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अगर आप शक्की हैं तो कहीं  सिजोफ्रेनिया से ग्रसित तो नहीं  

Thu, 25 May 2017 01:32 AM IST
बरेली। 
बरेली।  Updated Thu, 25 May 2017 01:32 AM IST
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 If you are smoky somewhere If not suffering from schizophrenia
schizophrenia - फोटो : schizophrenia
......सिजोफ्रेनिया दिवस पर विशेष......
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कान में अजीब और गरीब आवाजें आना, एकांत ढूंढना, गुस्सा अधिक आना और बेवजह का शक करना। यह कुछ ऐसे लक्षण हैं जो सिजोफ्रेनिया बीमारी का संकेत देते हैं। 15 से 25 साल में होने वाली यह बीमारी आम मानसिक बीमारियों से काफी अलग है। खास बात यह है कि इस बीमारी में मरीज को पता ही नहीं होता है कि वह सिजोफ्रेनिया ग्रसित है। हालांकि भारत में इससे पीड़ित लोगों की संख्या बहुत ज्यादा तो नहीं है, लेकिन फिर भी चिंता का विषय है। अच्छी बात यह है कि बीमारी पूरी तरह से ठीक भी होती है। 
सिजोफ्रेनिया पर शोध करने वाले जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अशीष कुमार बताते हैं कि बरेली जिला अस्पताल में भी कई ऐसे लोग हैं जो इसका इलाज करा रहे हैं। इसमें कुछ शिक्षक और प्रोफेसर भी शामिल हैं। मानसिक अस्पताल में इस बीमारी से कई मरीज पीड़ित हैं। उन्होंने बताया कि इस बीमारी की हद तो यहां तक है कि व्यक्ति को शक की ऐसी बीमारी होती है कि वह खाना पीना तक छोड़ देते है। उसे डर होता है कि लोग इसमें जहर मिला देंगे। उन्होंने बताया कि शोध के दौरान रांची में उनके पास एक ऐसा ही केस आया था, जिसमें मरीज ने खुद को आईएसआई का एजेंट घोषित करके मंत्रालय को मेल कर दिया था। शहर में इस मौके पर मनोसमर्पण मनोसामाजिक सेवा समिति के अध्यक्ष शैलेश कुमार के नेतृत्व में कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था। 
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क्यों होती है यह बीमारी
डॉ. आशीष ने बताया कि बीमारी का मुख्य कारण दिमाग में डोपामाइन न्यूरो ट्रांसमीटर्स का असंतुलन है, जो कि एक तरह का रसायन होता है। दिन भर होने वाला तनाव, उलझन, व्यस्त जिंदगी, भागदौड़ और असहनीय घटनाएं भी इस बीमारी को बढ़ाती हैं। इस बीमारी में लोगाें के काम करने की क्षमता खोने लगती है। 
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घबराए नहीं, इलाज संभव है
डॉक्टर ने बताया कि यूके और यूएसए में इस बीमारी से अधिक लोग पीड़ित हैं, लेकिन भारत में इससे ठीक होने की संभावना अधिक रहती है। क्याेंकि यहां का सामाजिक परिवेश मदद करता है। इतनी दवाएं आ चुकी हैं कि इससे बीमारी जल्दी ठीक होती है और लोग सामान्य लाइफ जी सकते हैं। मरीज को अस्पताल तक लाने में पुलिस की मदद भी ले सकते हैं। 
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