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‘गांधी जी ने भी अहिंसा का सबक इमाम हुसैन से ही लिया’
बरेली।
Updated Tue, 03 Oct 2017 01:28 AM IST
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राना सपऊफवी
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शहर के मोहल्ला गढ़ी इलाके के आगा इमामबाड़ा में नवाब विजारत खां के खानदान की बहू राना सफवी अपने पति इंजीनियर गजनफर अब्बास सफवी के साथ सोमवार को परंपरा निभाने आईं। राना लेखक हैं और दिल्ली में रहती हैं। उन्होंने धर्म पर कई किताबें लिखी हैं। उन्होंने आगा इमामबाड़ा में महिलाओं की मजलिसें कराईं। कहा, अहिंसा का सबक महात्मा गांधी जी ने भी हजरत इमाम हुसैन से लिया था।
मजिलसों के बाद गढै़या में अमर उजाला से बातचीत में उन्होेंने कहा कि इस्लाम और मुसलमानों में बहुत फर्क है। इस्लाम किसी को गलत काम करने का सबक नहीं देता है। देश में आतंक फैलाने वालेे आतंकी संगठन मुसलमानों को बदनाम करने का काम कर रहे हैं। उन्हें मुसलमानों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। हजरत इमाम हुसैन यजीद के लाखों सैनिकों के सामने भी नहीं झुके। उन्होंने अपने जानशीनों के साथ करबला में इस्लाम को जिंदा रखने के लिए कुर्बानी दी।
इमाम हुसैन के शहीद होने के बाद उनकी बहन जनाबे जैनब और बीमारी की हालत में जैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम बचे थे। यजीद ने इमाम हुसैन के शहीद होने के बाद यह प्रचारित किया था कि उसने बागियों को मारा है, लेकिन जनाबे जैनब ने इसका विरोध करके सही बात मुसलमानों तक पहुंचाई। उन्होंने बताया कि सच्चाई के लिए किसी के आगे नहीं झुकना चाहिए। हक के लिए हमेशा लड़ते रहें। इसीलिए इमाम हुसैन को सारी दुनिया के मुसलमान याद कर रहे हैं। यजीद का कोई नाम लेने वाला तक दुनिया में नहीं बचा है।
मजिलसों के बाद गढै़या में अमर उजाला से बातचीत में उन्होेंने कहा कि इस्लाम और मुसलमानों में बहुत फर्क है। इस्लाम किसी को गलत काम करने का सबक नहीं देता है। देश में आतंक फैलाने वालेे आतंकी संगठन मुसलमानों को बदनाम करने का काम कर रहे हैं। उन्हें मुसलमानों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। हजरत इमाम हुसैन यजीद के लाखों सैनिकों के सामने भी नहीं झुके। उन्होंने अपने जानशीनों के साथ करबला में इस्लाम को जिंदा रखने के लिए कुर्बानी दी।
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इमाम हुसैन के शहीद होने के बाद उनकी बहन जनाबे जैनब और बीमारी की हालत में जैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम बचे थे। यजीद ने इमाम हुसैन के शहीद होने के बाद यह प्रचारित किया था कि उसने बागियों को मारा है, लेकिन जनाबे जैनब ने इसका विरोध करके सही बात मुसलमानों तक पहुंचाई। उन्होंने बताया कि सच्चाई के लिए किसी के आगे नहीं झुकना चाहिए। हक के लिए हमेशा लड़ते रहें। इसीलिए इमाम हुसैन को सारी दुनिया के मुसलमान याद कर रहे हैं। यजीद का कोई नाम लेने वाला तक दुनिया में नहीं बचा है।
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