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अस्पताल सील करने पहुंचे एसीएमओ तो भर्ती विधायक बोले हमको भी करो सील

Wed, 14 Apr 2021 12:52 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 14 Apr 2021 12:52 AM IST
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Health
एक निजी अस्पताल में विधायक से बात करते एसीएमओ। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। शहर के एक निजी अस्पताल में अवैध रूप से कोविड-19 की जांच करने का पता चलने पर जब सीएमओ कार्यालय की टीम अस्पताल को सील करने पहुंची तो, वहां इलाज करा रहे भाजपा विधायक भड़क गए। उन्होंने कहा कि उन्हें भी सील कर दिया जाए..। विधायक के विरोध के चलते जांच टीम वापस हो गई।
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शहर निवासी एक महिला की मंगलवार को जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इससे पहले घर वाले इलाज के लिए उसे सेठघाट रोड स्थित एक निजी अस्पताल लेकर गए थे, जहां पर कोरोना जांच कर महिला को संक्रमित बताकर जिला अस्पताल भेज दिया गया, जहां उनकी मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन के पूछताछ करने पर परिजन ने निजी अस्पताल की जांच में संक्रमित होने की बात बताई। निजी अस्पताल में बिना अनुमति जांच किए जाने की जानकारी लगने पर स्वास्थ्य महकमे में अफरातफरी मच गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ डॉ. मनोज अग्रवाल ने एसीएमओ डॉ. आरपी दीक्षित को अस्पताल सील करने के लिए भेजा। जांच टीम अस्पताल सील करने की प्रक्रिया अपनाती, उससे पहले ही वहां इलाज करा रहे धौरहरा से भाजपा विधायक बाला प्रसाद अवस्थी अपने इलाज का हवाला देते हुए भड़क गए। उन्होंने कहा कि वह वहीं धरने पर बैठ जाएंगे। विधायक की जिद के आगे सीएमओ कार्यालय टीम की कार्रवाई सिर्फ अस्पताल कर्मियों की कोरोना जांच तक ही सिमट कर रह गई।
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बिना अनुमति हो रही थी जांच
स्वास्थ्य विभाग के लोग बताते हैं कि कोरोना की जांच करने के लिए सभी को अनुमति नहीं है। जांच के बाद रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करनी होती है, जिससे पॉजिटिवों की सही संख्या की जानकारी लग सके। यदि इस तरह चोरी छिपे जांच होती रही तो पॉजिटिव मरीजों की सही संख्या की जानकारी होना मुश्किल होगा। इससे जिले के हालात और बिगड़ेंगे।
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एक महिला की जिला अस्पताल में मौत हुई थी, जिसे चित्रा अस्पताल में जांच कर कोरोना पॉजिटिव बताया गया था। जबकि उनके पास जांच करने की अनुमति नहीं है। वहां एक विधायक भी भर्ती थे। अस्पताल स्टाफ की जांच कराकर एहतियात बरतने की चेतावनी दी है।
-डॉ. मनोज अग्रवाल, सीएमओ
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हमने टीका लगवाया था, जिसके बाद हमारी तबीयत बिगड़ी थी। हमने जांच टीम से सिर्फ यह कहा था कि अस्पताल सील कर दोगे तो हम कहां इलाज करवाएंगे। हमने सिर्फ अपने इलाज की बात रखी थी, हमने नहीं रोका सील करने से। हमने अधिकारियों के हाथ भी जोड़े कि हमारी तबीयत ठीक नहीं है। सरकारी अस्पताल में क्या-क्या होता है, यह किसी से छिपा नहीं है। इसीलिए हमने निजी अस्पताल में इलाज कराया।

-बाला प्रसाद अवस्थी, विधायक, धौरहरा
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हमारे यहां कोरोना की जांच नहीं होती है। मैंने मरीज को देखा तक नहीं। हो सकता है कि किसी कर्मचारी ने देखकर उसे जिला अस्पताल भेजा हो। स्वास्थ्य विभाग के लोग बिना मतलब तिल का ताड़ बनाने के लिए आए थे।
-डॉ. एसपी वर्मा, चित्रा हॉस्पिटल
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