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अपना नाम ही भूल गया रुहेलखंड विश्वविद्यालय
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Tue, 12 Apr 2016 01:34 AM IST
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महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय अपना नाम ही भूल गया। महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती सोमवार को थी लेकिन, विश्वविद्यालय प्रशासन को इस बात का भी ख्याल नहीं है कि उनका विश्वविद्यालय फुले के ही नाम पर है, जिनका आज जन्मदिवस है। लिहाजा, विश्वविद्यालय में उनके नाम पर एक दिया तक नहीं जलाया गया।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय 1975 में बना। 1997 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने इसका नाम बदलकर महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय कर दिया। तब से यह महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है। भले ही इस विश्वविद्यालय का नाम महात्मा ज्योतिबा फुले के नाम पर हो, लेकिन इसे उनकी जयंती भी याद नहीं रहती। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में ज्योतिबा फुले की जयंती पर कोई कार्यक्रम नहीं होता है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में अगर महात्मा ज्योतिबा फुल को ढूंढेंगे तो वो सिर्फ एक तस्वीर के रूप में कुलपति कार्यालय में मिलेंगे। इसके अलावा विश्वविद्यालय में उनकी पहचान कहीं नहीं दिखती है।
दरअसल, रुहेलखंड विश्वविद्यालय 19 सालों बाद भी अपना बदला नाम स्वीकार नहीं कर पा रहा है। भले ही देशभर में उनके ऊपर तरह-तरह के कार्यक्रम हो रहे हों, लेकिन विश्वविद्यालय को अपने नाम से कोई मतलब नहीं दिख रहा है। यहां तक कि कुलपति और कुलसचिव को भी उनकी जयंती से कोई मतलब नहीं है। उन्हें तो पता ही नहीं है कि ज्योतिबा फुले ही जयंती कब होती है। कुलसचिव डॉ. एसएल मौर्या से जब पूछा कि ज्योतिबा फुले की जयंती पर विश्वविद्यालय में कोई कार्यक्रम किया गया। इस पर उन्होंने कहा, कब है जयंती। बताया, 11 अप्रैल को होती है, आज ही है। यह सुनने के बाद बोले, नैक मूल्यांकन और छुट्टियों की वजह से कोई कार्यक्रम नहीं हो पाया। सच्चाई यह है कि विश्वविद्यालय में ज्योतिबा फुले की जयंती पर कभी कोई कार्यक्रम नहीं होता है।
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय 1975 में बना। 1997 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने इसका नाम बदलकर महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय कर दिया। तब से यह महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है। भले ही इस विश्वविद्यालय का नाम महात्मा ज्योतिबा फुले के नाम पर हो, लेकिन इसे उनकी जयंती भी याद नहीं रहती। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में ज्योतिबा फुले की जयंती पर कोई कार्यक्रम नहीं होता है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में अगर महात्मा ज्योतिबा फुल को ढूंढेंगे तो वो सिर्फ एक तस्वीर के रूप में कुलपति कार्यालय में मिलेंगे। इसके अलावा विश्वविद्यालय में उनकी पहचान कहीं नहीं दिखती है।
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दरअसल, रुहेलखंड विश्वविद्यालय 19 सालों बाद भी अपना बदला नाम स्वीकार नहीं कर पा रहा है। भले ही देशभर में उनके ऊपर तरह-तरह के कार्यक्रम हो रहे हों, लेकिन विश्वविद्यालय को अपने नाम से कोई मतलब नहीं दिख रहा है। यहां तक कि कुलपति और कुलसचिव को भी उनकी जयंती से कोई मतलब नहीं है। उन्हें तो पता ही नहीं है कि ज्योतिबा फुले ही जयंती कब होती है। कुलसचिव डॉ. एसएल मौर्या से जब पूछा कि ज्योतिबा फुले की जयंती पर विश्वविद्यालय में कोई कार्यक्रम किया गया। इस पर उन्होंने कहा, कब है जयंती। बताया, 11 अप्रैल को होती है, आज ही है। यह सुनने के बाद बोले, नैक मूल्यांकन और छुट्टियों की वजह से कोई कार्यक्रम नहीं हो पाया। सच्चाई यह है कि विश्वविद्यालय में ज्योतिबा फुले की जयंती पर कभी कोई कार्यक्रम नहीं होता है।
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