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बरेलीः बाजार की गुझिया-नमकीन सबको बांटी पर खुद को घर की बनी ही भायी
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बरेली के मॉडल टाउन में होलिका दहन करते लोग।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
बाजार में मिलावटी खाद्य पदार्थों से लोगों ने बनाई दूरी
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बरेली। इस बार होली पर ज्यादातर लोगों ने मिलावटी खाद्य पदार्थों से दूरी बनाने की कोशिश की। इसका असर बाजार और घरों में दिखा। लोगाें ने उपहार में बाजार की मिठाई-गुझिया का आदान-प्रदान तो किया लेकिन खुद खाने से परहेज किया। घरोें में पहुंचे आगंतुकों ने भी बाजार की खाद्य वस्तुएं छूना ठीक नहीं समझा, उन्होंने सिर्फ घर के बने आइटम ही खाने पसंद किए।
खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की मिलीभगत से मिलावटखोर बाजार में छाए रहे। यही वजह रही कि पशुआहार के नाम पर रिजेक्टेड नमकीन कारोबारियों ने मिक्चर और नवरत्न ब्रांड बनाकर बाजार में उतार दी। नमकीन निर्माताओं ने करोड़ों रुपये के उत्पाद बाजार में खपा दिए। अमर उजाला ने इसे प्रमुखता से छापा तो हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया। इसके बाद औपचारिक छापे मारे गए। यही स्थिति मिठाई, मावा आदि में मिलावट की रही। अमर उजाला ने मिलावट को लगातार उजागर किया तो लोगों में कुछ जागरूकता आई। होली पर लोगों ने बाजार से गुझिया-नमकीन आदि खरीदकर उपहार में तो दी, लेकिन खुद इस्तेमाल करने से बचते रहे।
सोमवार सुबह से शाम तक होली की शुभकामनाएं और उपहार देने का सिलसिला शुरू हो गया था। मंडल और जिला स्तरीय अफसरों के घरों पर उपहार लेकर पहुंचे लोगों ने बाजार से खरीदकर खाद्य पदार्थ दिए लेकिन खुद नहीं खाए। उपहार लेने वालों ने जब कहा कि यह सब घर में बना है। तभी लोगों ने गुझिया, नमकीन और अन्य आइटम खाना पसंद किए। मिलावट से बचने के लिए तमाम लोगों ने फल और ड्राईफ्रूट्स का इस्तेमाल किया।
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बाजार में बढ़ती मिलावटखोरी को देखते हुए हम तो घर पर ही पकवान बनवाते हैं। त्योहारों पर मिलावटखोर ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं, इसलिए बाजार की वस्तुओं पर यकीन करना मुश्किल है। - अनिल साहनी, प्रगतिशील कृषक
मुनाफे के लिए किसी के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करना अपराध है। इस बार मिलावट का ज्यादा माहौल था, इसलिए हमने घर पर ही आइटम बनवाए और दूसरों को खिलाए भी। - राजू खंडेलवाल, उद्यमी
लगातार मिलावटीखोरी बढ़ रही है। इस पर प्रभावी अंकुश लगाना जरूरी है। बाजार में मिलावटी खाद्य वस्तुओं का बोलबाला होने से हमने घर में पकवान बनवाए, लेकिन उपहार में बाजार के आइटम देने पड़े। - दुर्गेश खटवानी, दवा कारोबारी
विदेशों में मिलावटखोरी का कोई शोर नहीं होता है। पैक्ड और ब्रांडेड खाद्य वस्तुएं हमारे देश में भी हैं लेकिन कई कंपनियां मानक पूरे नहीं कर रही हैं। होली पर मिलावट से बचने के लिए नमकीन, गुझिया घर पर बनर्वाइं। - डॉ. विकास वर्मा, होम्योपैथिक चिकित्सक
व्यापार में उपभोक्ता सर्वोपरि है। पशुआहार के नाम पर रिजेक्ट नमकीन नए पैक में बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इस बार हमने बाजार से खान-पान की वस्तुएं नहीं खरीदीं। - विनय कुमार, व्यापारी
खानपान में मिलावट करना अपराध है। शुद्ध और गुणवत्ता वाले आइटम ही बाजार में होने चाहिए। मिलावट की लगातार छपी खबरें देखकर परिवारवालों ने घर में ही पकवान बनाए। - नरेंद्र गुप्ता, व्यापारी
खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की मिलीभगत से मिलावटखोर बाजार में छाए रहे। यही वजह रही कि पशुआहार के नाम पर रिजेक्टेड नमकीन कारोबारियों ने मिक्चर और नवरत्न ब्रांड बनाकर बाजार में उतार दी। नमकीन निर्माताओं ने करोड़ों रुपये के उत्पाद बाजार में खपा दिए। अमर उजाला ने इसे प्रमुखता से छापा तो हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया। इसके बाद औपचारिक छापे मारे गए। यही स्थिति मिठाई, मावा आदि में मिलावट की रही। अमर उजाला ने मिलावट को लगातार उजागर किया तो लोगों में कुछ जागरूकता आई। होली पर लोगों ने बाजार से गुझिया-नमकीन आदि खरीदकर उपहार में तो दी, लेकिन खुद इस्तेमाल करने से बचते रहे।
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सोमवार सुबह से शाम तक होली की शुभकामनाएं और उपहार देने का सिलसिला शुरू हो गया था। मंडल और जिला स्तरीय अफसरों के घरों पर उपहार लेकर पहुंचे लोगों ने बाजार से खरीदकर खाद्य पदार्थ दिए लेकिन खुद नहीं खाए। उपहार लेने वालों ने जब कहा कि यह सब घर में बना है। तभी लोगों ने गुझिया, नमकीन और अन्य आइटम खाना पसंद किए। मिलावट से बचने के लिए तमाम लोगों ने फल और ड्राईफ्रूट्स का इस्तेमाल किया।
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बाजार में बढ़ती मिलावटखोरी को देखते हुए हम तो घर पर ही पकवान बनवाते हैं। त्योहारों पर मिलावटखोर ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं, इसलिए बाजार की वस्तुओं पर यकीन करना मुश्किल है। - अनिल साहनी, प्रगतिशील कृषक
मुनाफे के लिए किसी के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करना अपराध है। इस बार मिलावट का ज्यादा माहौल था, इसलिए हमने घर पर ही आइटम बनवाए और दूसरों को खिलाए भी। - राजू खंडेलवाल, उद्यमी
लगातार मिलावटीखोरी बढ़ रही है। इस पर प्रभावी अंकुश लगाना जरूरी है। बाजार में मिलावटी खाद्य वस्तुओं का बोलबाला होने से हमने घर में पकवान बनवाए, लेकिन उपहार में बाजार के आइटम देने पड़े। - दुर्गेश खटवानी, दवा कारोबारी
विदेशों में मिलावटखोरी का कोई शोर नहीं होता है। पैक्ड और ब्रांडेड खाद्य वस्तुएं हमारे देश में भी हैं लेकिन कई कंपनियां मानक पूरे नहीं कर रही हैं। होली पर मिलावट से बचने के लिए नमकीन, गुझिया घर पर बनर्वाइं। - डॉ. विकास वर्मा, होम्योपैथिक चिकित्सक
व्यापार में उपभोक्ता सर्वोपरि है। पशुआहार के नाम पर रिजेक्ट नमकीन नए पैक में बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इस बार हमने बाजार से खान-पान की वस्तुएं नहीं खरीदीं। - विनय कुमार, व्यापारी
खानपान में मिलावट करना अपराध है। शुद्ध और गुणवत्ता वाले आइटम ही बाजार में होने चाहिए। मिलावट की लगातार छपी खबरें देखकर परिवारवालों ने घर में ही पकवान बनाए। - नरेंद्र गुप्ता, व्यापारी