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Bareilly News: बदायूं में पनपा, बरेली के गांव-गांव तक फैला हवाला का धंधा
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बरेली। इज्जतनगर थाना क्षेत्र में हवाला धंधेबाज अफजाल उर्फ राजा की गिरफ्तारी कोई पहला मामला नहीं है। शहर से सटे कई गांवों में धंधे की जड़ें फैली हैं। कुछ साल पहले तक बदायूं जिले का दबतोरी इलाका इस धंधे के लिए बदनाम था। बाद में धंतिया में धंधा पनपा और अब शहर से सटे कई गांवों के युवा जल्दी रईस होने के चक्कर में हवाला से जुड़ चुके हैं।
धंतिया के साइबर ठगों के तार नाइजीरियन गिरोह और बड़े हवाला कारोबारियों से जुड़े हैं। पुलिस अक्सर इन धंधेबाजों पर कार्रवाई करती है, लेकिन जेल से छूटकर वे फिर ठगी में लग जाते हैं। धंतिया के बदनाम होने के बाद साइबर ठगों ने ठिकाना बदल लिया है। अब इन ठगों की जड़ें शहर से सटे ग्रामीण इलाके में फैल चुकी हैं। इज्जतनगर के रहपुरा और परतापुर के युवक पहले भी टेरर फंडिंग के आरोप में पकड़े जा चुके हैं। पहले भी दूसरे राज्यों की पुलिस धंतिया और इज्जतनगर क्षेत्र से साइबर ठगों की गिरफ्तारी कर चुकी है।
अफजाल के पास मिले बैंक खातों व डेबिट कार्डों की जांच इज्जतनगर पुलिस कर रही है। इंस्पेक्टर जयशंकर सिंह ने बताया कि अफजाल ने किस-किस से लेन-देन किया, संबंधित बैंक शाखाओं से पुलिस इसकी तस्दीक करेगी। इसके आधार पर आगे अन्य आरोपियों की धरपकड़ का रास्ता तैयार होगा। पुलिस को संदेह है कि आसपास के गांवों में अफजाल के कई गुर्गे हो सकते हैं। साक्ष्य मिले तो उनकी भी गिरफ्तारी की जाएगी।
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बदायूं जिले में बिसौली कोतवाली की दबतोरी चौकी का इलाका हवाला कारोबार की जड़ है। यहां संग्रामपुर, दबतोरी, लक्ष्मीपुर गांवों में उन लोगों की आलीशान कोठियां हैं जो कुछ साल पहले तक मजदूरी कर रहे थे। दबतोरा गांव का नफीस अरबपति होकर बरेली में बस गया है। संग्रामपुर के गुलफाम, ताहिर, शारिक, अकबर व तौहीद करोड़पति बन चुके हैं। इनके खिलाफ एक वक्त में कई मुकदमे हुए थे। अब इनमें से अधिकतर ठग मुंबई में सेट हो चुके हैं।
साइबर ठगों ने शहर से सटे ग्रामीण इलाकों को अपना ठिकाना बना रखा है। दरअसल, इन इलाकों में सीधे-सादे लोग खाता खुलवाने के लिए अपने कागज इन ठगों के हाथ में आसानी से देते हैं। ठग उनके खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी और हवाला कारोबार के लिए करते हैं।
आनलाइन धोखाधड़ी कर इन खातों में रुपये डाले जाते हैं। इनसे रुपये निकालकर खाताधारकों को मामूली कमीशन दिया जाता है। साइबर ठग इन खातों को हवाला कारोबारियों के लिए भी उपलब्ध कराते हैं। हवाला कारोबारी इन खातों में काली कमाई डालकर सफेद करते हैं। इसके बदले में साइबर ठगों को मोटा कमीशन मिलता है। इन खातों का धन टेरर फंडिंग में इस्तेमाल करने की आशंका बनी रहती है।
साइबर ठग बैंक कर्मचारियों से सांठगांठ कर बड़े पैमाने पर खाते खुलवा लेते हैं। ठग कई बार आधार कार्ड और पैनकार्ड में फर्जीवाड़ा कर खाते खुलवाते है। एक ही बैंक में एक व्यक्ति के कई खाते खोले जाते हैं। सामान्य ग्राहकों को एक से दूसरे काउंटर पर भेजने वाले बैंक कर्मचारी ऐसे ठगों के मामले में नियमों को ताक पर रख देते हैं। इन खातों में लाखों का लेनदेन होता है।
इज्जतनगर पुलिस ने हवाला धंधेबाज को गिरफ्तार किया है। उससे पूछताछ के आधार पर जांच करके पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई की जाएगी। बरेली के अलावा दूसरे जिलों में हवाला धंधेबाजों की सक्रियता मिली तो वहां भी कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. राकेश सिंह, आईजी रेंज
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धंतिया के साइबर ठगों के तार नाइजीरियन गिरोह और बड़े हवाला कारोबारियों से जुड़े हैं। पुलिस अक्सर इन धंधेबाजों पर कार्रवाई करती है, लेकिन जेल से छूटकर वे फिर ठगी में लग जाते हैं। धंतिया के बदनाम होने के बाद साइबर ठगों ने ठिकाना बदल लिया है। अब इन ठगों की जड़ें शहर से सटे ग्रामीण इलाके में फैल चुकी हैं। इज्जतनगर के रहपुरा और परतापुर के युवक पहले भी टेरर फंडिंग के आरोप में पकड़े जा चुके हैं। पहले भी दूसरे राज्यों की पुलिस धंतिया और इज्जतनगर क्षेत्र से साइबर ठगों की गिरफ्तारी कर चुकी है।
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अफजाल के पास मिले बैंक खातों व डेबिट कार्डों की जांच इज्जतनगर पुलिस कर रही है। इंस्पेक्टर जयशंकर सिंह ने बताया कि अफजाल ने किस-किस से लेन-देन किया, संबंधित बैंक शाखाओं से पुलिस इसकी तस्दीक करेगी। इसके आधार पर आगे अन्य आरोपियों की धरपकड़ का रास्ता तैयार होगा। पुलिस को संदेह है कि आसपास के गांवों में अफजाल के कई गुर्गे हो सकते हैं। साक्ष्य मिले तो उनकी भी गिरफ्तारी की जाएगी।
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बदायूं जिले में बिसौली कोतवाली की दबतोरी चौकी का इलाका हवाला कारोबार की जड़ है। यहां संग्रामपुर, दबतोरी, लक्ष्मीपुर गांवों में उन लोगों की आलीशान कोठियां हैं जो कुछ साल पहले तक मजदूरी कर रहे थे। दबतोरा गांव का नफीस अरबपति होकर बरेली में बस गया है। संग्रामपुर के गुलफाम, ताहिर, शारिक, अकबर व तौहीद करोड़पति बन चुके हैं। इनके खिलाफ एक वक्त में कई मुकदमे हुए थे। अब इनमें से अधिकतर ठग मुंबई में सेट हो चुके हैं।
साइबर ठगों ने शहर से सटे ग्रामीण इलाकों को अपना ठिकाना बना रखा है। दरअसल, इन इलाकों में सीधे-सादे लोग खाता खुलवाने के लिए अपने कागज इन ठगों के हाथ में आसानी से देते हैं। ठग उनके खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी और हवाला कारोबार के लिए करते हैं।
आनलाइन धोखाधड़ी कर इन खातों में रुपये डाले जाते हैं। इनसे रुपये निकालकर खाताधारकों को मामूली कमीशन दिया जाता है। साइबर ठग इन खातों को हवाला कारोबारियों के लिए भी उपलब्ध कराते हैं। हवाला कारोबारी इन खातों में काली कमाई डालकर सफेद करते हैं। इसके बदले में साइबर ठगों को मोटा कमीशन मिलता है। इन खातों का धन टेरर फंडिंग में इस्तेमाल करने की आशंका बनी रहती है।
साइबर ठग बैंक कर्मचारियों से सांठगांठ कर बड़े पैमाने पर खाते खुलवा लेते हैं। ठग कई बार आधार कार्ड और पैनकार्ड में फर्जीवाड़ा कर खाते खुलवाते है। एक ही बैंक में एक व्यक्ति के कई खाते खोले जाते हैं। सामान्य ग्राहकों को एक से दूसरे काउंटर पर भेजने वाले बैंक कर्मचारी ऐसे ठगों के मामले में नियमों को ताक पर रख देते हैं। इन खातों में लाखों का लेनदेन होता है।
इज्जतनगर पुलिस ने हवाला धंधेबाज को गिरफ्तार किया है। उससे पूछताछ के आधार पर जांच करके पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई की जाएगी। बरेली के अलावा दूसरे जिलों में हवाला धंधेबाजों की सक्रियता मिली तो वहां भी कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. राकेश सिंह, आईजी रेंज