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यूपीएससी में बरेली से पांच अभ्यर्थियों ने हासिल की सफलता
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Sat, 28 Apr 2018 01:21 AM IST
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- फोटो : self
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संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2017 में बरेली के मेधावियों ने कामयाबी का परचम लहराया है। इस साल पांच अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल कर जिले का नाम रौशन किया है। सिविल लाइंस के रहने वाले हिमांशु श्रीवास्तव ने 422वीं रैंक हासिल करते हुए परीक्षा में सफलता हासिल की है। वहीं दिव्यांगता को मात देते हुए फतेहगंज पश्चिमी के छोटे से गांव के रहने वाले सौरभ ने 569 वीं रैंक हासिल की है। इनके अलावा फरीदपुर विधायक प्रोफेसर श्याम बिहारी की बेटी शिल्पा ने 887 वीं रैंक, अनुज भारती ने 932वीं रैंक और आशीष ने 968वीं रैंक हासिल यूपीएससी परीक्षा पास की है।
हिमांशु ने सेल्फ स्टडी के दम पर हासिल की सफलता
सिविल लाइंस के रहने वाले हिमांशु श्रीवास्तव ने आईएएस की परीक्षा 422 रैंक के साथ पास की है। एनआईटी से बीटेक करने के बाद उन्होंने एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी की। उसके बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने की ठानी। 2015 में पहला प्रयास सफल नहीं हुआ। उसके बाद उन्होंने प्रतिदिर 10 से 12 घंटे सेल्फ स्टडी की। इंटरनेट की मदद से तैयारी के लिए सामग्री जुटाई। उनकी मेहनत रंग लाई और इस बार सफलता हासिल की। पिता सतीश चंद्र श्रीवास्तव बदायूं कलक्ट्रेट में हैं। माता सरिता श्रीवास्तव हाउस वाइफ हैं। हिमांशु का कहना है कि देश की शिक्षा व्यवस्था बदहाल है। वह महसूस करते हैं कि प्रशासनिक सेवा के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र का भी भला कर सकते हैं। उनकी सफलता पर परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई।
दिव्यांगता का मात देकर सौरभ ने हासिल की 569 रैंक
हौसला और कुछ पाने का जुनून हो तो कोई भी कमजोरी रोड़ा नहीं बन सकती। यह साबित करके दिखाया है फतेहगंज पश्चिमी सौरभ गंगवार ने। दिव्यांगता को मात देकर उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 569वीं रैंक हासिल की है। सौरभ ने साबित कर दिया कि शारीर की कमजोरी मजबूत इरादों के आगे नहीं टिकती। आईआईटी दिल्ली से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग करने के बाद सौरभ गंगवार ने प्रशासनिक सेवा में जाने की ठानी। सौरभ का कहना है कि सीनियर आईआईटी से ग्रेजुएट होने के बाद सिविल सेवा में चुने गए। वह सिविल सेवा में जाना चाहते हैं। फतेहगंज पश्मिची के गांव मीरापुर के रहने वाले सौरभ गंगवार के पिता जगदीश प्रसाद गंगवार मेडिकल स्टोर चलाते हैं। सौरभ का कहना है कि बतौर साफ्टवेयर इंजीनियर दिल्ली में पार्ट टाइम जॉब के साथ तैयारी की।
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लगातार दूसरी बार आशीष ने पास की सिविल की परीक्षा
बरेली। अगर मेहनत और खुद पर भरोसा हो तो क्या नहीं हासिल किया जा सकता। बरेली के आशीष कुमार इसका जीता जागता उदाहरण हैं। उन्होंने लगातार दूसरी बार संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की। शुक्रवार को जारी परिणाम में उन्होंने 968 रैंक हासिल की है। पिछले साल सिविल की परीक्षा में उन्होंने 974 रैंक हासिल की थी। बरेली की राधाकुंज कॉलोनी के रहने वाले आशीष डीआरडीओ में वैज्ञानिक हैं। 2016 में यूपीएससी के परिणाम में उनको 974वीं रैंक मिली थी। इसके बाद वे इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस ज्वाइन किया। इन दिनों वह बड़ौदा में प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिता रामेश्वर दयाल यूपी पुलिस से रिटायर हैं। वहीं मां चंद्रकली देवी हाऊस वाइफ है। आशीष अपनी सफलता का श्रेय माता पिता को देते हैं। इंटर जलालाबाद से करने के बाद आशीष ने बरेली कॉलेज से बीएससी और एमएससी पढ़ाई पूरी की। अब वह अवकाश लेकर संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी करेंगे।
विधायक श्याम बिहारी की बेटी शिल्पा ने दूसरी बार में हासिल की सफलता
बरेली/फरीदपुर। क्षेत्र के विधायक प्रोफेसर श्याम बिहारी की बेटी शिल्पा ग्वाल ने दूसरी बार में आईएएस की परीक्षा में सफलता हासिल कर ली है। उन्होंने आल इंडिया 887 रैंक के साथ इस मुकाम को हासिल किया है। रिजल्ट घोषित होने के बाद परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। शिल्पा ने बारहवीं तक की शिक्षा सेंट मारिया गौरेटी इंटर कॉलेज से हासिल की। उसके बाद 2015 में बीए. एलएलबी आर्नस नेशनल लॉ यूनिवर्सिट लखनऊ से हासिल की। उसके बाद 2016 में इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट नई दिल्ली से एलएलएम किया। दिसंबर 2015 में यूजीसी नेट भी क्वालीफाई किया। प्रोफेसर श्याम बिहारी एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में प्रोफेसर हैं। उनकी भी इच्छा थी कि बेटी प्रशासनिक सेवा में जाएं। शिल्पा का कहना है पहली बार सिर्फ अनुभव के तौर पर परीक्षा दी। दूसरी बार कड़ी मेहनत की और सफलता हासिल की। वह दिल्ली में रहकर तैयारी कर रही थी।
सातवें प्रयास में अनुज ने हासिल सफलता
कहते हैं कभी असफलता से डरना नहीं चाहिए। संघ लोक सेवा आयोग की यूपीएससी की परीक्षा में 932वीं रैंक हासिल करने के साथ अनुज ने यह साबित भी कर दिया। इज्जत नगर के रहने वाले अनुज ने सातवें प्रयास में इस सफलता को हासिल किया। उनका कहना है आईएएस बनने तक अपनी कोशिश जारी रखेंगे। अनुज कुमार भारती ने 2010 में आईआईटी कानपुर से बीटेक किया। इसके बाद कोल इंडिया में क्लास वन अधिकारी पद पर रहे। आईएएस की तैयारी के लिए उन्होंने क्लासवन की यह नौकरी भी छोड़ दी। सातवें प्रयास में इस सफलता तक पहुंचे। 2011 के बाद यह तीसरा इंटरव्यू था और पिछले साल एक नंबर से चयन से चूक गए थे। असफल होने के बाद भी अनुज के इरादे कमजोर नहीं पड़े। अनुज ने कहा कि लगन के साथ आठ से दस घंटे तैयारी की। कई बार तैयारी छोड़ने का भी मन बना, लेकिन हार नहीं मानी। पिता रामहेत रेलवे में सेक्शन इंजीनियर है। मां पूनम हाउस वाइफ हैं।
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हिमांशु ने सेल्फ स्टडी के दम पर हासिल की सफलता
सिविल लाइंस के रहने वाले हिमांशु श्रीवास्तव ने आईएएस की परीक्षा 422 रैंक के साथ पास की है। एनआईटी से बीटेक करने के बाद उन्होंने एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी की। उसके बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने की ठानी। 2015 में पहला प्रयास सफल नहीं हुआ। उसके बाद उन्होंने प्रतिदिर 10 से 12 घंटे सेल्फ स्टडी की। इंटरनेट की मदद से तैयारी के लिए सामग्री जुटाई। उनकी मेहनत रंग लाई और इस बार सफलता हासिल की। पिता सतीश चंद्र श्रीवास्तव बदायूं कलक्ट्रेट में हैं। माता सरिता श्रीवास्तव हाउस वाइफ हैं। हिमांशु का कहना है कि देश की शिक्षा व्यवस्था बदहाल है। वह महसूस करते हैं कि प्रशासनिक सेवा के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र का भी भला कर सकते हैं। उनकी सफलता पर परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई।
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दिव्यांगता का मात देकर सौरभ ने हासिल की 569 रैंक
हौसला और कुछ पाने का जुनून हो तो कोई भी कमजोरी रोड़ा नहीं बन सकती। यह साबित करके दिखाया है फतेहगंज पश्चिमी सौरभ गंगवार ने। दिव्यांगता को मात देकर उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 569वीं रैंक हासिल की है। सौरभ ने साबित कर दिया कि शारीर की कमजोरी मजबूत इरादों के आगे नहीं टिकती। आईआईटी दिल्ली से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग करने के बाद सौरभ गंगवार ने प्रशासनिक सेवा में जाने की ठानी। सौरभ का कहना है कि सीनियर आईआईटी से ग्रेजुएट होने के बाद सिविल सेवा में चुने गए। वह सिविल सेवा में जाना चाहते हैं। फतेहगंज पश्मिची के गांव मीरापुर के रहने वाले सौरभ गंगवार के पिता जगदीश प्रसाद गंगवार मेडिकल स्टोर चलाते हैं। सौरभ का कहना है कि बतौर साफ्टवेयर इंजीनियर दिल्ली में पार्ट टाइम जॉब के साथ तैयारी की।
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लगातार दूसरी बार आशीष ने पास की सिविल की परीक्षा
बरेली। अगर मेहनत और खुद पर भरोसा हो तो क्या नहीं हासिल किया जा सकता। बरेली के आशीष कुमार इसका जीता जागता उदाहरण हैं। उन्होंने लगातार दूसरी बार संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की। शुक्रवार को जारी परिणाम में उन्होंने 968 रैंक हासिल की है। पिछले साल सिविल की परीक्षा में उन्होंने 974 रैंक हासिल की थी। बरेली की राधाकुंज कॉलोनी के रहने वाले आशीष डीआरडीओ में वैज्ञानिक हैं। 2016 में यूपीएससी के परिणाम में उनको 974वीं रैंक मिली थी। इसके बाद वे इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस ज्वाइन किया। इन दिनों वह बड़ौदा में प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिता रामेश्वर दयाल यूपी पुलिस से रिटायर हैं। वहीं मां चंद्रकली देवी हाऊस वाइफ है। आशीष अपनी सफलता का श्रेय माता पिता को देते हैं। इंटर जलालाबाद से करने के बाद आशीष ने बरेली कॉलेज से बीएससी और एमएससी पढ़ाई पूरी की। अब वह अवकाश लेकर संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी करेंगे।
विधायक श्याम बिहारी की बेटी शिल्पा ने दूसरी बार में हासिल की सफलता
बरेली/फरीदपुर। क्षेत्र के विधायक प्रोफेसर श्याम बिहारी की बेटी शिल्पा ग्वाल ने दूसरी बार में आईएएस की परीक्षा में सफलता हासिल कर ली है। उन्होंने आल इंडिया 887 रैंक के साथ इस मुकाम को हासिल किया है। रिजल्ट घोषित होने के बाद परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। शिल्पा ने बारहवीं तक की शिक्षा सेंट मारिया गौरेटी इंटर कॉलेज से हासिल की। उसके बाद 2015 में बीए. एलएलबी आर्नस नेशनल लॉ यूनिवर्सिट लखनऊ से हासिल की। उसके बाद 2016 में इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट नई दिल्ली से एलएलएम किया। दिसंबर 2015 में यूजीसी नेट भी क्वालीफाई किया। प्रोफेसर श्याम बिहारी एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में प्रोफेसर हैं। उनकी भी इच्छा थी कि बेटी प्रशासनिक सेवा में जाएं। शिल्पा का कहना है पहली बार सिर्फ अनुभव के तौर पर परीक्षा दी। दूसरी बार कड़ी मेहनत की और सफलता हासिल की। वह दिल्ली में रहकर तैयारी कर रही थी।
सातवें प्रयास में अनुज ने हासिल सफलता
कहते हैं कभी असफलता से डरना नहीं चाहिए। संघ लोक सेवा आयोग की यूपीएससी की परीक्षा में 932वीं रैंक हासिल करने के साथ अनुज ने यह साबित भी कर दिया। इज्जत नगर के रहने वाले अनुज ने सातवें प्रयास में इस सफलता को हासिल किया। उनका कहना है आईएएस बनने तक अपनी कोशिश जारी रखेंगे। अनुज कुमार भारती ने 2010 में आईआईटी कानपुर से बीटेक किया। इसके बाद कोल इंडिया में क्लास वन अधिकारी पद पर रहे। आईएएस की तैयारी के लिए उन्होंने क्लासवन की यह नौकरी भी छोड़ दी। सातवें प्रयास में इस सफलता तक पहुंचे। 2011 के बाद यह तीसरा इंटरव्यू था और पिछले साल एक नंबर से चयन से चूक गए थे। असफल होने के बाद भी अनुज के इरादे कमजोर नहीं पड़े। अनुज ने कहा कि लगन के साथ आठ से दस घंटे तैयारी की। कई बार तैयारी छोड़ने का भी मन बना, लेकिन हार नहीं मानी। पिता रामहेत रेलवे में सेक्शन इंजीनियर है। मां पूनम हाउस वाइफ हैं।