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Bareilly News: शिकंजे में ज्ञानेश, आईसीएल के ठगों को पकड़ती ही नहीं पुलिस

Fri, 12 Jul 2024 06:51 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jul 2024 06:51 AM IST
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Gyanesh in the grip, police do not catch ICL thugs
बरेली। शहर में जेकेवी कंपनी का दफ्तर खोलकर प्रयागराज के ज्ञानेश पाठक और उसके साथियों ने सैकड़ों लोगों के करोड़ों रुपये हड़प लिए। एसटीएफ ने ज्ञानेश को गिरफ्तार कर लिया है। इसी तरह गोला बंधुओं ने भी आइसीएल कंपनी खोलकर सैकड़ों शहरवासियों को निवेश का झांसा दिया और करोड़ों रुपये ठग लिए। गोला बंधुओं पर 12 मुकदमों में चार्जशीट लगाई गई है पर कार्रवाई के नाम पर प्रेमनगर पुलिस आज तक गिरफ्तारी तक नहीं कर सकी है।
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आईसीएल के लोगों ने भी शहर के लोगों से निवेश करवाया था। रुपये लौटाने का समय आया तो वे टालमटोल करने लगे। नाराज निवेशकों ने आईसीएल के मालिक आरके गोला और उसके साथी जितेंद्र को पकड़कर प्रेमनगर पुलिस के हवाले कर दिया था। पुलिस ने दोनों को जेल भेज दिया। इसके बाद ठगी के शिकार हुए सैकड़ों लोग सामने आए। इनमें से कई लोगों ने आईसीएल के मालिकों व अधिकारियों के खिलाफ प्रेमनगर थाने में मुकदमे दर्ज कराए, लेकिन पुलिस राजनीतिक दबाव में कार्रवाई से बचती रही।
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पुलिस की फजीहत होने पर पिछले साल आईजी ने फटकार लगाई तो एसपी सिटी ने टीम गठित कर दी थी। तब कंपनी के कर्मचारी दिनेश को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इसके बाद भी पुलिस ठगी के मुख्य आरोपी आरके गोला के छोटे भाई एके गोला को आज तक गिरफ्तार नहीं कर सकी। बताया जा रहा है एके गोला ही धोखाधड़ी के सभी मुकदमों की पैरवी कर रहा है। गोला बंधुओं ने ठगी के रुपये राजनीतिक लोगों पर खर्च किए थे। इसलिए उसे सफेदपोशों की सरपरस्ती हासिल है। पुलिस उस पर हाथ डालने से कतरा रही है।
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तीन लोगों पर ही लगाई चार्जशीट, बाकी को भूल गए
प्रेमनगर थाने में दर्ज अधिकतर मुकदमों में आरके गोला, उसके भाई एके गोला और साथी जितेंद्र गुप्ता को नामजद कराया गया है। इनकी विवेचना इंस्पेक्टर आशुतोष रघुवंशी कर रहे हैं। गिरफ्तार तीनों लोगों के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमों में उन्होंने चार्जशीट लगाने का दावा किया है। फरार आरोपियों को पुलिस भूल चुकी है। कहने के लिए पार्ट बी में विवेचना जारी है।
गैंगस्टर लगाने का दावा भी हुआ फुस्स
करोड़ों रुपये की ठगी का पता लगने के बाद अधिकारियों ने ठगों पर गैंगस्टर लगाकर उनकी संपत्ति जब्त करने का दावा किया था। बाद में पुलिस ने कार्रवाई धीमी कर दी। गैंगस्टर लगाना तो दूर, अन्य आरोपियों की तलाश तक नहीं कर पाई।
इनाम घोषित होता तो सलाखों के पीछे होते आरोपी
किला और कोतवाली में ज्ञानेश पाठक के खिलाफ दस मुकदमे दर्ज थे, पर पुुलिस ने आज तक उसकी गिरफ्तारी का प्रयास नहीं किया। एसएसपी ने उस पर 25 हजार का इनाम घोषित किया तो एसटीएफ ने उसे दबोच लिया। ठगी का शिकार हुए लोगों में चर्चा है कि यदि इनाम घोषित होता तो एके गोला सहित अन्य आरोपी भी सलाखों के पीछे होते।
ज्ञानेश ने उगले गुर्गों के राज
ज्ञानेश पाठक को लेकर एसटीएफ महाराष्ट्र से बरेली के लिए निकल पड़ी है। एसटीएफ के एसएसपी घुले सुशील चंद्रभान के मुताबिक महाराष्ट्र के कोर्ट से तीन दिन का रिमांड मिला है। बृहस्पतिवार रात या शुक्रवार सुबह तक ज्ञानेश को बरेली लाया जा सकता है। ज्ञानेश के मोबाइल फोन से उसके कई गुर्गों के बारे में जानकारी मिली है। जल्दी ही उसके गुर्गे भी सलाखों के पीछे होंगे। ब्यूरो

पूरी मंडली जाएगी जेल
आरके गोला, एके गोला समेत सभी आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटा लिए हैं। उच्चाधिकारियों ने भी इस कार्रवाई की समीक्षा कर नाराजगी जताई है। जल्दी ही इनाम घोषित होगा। बाकी आरोपी भी जेल जाएंगे। - राहुल भाटी, एसपी सिटी
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