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Bareilly News: पार्सल बुकिंग में किया जा रहा था खेल, यूपी के स्थान पर दूसरे राज्यों की बसों से भेजते थे सामान
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बरेली। ठेकेदार के भाई की हत्या के बाद सेटेलाइट और पुराने बस अड्डे पर पार्सल बुकिंग बंद हो गई है। लगेज और पार्सल बुकिंग का काम निजी फर्म को दिए जाने के बावजूद यहां कुली खेल कर रहे थे। वे यूपी के बजाय हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड की बसों से पार्सल और लगेज भेजते थे। इससे निजी फर्म को नुकसान हो रहा था। अन्य राज्यों की रोडवेज बसों को यूपी में चेक नहीं किया जाता। कुली इसी का फायदा उठा रहे थे।
सेटेलाइट और पुराने बस अड्डे पर रोज उत्तराखंड परिवहन निगम की 150 से ज्यादा बसों का आना-जाना होता है। हरियाणा और राजस्थान की भी 50 बसें आती-जाती हैं। दोनों बस अड्डों पर पार्सल बुकिंग शेड बने हुए हैं। जैसे ही कोई व्यापारी लगेज लेकर बस अड्डे पर नजर आता, पार्सल बुकिंग शेड तक पहुंचने से पहले कुली उसको घेर लेते थे। उसका लगेज संबंधित रूट पर किसी दूसरे राज्य की बस से भेज देते थे। इससे रोडवेज को भी राजस्व का नुकसान हो रहा था। पार्सल बुकिंग का काम संभालने वाली निजी फर्म भी घाटे में जा रही थी। इस कारण कुलियों, फर्म के कर्मचारियों और ठेकेदार के बीच अक्सर झगड़ा होता रहता था। बुधवार को बात बढ़ गई और मामला ठेकेदार के भाई की हत्या तक पहुंच गया।
रोडवेज के अफसर दे रहे थे कुलियों को शह
रोडवेज बसों में लगेज बुकिंग का काम निजी फर्म को दिए जाने के बाद तमाम चालकों-परिचालकों और कुलियां की ऊपरी आमदनी बंद हो गई थी। बुकिंग काउंटर पर आने वाले लगेज और पार्सलों को लेकर अक्सर खींचतान मचती थी। बात करने पर अनुज मिश्रा के परिजनों ने बताया कि फर्म के पास टेंडर आने से पार्सल ढुलाई में चालकों-परिचालकों व कुलियों की भूमिका सीमित हो गई थी। रोडवेज के अफसरों को भी पार्सल और लगेज से होने वाली कमाई बंद हो गई थी। ऐसे में अफसर कुलियाें को शह दे रहे थे। परिवहन निगम के एमडी के स्पष्ट आदेश के बाद भी स्थानीय स्तर पर मनमानी की जा रही थी।
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चार फरवरी को दोनों एआरएम को दिया गया था आदेश
कुलियों और पार्सल बुकिंग करने वाली फर्म के कर्मचारियों में अक्सर विवाद के बीच चार फरवरी को आरएम दीपक चौधरी ने रुहेलखंड डिपो के एआरएम अरुण वाजपेयी व बरेली डिपो के एआरएम संजीव श्रीवास्तव को निर्देशित किया था कि दोनों पक्षों को बैठाकर मामले का निस्तारण करा दिया जाए। आरएम ने दोनों एआरएम को इस संबंध में पत्र भी भेजा था। इसके बाद भी रुहेलखंड डिपो के सेटेलाइट बस अड्डे पर होने वाले विवादों का निस्तारण नहीं किया गया और बुधवार को कुली ने ठेकेदार के भाई की गोली मारकर हत्या कर दी। संवाद
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सेटेलाइट और पुराने बस अड्डे पर रोज उत्तराखंड परिवहन निगम की 150 से ज्यादा बसों का आना-जाना होता है। हरियाणा और राजस्थान की भी 50 बसें आती-जाती हैं। दोनों बस अड्डों पर पार्सल बुकिंग शेड बने हुए हैं। जैसे ही कोई व्यापारी लगेज लेकर बस अड्डे पर नजर आता, पार्सल बुकिंग शेड तक पहुंचने से पहले कुली उसको घेर लेते थे। उसका लगेज संबंधित रूट पर किसी दूसरे राज्य की बस से भेज देते थे। इससे रोडवेज को भी राजस्व का नुकसान हो रहा था। पार्सल बुकिंग का काम संभालने वाली निजी फर्म भी घाटे में जा रही थी। इस कारण कुलियों, फर्म के कर्मचारियों और ठेकेदार के बीच अक्सर झगड़ा होता रहता था। बुधवार को बात बढ़ गई और मामला ठेकेदार के भाई की हत्या तक पहुंच गया।
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रोडवेज के अफसर दे रहे थे कुलियों को शह
रोडवेज बसों में लगेज बुकिंग का काम निजी फर्म को दिए जाने के बाद तमाम चालकों-परिचालकों और कुलियां की ऊपरी आमदनी बंद हो गई थी। बुकिंग काउंटर पर आने वाले लगेज और पार्सलों को लेकर अक्सर खींचतान मचती थी। बात करने पर अनुज मिश्रा के परिजनों ने बताया कि फर्म के पास टेंडर आने से पार्सल ढुलाई में चालकों-परिचालकों व कुलियों की भूमिका सीमित हो गई थी। रोडवेज के अफसरों को भी पार्सल और लगेज से होने वाली कमाई बंद हो गई थी। ऐसे में अफसर कुलियाें को शह दे रहे थे। परिवहन निगम के एमडी के स्पष्ट आदेश के बाद भी स्थानीय स्तर पर मनमानी की जा रही थी।
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चार फरवरी को दोनों एआरएम को दिया गया था आदेश
कुलियों और पार्सल बुकिंग करने वाली फर्म के कर्मचारियों में अक्सर विवाद के बीच चार फरवरी को आरएम दीपक चौधरी ने रुहेलखंड डिपो के एआरएम अरुण वाजपेयी व बरेली डिपो के एआरएम संजीव श्रीवास्तव को निर्देशित किया था कि दोनों पक्षों को बैठाकर मामले का निस्तारण करा दिया जाए। आरएम ने दोनों एआरएम को इस संबंध में पत्र भी भेजा था। इसके बाद भी रुहेलखंड डिपो के सेटेलाइट बस अड्डे पर होने वाले विवादों का निस्तारण नहीं किया गया और बुधवार को कुली ने ठेकेदार के भाई की गोली मारकर हत्या कर दी। संवाद