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बच्चों में तेजी से बढ़ रहा निमोनिया, रोजाना भर्ती हो रहे 6-7 मरीज
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बरेली। सर्दी बढ़ने के साथ ही बच्चे निमोनिया की चपेट में आने लगे हैं। रविवार को निमोनिया से पीड़ित छह बच्चे जिला अस्पताल में भर्ती किए गए। वार्ड इंचार्ज संगीता ने बताया कि निमोनिया के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रोजाना छह-सात मरीज पहुंच रहे हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कामेंद्र ने बताया कि बच्चों में खांसी-जुकाम के बाद निमोनिया का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। निमोनिया ज्यादातर बैैक्टीरिया, वायरस या फंगस के हमले से होता है। मौसम बदलने, सर्दी लगने, फेफ ड़ों पर चोट लगने के अलावा चिकन पॉक्स के बाद इसकी आशंका बढ़ जाती है। निमोनिया सांस से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है। इसमें फेफड़ों में संक्रमण हो जाता है। आमतौर पर बुखार या जुकाम होने के बाद निमोनिया होता है और यह 10 से 12 दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन कई बार यह खतरनाक भी हो जाता है। निमोनिया का अटैक बच्चों पर ज्यादा होता है। अगर बच्चे का सर्दी-जुकाम ठीक नहीं हो रहा है तो बिना समय गंवाए चिकित्सक को दिखाएं। छाती का एक्सरे करवाएं, ताकि निमोनिया होने या न होने का पता चल सके।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कामेंद्र ने बताया कि बच्चों में खांसी-जुकाम के बाद निमोनिया का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। निमोनिया ज्यादातर बैैक्टीरिया, वायरस या फंगस के हमले से होता है। मौसम बदलने, सर्दी लगने, फेफ ड़ों पर चोट लगने के अलावा चिकन पॉक्स के बाद इसकी आशंका बढ़ जाती है। निमोनिया सांस से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है। इसमें फेफड़ों में संक्रमण हो जाता है। आमतौर पर बुखार या जुकाम होने के बाद निमोनिया होता है और यह 10 से 12 दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन कई बार यह खतरनाक भी हो जाता है। निमोनिया का अटैक बच्चों पर ज्यादा होता है। अगर बच्चे का सर्दी-जुकाम ठीक नहीं हो रहा है तो बिना समय गंवाए चिकित्सक को दिखाएं। छाती का एक्सरे करवाएं, ताकि निमोनिया होने या न होने का पता चल सके।
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