय अग्रवाल कमेटी के चेयरमैन हैं। पार्टी में मौजूद लोगों के बयान लिए गए और सीसीटीवी फुटेज देखी गई। राय बनी आईएमए टीम की स्थिति न बिगडे़ इसलिए डॉ. ओपी भास्कर और डॉ. डीपी गंगवार को आईएमए से ही तीन साल के लिए बाहर किया जाए।दूसरे गुट ने एथिक्स कमेटी के फैसले को नकार दिया और एक्जीक्यूटिव कमेटी के लिए मामले को बढ़ा दिया गया।
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- यह था मामला
होलिका दहन की रात में 23 मार्च को आईएमए में पार्टी का आयोजन किया गया। इस दौरान अध्यक्ष डॉ. रवीश अग्रवाल और सचिव डॉ. डीपी गंगवार की बातचीत के दौरान बहस होने लगी। इसमें डॉ. ओम प्रकाश भास्कर भी डॉ. डीपी गंगवार का पक्ष में बोलने लगे। बहस बढ़ गई और स्थिति बिगड़ने लगी। अपशब्दों का इस्तेमाल हुआ और जाति सूचक शब्दों का भी। इसके बाद मामला एथिक्स कमेटी में बुलाया गया।
- आईएमए का कायदा
आईएमए के नियम के अनुसार विवादित मामले एथिक्स कमेटी में रखा जाता है। निस्तारण न होने पर एक्जीक्यूटिव कमेटी और हाउस में मामला जाता है। मांग पर जनरल बॉडी मीटिंग की बात उठी है।
वर्जन--
- यह परिवार के दो भाइयों का मामला है। इसे सुलझा लिया जाएगा। सारी बातें एथिक्स कमेटी में रखी गई, बयान हुए और वीडियो क्लीपिंग भी दिखाई गई है। मैंने ऐसी कोई बात नहीं की जिससे किसी को तकलीफ पहुंचे।- डॉ. रवीश अग्रवाल, प्रेसीडेंट, आईएमए बरेली
- होली की पार्टी में छोटी सी बात को बेवजह तूल दिया गया। उसे काफी फील किया है। एथिक्स कमेटी ने क्या निर्णय लिया यह नहीं पता। एक्जीक्यूटिव कमेटी में मामला गया है।- डॉ. डीपी गंगवार, सचिव, आईएमए
- अभी सचिव और सदस्य पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। एक्जीक्यूटिव कमेटी तय करेगी क्या करना है। डॉ. भास्कर की तबियत खराब होेने से बैठक टाल दी गई है।- डॉ. अमित अग्रवाल, चेयरमैन, एथिक्स कमेटी
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आईएमए में इस बार भी अध्यक्ष मेयर गुट के डॉ. रवीश अग्रवाल हैं, जबकि सचिव डॉ. डीपी गंगवार दूसरे गुट के हैं। सचिव का आरोप रहा कि उन्हें हर बार टीम से अलग माना गया और सौतेला व्यवहार किया गया। इसको लेकर आए दिन किसी न किसी पार्टी में बहस हो ही जाती थी। होली पार्टी के दौरान बहस कुछ ज्यादा ही बढ़ गई। पुलिस बुलाने की नौबत आन पड़ी। किसी तरह सभी को शांत कराया गया। बताया जा रहा है कि डॉ. भास्कर ने सचिव का पक्ष लिया तो बहस के दौरान उन्हें जाति सूचक शब्द कहे गए। उन्हाेंने इसकी एफआईआर दर्ज करानी चाही लेकिन आईएमए की बदनामी से बचने के लिए ऐसा नहीं किया गया। होली पार्टी का मजा उस रात किरकिरा हो गया।
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एथिक्स कमेटी भी विवाद में
26 मार्च को एथिक्स कमेटी बुलाई गई। डॉ. अजय अग्रवाल कमेटी के चेयरमैन हैं। पार्टी में मौजूद लोगों के बयान लिए गए और सीसीटीवी फुटेज देखी गई। राय बनी आईएमए टीम की स्थिति न बिगडे़ इसलिए डॉ. ओपी भास्कर और डॉ. डीपी गंगवार को आईएमए से ही तीन साल के लिए बाहर किया जाए।दूसरे गुट ने एथिक्स कमेटी के फैसले को नकार दिया और एक्जीक्यूटिव कमेटी के लिए मामले को बढ़ा दिया गया।
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- यह था मामला
होलिका दहन की रात में 23 मार्च को आईएमए में पार्टी का आयोजन किया गया। इस दौरान अध्यक्ष डॉ. रवीश अग्रवाल और सचिव डॉ. डीपी गंगवार की बातचीत के दौरान बहस होने लगी। इसमें डॉ. ओम प्रकाश भास्कर भी डॉ. डीपी गंगवार का पक्ष में बोलने लगे। बहस बढ़ गई और स्थिति बिगड़ने लगी। अपशब्दों का इस्तेमाल हुआ और जाति सूचक शब्दों का भी। इसके बाद मामला एथिक्स कमेटी में बुलाया गया।
- आईएमए का कायदा
आईएमए के नियम के अनुसार विवादित मामले एथिक्स कमेटी में रखा जाता है। निस्तारण न होने पर एक्जीक्यूटिव कमेटी और हाउस में मामला जाता है। मांग पर जनरल बॉडी मीटिंग की बात उठी है।
वर्जन--
- यह परिवार के दो भाइयों का मामला है। इसे सुलझा लिया जाएगा। सारी बातें एथिक्स कमेटी में रखी गई, बयान हुए और वीडियो क्लीपिंग भी दिखाई गई है। मैंने ऐसी कोई बात नहीं की जिससे किसी को तकलीफ पहुंचे।- डॉ. रवीश अग्रवाल, प्रेसीडेंट, आईएमए बरेली
- होली की पार्टी में छोटी सी बात को बेवजह तूल दिया गया। उसे काफी फील किया है। एथिक्स कमेटी ने क्या निर्णय लिया यह नहीं पता। एक्जीक्यूटिव कमेटी में मामला गया है।- डॉ. डीपी गंगवार, सचिव, आईएमए
- अभी सचिव और सदस्य पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। एक्जीक्यूटिव कमेटी तय करेगी क्या करना है। डॉ. भास्कर की तबियत खराब होेने से बैठक टाल दी गई है।- डॉ. अमित अग्रवाल, चेयरमैन, एथिक्स कमेटी