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फिल्मों से किनारा कर लिया राजू नौशाद ने
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Tue, 29 Nov 2016 01:09 AM IST
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Hiatus from films Taken Raju Naushad
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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फिल्मी दुनिया के मशहूर संगीतकार मरहूम नौशाद के साहबजादे संगीतकार राजू नौशाद फिल्मों से लगभग किनारा कर चुके हैं। उनका कहना है कि अब जो गाने बन रहे हैं उनको साज दे पाना संगीत के साथ नाइंसाफी है।
राजू नौशाद यहां मिशन हैप्पीनेस के कार्यक्रम में शिरकत करने आए हुए थे। उनके साथ उनकी पत्नी सबा सुल्तानपुरी (मजरूह सुल्तानपुरी की बेटी) भी थीं। राजू नौशाद ने एक सवाल के जवाब में कहा कि डीसेंट गाने हों तो काम करने में कोई हर्ज नहीं है। फिलहाल ऐसा माहौल नहीं है। फिर मैं वो काम नहीं करता जिसके लिए दिल न कहे। उन्होंने मजरूह सुल्तानपुरी का एक किस्सा सुनाया। बोले, बात उस वक्त की है जब गाना आया था ‘चोली के पीछे क्या है....’। उसी दौर में एक साहब उनके पास कुछ उसी तरह का एक गाना लिखवाने के लिए आए। उनसे फाइल लेकर गाना देखा और यह कहते हुए फेंक दिया कि वह सियाही से शायरी करते हैं नापाक तरल से नहीं।
राजू नौशाद बताते हैं कि वह शुरू में अपने पिता के साथ संगीतकार के रूप में काम करते रहे। ताजमहल फिल्म के दौरान वह बीमार थे तो उन्होंने ने ही ज्यादातर संगीत दिया। इसके अलावा स्वतंत्र रूप से उन्होंने ‘यहां से शहर देखो’, ‘सलमा’, ‘दिल एक मुसाफिर’ जैसी फिल्मों में संगीत दिया है। फिलहाल वह ज्यादातर बाहर के कार्यक्रम कर रहे हैं। इसके अलावा इबादत ग्रुप चला रहे हैं, जिसके माध्यम से शायरों को प्रमोट करते हैं। सबा ने बताया कि हाउस वाइफ हैं। शादी से पहले कुछ लिख लिया करती थीं। अब सिर्फ परिवार देख रही हैं।
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राजू नौशाद यहां मिशन हैप्पीनेस के कार्यक्रम में शिरकत करने आए हुए थे। उनके साथ उनकी पत्नी सबा सुल्तानपुरी (मजरूह सुल्तानपुरी की बेटी) भी थीं। राजू नौशाद ने एक सवाल के जवाब में कहा कि डीसेंट गाने हों तो काम करने में कोई हर्ज नहीं है। फिलहाल ऐसा माहौल नहीं है। फिर मैं वो काम नहीं करता जिसके लिए दिल न कहे। उन्होंने मजरूह सुल्तानपुरी का एक किस्सा सुनाया। बोले, बात उस वक्त की है जब गाना आया था ‘चोली के पीछे क्या है....’। उसी दौर में एक साहब उनके पास कुछ उसी तरह का एक गाना लिखवाने के लिए आए। उनसे फाइल लेकर गाना देखा और यह कहते हुए फेंक दिया कि वह सियाही से शायरी करते हैं नापाक तरल से नहीं।
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राजू नौशाद बताते हैं कि वह शुरू में अपने पिता के साथ संगीतकार के रूप में काम करते रहे। ताजमहल फिल्म के दौरान वह बीमार थे तो उन्होंने ने ही ज्यादातर संगीत दिया। इसके अलावा स्वतंत्र रूप से उन्होंने ‘यहां से शहर देखो’, ‘सलमा’, ‘दिल एक मुसाफिर’ जैसी फिल्मों में संगीत दिया है। फिलहाल वह ज्यादातर बाहर के कार्यक्रम कर रहे हैं। इसके अलावा इबादत ग्रुप चला रहे हैं, जिसके माध्यम से शायरों को प्रमोट करते हैं। सबा ने बताया कि हाउस वाइफ हैं। शादी से पहले कुछ लिख लिया करती थीं। अब सिर्फ परिवार देख रही हैं।
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