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दिवाली में उड़ गई तन्ख्वाह.. अब कैसे कटेंगे नौ दिन
बरेली।
Updated Mon, 23 Oct 2017 01:45 AM IST
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यह उम्मीद सभी को रहती है कि दिवाली पर लक्ष्मी जी की कृपा बरसेगी। यही वजह है कि व्यापार करने वाले हों या नौकरी वाले, सभी दिवाली पर दिल खोलकर खर्च करते हैं। मगर इस बार दिवाली अक्तूबर के आखिर में पड़ने से नौकरी वालों का बजट गड़बड़ा गया है। सरकारी नौकरी वालों को तो एडवांस, बोनस और कुछ भत्तों के रूप में राहत मिल गई लेकिन निजी कर्मचारियों की दिवाली मनाने में सारी सैलरी चली गई। अब अगले महीने का वेतन मिलने में अभी नौ दिन बचे हैं और तमाम जरूरतें सिर पर खड़ी हैं। ऐसे लोगों को उधार लेकर तक काम चलाने को मजबूर होना पड़ रहा है। अमर उजाला टीम की एक रिपोर्ट।
दिवाली में सबके उधार चुका दिए, अब खाली हो गए
निजी कंपनी में कार्यरत मोहित जायसवाल का कहना है कि किसी की भी दिवाली सूनी न जाए इसलिए दूध वाले से लेकर अखबार वाले और कपड़े वाले सभी का उधार चुका दिया था। लेकिन अब खुद की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि दोबारा बैंक से पैसे निकालने पड़े हैं, क्योंकि दिवाली में घर में कैश बचा ही नहीं।
पति की सैलरी से हुई दिवाली, अपनी सैलरी से चलेगा घर
स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत ज्योति सचान और उनके पति दोनों नौकरी करते हैं। ज्योति का कहना है कि दिवाली तो उन्होंने पति की सैलरी से मनाई। खूब दिल खोलकर खर्च किया, लेकिन अब घर अपनी सैलरी से चलाना पड़ेगा। हालांकि ज्योति ने यह भी कहा कि दिवाली से पहले उन्हें सैलरी नहीं मिल पाई थी। अब भी अगर नहीं मिली तो मुश्किल हो जाएगी।
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फेस्टिवल एडवांस लेकर मनाई दिवाली
नगर निगम में कार्यरत सतीश ऋषिवाल ने बताया कि उनकी तनख्वाह तो महीने के बीच में ही खत्म हो गई। बोनस करीब छह हजार रुपये मिलना था लेकिन सिर्फ 1750 रुपये मिला, बाकी पीएफ में जमा हो गया। ऐसे में दिवाली कैसे मनाते। उन्होंने बताया कि करीब पांच हजार रुपये का फेस्टिवल एडवांस लेना पड़ा तब जाकर कहीं दिवाली पर खरीदारी हुई। अब प्रार्थना कर रहा हूं कि किसी तरह एक तारीख तक काम चल जाए।
कर ली थी खर्च की प्लानिंग, हो गई दिवाली
सरकारी स्कूल में शिक्षिका राशि सक्सेना ने बताया कि दिवाली से पहले ही उन्होंने प्लान बना लिया था कि कैसे खर्च करना है। उनके पति मोहित भी सरकारी नौकरी करते हैं लिहाजा ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। राशि ने बताया कि पति की तनख्वाह से महीने का खर्च चलाया है जबकि उनकी तनख्वाह से दिवाली की जरूरत पूरी हो गई।
ऐसे भी हुईं जरूरतें पूरी
लेना पड़ा क्रेडिट कार्ड लोन
दिवाली पर काफी संख्या क्रेडिट कार्ड से लोन लेकर अपनी जरूरताें को पूरा करने वालों की भी रही। एक निजी बैंक कर्मी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दिवाली के बाद से बैंक बंद है, लेकिन इससे एक दिन पहले शाम चार बजे तक करीब 38 लोग बैंक से क्रेडिट कार्ड पर लोन के लिए आए थे।
अभी नौ दिन के ये खर्चे
राशन
सब्जी
दवा
पेट्रोल और परिवहन
अन्य खर्चें
चार दिन बाद खुलेंगे बैंक, बढ़ेगी भीड़
पांच दिन तक दिवाली की छुट्टी के बाद सोमवार से सरकारी और निजी बैंक खुलेंगे। लंबे अवकाश के बाद बैंकों भीड़ बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। बैंकों में भीड़ संभालने के लिए अतिरिक्त इंतजाम भी किए जा रहे हैं। हालांकि एसबीआई, ओरियंटल बैंक, पीएनबी, इलाहाबाद बैंक, सेंट्रल बैंक समेत कई बैंकों ने अवकाश के दिनों में भी अपने एटीएम कैश से लोड करा दिए थे लिहाजा त्योहारों के बीच कैश की किल्लत पैदा नहीं हुई। चेक, ड्राफ्ट और अन्य भौतिक लेनदेन जरूर इस बीच प्रभावित रहे। रविवार को बैंक ऑफ बड़ौदा, यूको बैंक, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, पीएनबी आदि कई बैंकों के एटीएम बंद मिले, जिससे उनके ग्राहकों को दूसरे बैंकों के एटीएम से कैश निकालना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा खराब रही। एसबीआई के वरिष्ठ अधिकारी आरके गौड़ और लीड बैंक प्रबंधक ओपी बढे़रा ने बताया कि चार दिन बाद बैंक खुलने पर होने वाली संभावित ग्राहकों की भीड़ को देखते हुए उचित प्रबंध किए गए हैं।
दिवाली में सबके उधार चुका दिए, अब खाली हो गए
निजी कंपनी में कार्यरत मोहित जायसवाल का कहना है कि किसी की भी दिवाली सूनी न जाए इसलिए दूध वाले से लेकर अखबार वाले और कपड़े वाले सभी का उधार चुका दिया था। लेकिन अब खुद की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि दोबारा बैंक से पैसे निकालने पड़े हैं, क्योंकि दिवाली में घर में कैश बचा ही नहीं।
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पति की सैलरी से हुई दिवाली, अपनी सैलरी से चलेगा घर
स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत ज्योति सचान और उनके पति दोनों नौकरी करते हैं। ज्योति का कहना है कि दिवाली तो उन्होंने पति की सैलरी से मनाई। खूब दिल खोलकर खर्च किया, लेकिन अब घर अपनी सैलरी से चलाना पड़ेगा। हालांकि ज्योति ने यह भी कहा कि दिवाली से पहले उन्हें सैलरी नहीं मिल पाई थी। अब भी अगर नहीं मिली तो मुश्किल हो जाएगी।
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फेस्टिवल एडवांस लेकर मनाई दिवाली
नगर निगम में कार्यरत सतीश ऋषिवाल ने बताया कि उनकी तनख्वाह तो महीने के बीच में ही खत्म हो गई। बोनस करीब छह हजार रुपये मिलना था लेकिन सिर्फ 1750 रुपये मिला, बाकी पीएफ में जमा हो गया। ऐसे में दिवाली कैसे मनाते। उन्होंने बताया कि करीब पांच हजार रुपये का फेस्टिवल एडवांस लेना पड़ा तब जाकर कहीं दिवाली पर खरीदारी हुई। अब प्रार्थना कर रहा हूं कि किसी तरह एक तारीख तक काम चल जाए।
कर ली थी खर्च की प्लानिंग, हो गई दिवाली
सरकारी स्कूल में शिक्षिका राशि सक्सेना ने बताया कि दिवाली से पहले ही उन्होंने प्लान बना लिया था कि कैसे खर्च करना है। उनके पति मोहित भी सरकारी नौकरी करते हैं लिहाजा ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। राशि ने बताया कि पति की तनख्वाह से महीने का खर्च चलाया है जबकि उनकी तनख्वाह से दिवाली की जरूरत पूरी हो गई।
ऐसे भी हुईं जरूरतें पूरी
लेना पड़ा क्रेडिट कार्ड लोन
दिवाली पर काफी संख्या क्रेडिट कार्ड से लोन लेकर अपनी जरूरताें को पूरा करने वालों की भी रही। एक निजी बैंक कर्मी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दिवाली के बाद से बैंक बंद है, लेकिन इससे एक दिन पहले शाम चार बजे तक करीब 38 लोग बैंक से क्रेडिट कार्ड पर लोन के लिए आए थे।
अभी नौ दिन के ये खर्चे
राशन
सब्जी
दवा
पेट्रोल और परिवहन
अन्य खर्चें
चार दिन बाद खुलेंगे बैंक, बढ़ेगी भीड़
पांच दिन तक दिवाली की छुट्टी के बाद सोमवार से सरकारी और निजी बैंक खुलेंगे। लंबे अवकाश के बाद बैंकों भीड़ बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। बैंकों में भीड़ संभालने के लिए अतिरिक्त इंतजाम भी किए जा रहे हैं। हालांकि एसबीआई, ओरियंटल बैंक, पीएनबी, इलाहाबाद बैंक, सेंट्रल बैंक समेत कई बैंकों ने अवकाश के दिनों में भी अपने एटीएम कैश से लोड करा दिए थे लिहाजा त्योहारों के बीच कैश की किल्लत पैदा नहीं हुई। चेक, ड्राफ्ट और अन्य भौतिक लेनदेन जरूर इस बीच प्रभावित रहे। रविवार को बैंक ऑफ बड़ौदा, यूको बैंक, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, पीएनबी आदि कई बैंकों के एटीएम बंद मिले, जिससे उनके ग्राहकों को दूसरे बैंकों के एटीएम से कैश निकालना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा खराब रही। एसबीआई के वरिष्ठ अधिकारी आरके गौड़ और लीड बैंक प्रबंधक ओपी बढे़रा ने बताया कि चार दिन बाद बैंक खुलने पर होने वाली संभावित ग्राहकों की भीड़ को देखते हुए उचित प्रबंध किए गए हैं।