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मंत्री के बेटे की मौत के बाद लखनऊ हाईवे पर लगाया ‘पैबंद’ फिर उधड़ा
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बरेली। उत्तराखंड के शिक्षामंत्री अरविंद पांडेय के बेटे की एक्सीडेंट में मौत के बाद एनएचएआई ने फरीदपुर टोल प्लाजा के पास कुछ दिन पहले ही खतरनाक गड्ढों को भरने के लिए पैच वर्क कराया था जिनके उखड़ने से यहां फिर गहरा गड्ढा हो गया है। एक्सीडेंट जोन में गड्ढा होने के बावजूद एनएचएआई यहां सिर्फ खानापूर्ति कर रही है। अधूरे बने टोला प्लाजा पर भी वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का सिलसिला जारी है। हाईवे पर फरीदपुर मोड़ के पास भी गड्ढे हो गए हैं। उसके आगे भी हाईवे का हाल तो बहुत खराब है।
लखनऊ हाईवे की स्थिति दिन ब दिन बदतर होती जा रही है। फरीदपुर से पहले गौसगंज के पास हाईवे का एक हिस्सा बना ही नहीं है। यहां डायवर्जन के साथ हाईवे पर एक ही तरफ आने-जाने वाला ट्रैफिक गुजर रहा है। रूट डायवर्जन के पास खतरनाक मोड़ पर ही बहुत बड़ा गड्ढा है। इसमें कार सहित कई छोटे वाहनों के अनियंत्रित होकर सामने आने वाले दूसरे वाहनों से टकराने का खतरा बना रहता है। कुछ दिन पहले उत्तराखंड के मंत्री के बेटे की भी यहां इसी वजह से मौत हो गई थी। इसके बाद यहां हादसे में कई लोगों की जान जा चुकी है। मंत्री के बेटे की मौत के बाद एनएचएआई की टीम ने यहां गड्ढा भरने के लिए पैच बनाने के साथ रोड सेफ्टी के नाम पर कुछ और छिटपुट काम कराए थे। इसमें लीपापोती होने से एक्सीडेंट जोन बने गौसगंज में फिर से बड़ा गड्ढा हो गया है। बारिश में डामर और बजरी उधड़ रही है। हैवी ट्रैफिक से फिर से खतरा पैदा हो गया है। उसके आगे अधूरे पड़े टोल प्लाजा के पास भी ड्राइवरों को सचेत करने के लिए सड़क सुरक्षा के काम नहीं हुए हैं। यहां एक बार फिर एक ट्रक हादसे का शिकार हो गया। एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि जहां कहीं भी गड्ढे हो रहे हैं, उनको चिह्नित कर उन्हें दोबारा भरवाया जा रहा है।
मंत्रीजी! अब आप ही कुछ करिए
लखनऊ हाईवे के अधूरे कामों को पूरा करने के लिए एनएचएआई को करीब 900 करोड़ रुपये की जरूरत है। सालभर से एनएचएआई के अधिकारी इस बजट के पास होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन कोई सुध नहीं ली जा रही है। कमिश्नर रणवीर प्रसाद भी हाथ-पांव मारकर देख चुके हैं। हाईवे की खतरनाक हालत देखकर अब पब्लिक को केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार से उम्मीद है। लोगों का कहना है कि अब मंत्री ही राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से सीधे मिलकर इस खतरे से बाहर निकाल सकते हैं।
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लखनऊ हाईवे की स्थिति दिन ब दिन बदतर होती जा रही है। फरीदपुर से पहले गौसगंज के पास हाईवे का एक हिस्सा बना ही नहीं है। यहां डायवर्जन के साथ हाईवे पर एक ही तरफ आने-जाने वाला ट्रैफिक गुजर रहा है। रूट डायवर्जन के पास खतरनाक मोड़ पर ही बहुत बड़ा गड्ढा है। इसमें कार सहित कई छोटे वाहनों के अनियंत्रित होकर सामने आने वाले दूसरे वाहनों से टकराने का खतरा बना रहता है। कुछ दिन पहले उत्तराखंड के मंत्री के बेटे की भी यहां इसी वजह से मौत हो गई थी। इसके बाद यहां हादसे में कई लोगों की जान जा चुकी है। मंत्री के बेटे की मौत के बाद एनएचएआई की टीम ने यहां गड्ढा भरने के लिए पैच बनाने के साथ रोड सेफ्टी के नाम पर कुछ और छिटपुट काम कराए थे। इसमें लीपापोती होने से एक्सीडेंट जोन बने गौसगंज में फिर से बड़ा गड्ढा हो गया है। बारिश में डामर और बजरी उधड़ रही है। हैवी ट्रैफिक से फिर से खतरा पैदा हो गया है। उसके आगे अधूरे पड़े टोल प्लाजा के पास भी ड्राइवरों को सचेत करने के लिए सड़क सुरक्षा के काम नहीं हुए हैं। यहां एक बार फिर एक ट्रक हादसे का शिकार हो गया। एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि जहां कहीं भी गड्ढे हो रहे हैं, उनको चिह्नित कर उन्हें दोबारा भरवाया जा रहा है।
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मंत्रीजी! अब आप ही कुछ करिए
लखनऊ हाईवे के अधूरे कामों को पूरा करने के लिए एनएचएआई को करीब 900 करोड़ रुपये की जरूरत है। सालभर से एनएचएआई के अधिकारी इस बजट के पास होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन कोई सुध नहीं ली जा रही है। कमिश्नर रणवीर प्रसाद भी हाथ-पांव मारकर देख चुके हैं। हाईवे की खतरनाक हालत देखकर अब पब्लिक को केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार से उम्मीद है। लोगों का कहना है कि अब मंत्री ही राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से सीधे मिलकर इस खतरे से बाहर निकाल सकते हैं।
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