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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस- जिंदगी का मकड़जाल बना युवाओं के लिए ‘फंदा’
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बरेली। तनाव, अवसाद और सहनशीलता का अभाव जिंदगी की डोर कमजोर कर रहे हैं। भौतिकतावादी, सपनों को पूरा करने और ज्यादा पाने की चाहत के बीच टूट रहे रिश्तों से युवाओं के दिल कमजोर पड़ रहे और यह सब इस हद तक उनको झकझोर देते हैं कि वह खुद को खत्म करने जैसा आत्मघाती कदम तक उठा लेता है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति आत्महत्या कर रहा है और हैरान करने वाली बात यह है कि इसमें सबसे ज्यादा अनुपात 15-29 साल के युवाओं का है। कम आय वाले देशों में इसका अनुपात सबसे ज्यादा है। यहां 79 फीसदी मामले सामने आए हैं जिसमें भारत भी शामिल है। दस अक्तूबर को मनाए जाने वाले विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर इस बार डब्ल्यूएचओ ने आत्महत्या का ही मुद्दा उठाया है। स्वास्थ्य विभाग अब लोगों को जागरूक करेगा ताकि आत्महत्या के अनुपात को कम किया जा सके। गुरुवार को जिला अस्पताल में भारत के आंकड़ों को लेकर एक रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी है।
टूट रहे रिश्ते, सपनों का पूरा न होना तोड़ देता है युवाओं को
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. आशीष के अनुसार भारत में आत्महत्या का अनुपात काफी ज्यादा है। रिश्ते टूटना, परिवार का टूटना, कामयाबी न मिलना और सपनों का पूरा न होने से व्यक्ति तनाव और अवसाद का शिकार होता है जो आत्महत्या का कारण बनता है। इसमें परीक्षा में दबाव और पढ़ाई का दबाव भी शामिल है। उनका कहना है कि पढ़ाई के बाद परिवार की जिम्मेदारी आती है जिसका दबाव युवा झेलने में फेल हो जाते हैं। अवसाद अनुवांशिक भी होता है, आत्महत्या का एक यह भी कारण बनता है।
टीवी और इंटरनेट की दुनिया बदल रही सोच
मनोवैज्ञानिक डॉ. सुविधा शर्मा के अनुसार आजकल युवा वर्ग खुद को टीवी में या फिल्मों में दिखाए किरदार को खुद में महसूस करता है। कबीर सिंह फिल्म इसका बड़ा उदाहरण है। नैतिक मूल्यों का पतन हो रहा है। विवाहेतर संबंध का चलन काफी बढ़ा है जो वाद में अवसाद का कारण बनता है। प्रेम में असफल होने पर भी युवा आत्महत्या जैसा कदम उठाते हैं। यही कारण है कि आत्महत्या करने में युवाओं की संख्या ज्यादा है।
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डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के अनुसार
- विश्व में हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति आत्महत्या करता है।
- आत्महत्या करने वालों में सबसे ज्यादा अनुपात 15-29 साल के लोगों का है।
- कम आय वाले देशों में आत्महत्या का अनुपात 79 फीसदी है। भारत भी इसी में शामिल है।
- आत्महत्या के लिए सबसे ज्यादा जहरीला पदार्थ, फंदे पर लटकना, आग का इस्तेमाल करते हैं।
केस-एक: पिछले दिनों सुभाषनगर में एक 17 साल की लकड़ी ने फंदा लगाकर जान दे दी। कहा जा रहा था कि प्रेम प्रसंग में लड़की ने आत्मघाती कदम उठाया।
केस-दो : एक सिपाही के बीस साल के बेटे ने पिछले दिनों आत्महत्या कर ली। चर्चा थी कि पढ़ाई का प्रेशर था हालांकि कुछ लोगों का कहना था कि प्रेम प्रसंग में उसने यह कदम उठाया।
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टूट रहे रिश्ते, सपनों का पूरा न होना तोड़ देता है युवाओं को
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. आशीष के अनुसार भारत में आत्महत्या का अनुपात काफी ज्यादा है। रिश्ते टूटना, परिवार का टूटना, कामयाबी न मिलना और सपनों का पूरा न होने से व्यक्ति तनाव और अवसाद का शिकार होता है जो आत्महत्या का कारण बनता है। इसमें परीक्षा में दबाव और पढ़ाई का दबाव भी शामिल है। उनका कहना है कि पढ़ाई के बाद परिवार की जिम्मेदारी आती है जिसका दबाव युवा झेलने में फेल हो जाते हैं। अवसाद अनुवांशिक भी होता है, आत्महत्या का एक यह भी कारण बनता है।
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टीवी और इंटरनेट की दुनिया बदल रही सोच
मनोवैज्ञानिक डॉ. सुविधा शर्मा के अनुसार आजकल युवा वर्ग खुद को टीवी में या फिल्मों में दिखाए किरदार को खुद में महसूस करता है। कबीर सिंह फिल्म इसका बड़ा उदाहरण है। नैतिक मूल्यों का पतन हो रहा है। विवाहेतर संबंध का चलन काफी बढ़ा है जो वाद में अवसाद का कारण बनता है। प्रेम में असफल होने पर भी युवा आत्महत्या जैसा कदम उठाते हैं। यही कारण है कि आत्महत्या करने में युवाओं की संख्या ज्यादा है।
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डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के अनुसार
- विश्व में हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति आत्महत्या करता है।
- आत्महत्या करने वालों में सबसे ज्यादा अनुपात 15-29 साल के लोगों का है।
- कम आय वाले देशों में आत्महत्या का अनुपात 79 फीसदी है। भारत भी इसी में शामिल है।
- आत्महत्या के लिए सबसे ज्यादा जहरीला पदार्थ, फंदे पर लटकना, आग का इस्तेमाल करते हैं।
केस-एक: पिछले दिनों सुभाषनगर में एक 17 साल की लकड़ी ने फंदा लगाकर जान दे दी। कहा जा रहा था कि प्रेम प्रसंग में लड़की ने आत्मघाती कदम उठाया।
केस-दो : एक सिपाही के बीस साल के बेटे ने पिछले दिनों आत्महत्या कर ली। चर्चा थी कि पढ़ाई का प्रेशर था हालांकि कुछ लोगों का कहना था कि प्रेम प्रसंग में उसने यह कदम उठाया।