UP News: भूमि अधिग्रहण घोटाले में बड़ी कार्रवाई, पीडब्ल्यूडी की सहायक अभियंता समेत पांच निलंबित
भूमि अधिग्रहण घोटाले के आरोपियों पर कार्रवाई का शिकंजा कसना शुरू हो गया। डीएम बरेली की ओर से भेजी गई जांच रिपोर्ट के बाद शासन के निर्देश पर पीडब्ल्यूडी की सहायक अभियंता समेत पांच को निलंबित कर दिया गया है।
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बरेली-सितारगंज हाईवे चौड़ीकरण के लिए जमीन अधिग्रहण में हुए घोटाले में पीडब्ल्यूडी की सहायक अभियंता स्नेहलता श्रीवास्तव, तीन जेई और एक अमीन को निलंबित कर दिया गया है। संपत्तियों के गलत सत्यापन और अनियमितता के आरोप में यह कार्रवाई गई है। स्नेहलता को पीडब्ल्यूडी विभागाध्यक्ष के कार्यालय से संबद्ध कर दिया है।
प्रदेश सरकार ने हाल ही में राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए जमीन अधिग्रहण में 80 करोड़ से ज्यादा के इस घोटाले की जांच स्टेट एसआईटी को दी है। हाईवे चौड़ीकरण और बरेली के रिंग रोड के लिए जमीन अधिग्रहण में एनएचएआई और राजस्व विभाग के अफसरों की मिलीभगत से यह घोटाला हुआ था। शासन ने इस मामले में अवर अभियंता राकेश कुमार, अंकित सक्सेना, सुरेंद्र सिंह और अमीन शिव शंकर को भी निलंबित करने के निर्देश दे दिए हैं।
सीडीओ की रिपोर्ट बनी कार्रवाई का आधार
बरेली के मुख्य विकास अधिकारी जगप्रवेश ने दस दिनों तक जांच के बाद 227 पेज की रिपोर्ट डीएम को 10 सितंबर को सौंपी थी। डीएम ने रिपोर्ट शासन को भेजी थी। इसमें परिसंपत्तियों के अधिक मूल्यांकन के लिए एनएचएआई के साइट इंजीनियर, नामित एजेंसी साईं सिस्ट्रा ग्रुप, एसए इंफ्रास्ट्रक्चर कंसल्टेंसी के प्रतिनिधियों को दोषी ठहराया गया है। साथ ही, गलत सत्यापन के लिए पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन अधिशासी अभियंता नारायण सिंह समेत चारों अभियंता और अमीन पर कार्रवाई की सिफारिश की गई थी।
पीलीभीत में भी लेखपालों-अभियंताओं को सता रहा कार्रवाई का डर
शासन की कार्रवाई के बाद पीलीभीत से भी तत्कालीन अधिकारियों के नाम मांगे गए हैं। इस वजह से यहां भी लेखपालों और अभियंताओं को कार्रवाई का डर सताने लगा है। इधर, मंडलायुक्त ने भी मामले में पीलीभीत में तैनात तत्कालीन कर्मचारियों और अधिकारियों के नाम मांगे हैं। यह जानकारी शासन को भेजी जाएगी। माना जा रहा है कि यहां भी जल्द कार्रवाई होगी।