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शासन तक पहुंची भ्रष्टाचार की आंच तो तहसीलदार व अर्दली के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
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बरेली। तहसील में रिश्वत को लेकर हुई मारपीट का मामला आखिरकार शासन तक पहुंच ही गया। तहसील में भ्रष्टाचार की पोल न खुले इसके लिए स्थानीय अधिकारियों की तरफ से भरसक प्रयास किए गए लेकिन शासन की गोपनीय जांच में भ्रष्टाचार का मामला उजागर हो गया। इसके बाद रविवार को तहसीलदार शेर बहादुर सिंह और अर्दली अबरार के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करा दी गई।
इज्जतनगर के वीर सावरकर नगर निवासी सेवानिवृत्त बैंक प्रबंधक वीरेंद्र सिंह विष्ट ने पांच मई को कोतवाली में तहरीर दी थी। वीरेंद्र सिंह का कहना है कि आशुतोष सिटी में उनकी 720 वर्ग मीटर जमीन है। इस जमीन पर कुछ भूमाफिया की नजर है। उन्होंने जमीन पर कब्जे का प्रयास किया। उन्होंने तहसीलदार के यहां शिकायत कर अपनी जमीन नपवाने की बात कही। ताकि भूमाफिया जमीन न कब्जा सकें। वीरेंद्र सिंह का आरोप है कि तहसीलदार सदर शेर बहादुर सिंह ने समस्या का निदान करने के बजाय अपने अर्दली अबरार से मिलने की सलाह दी। जब वह अबरार से मिले तो उसने काम करने के एवज में तहसीलदार के नाम पर पांच लाख रुपये मांगे। कहा, तहसीलदार खुद जमीन की नापजोख करवाकर प्लॉट पर कब्जा दिला देंगे। बकौल वीरेंद्र 25 अप्रैल को उसने अर्दली अबरार को 1.80 लाख रुपये दे दिए। इस दौरान उनके साथ मित्र प्रदीप यादव भी था। प्रदीप ने रुपये देते समय अर्दली का वीडियो बना लिया। अर्दली ने कहा कि ईद तक रुक जाओ, इसके बाद काम हो जाएगा। ईद के बाद पांच मई को जब प्रदीप सिंह यादव तहसील पहुंचा और काम के लिए कहा तो यहां तहसीलदार से उसकी कहासुनी हो गई। आरोप है कि तहसीलदार शेर बहादुर सिंह और उनके कर्मचारियों ने तहसील के कमरे में प्रदीप को बंधक बना लिया। इसके बाद उसके खिलाफ ही कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई। प्रदीप को सरकारी कर्मचारियों से मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में जेल भेज दिया गया। घटना वाले दिन ही वीरेंद्र ने कोतवाली में तहरीर दी थी लेकिन तब मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।
सुर्खियों में आने के बाद मामला दूसरे दिन ही शासन तक पहुंच गया। शासन ने इस मामले में डीएम से रिपोर्ट तलब कर ली। इसके बाद शनिवार को तहसीलदार से चार्ज छीन लिया गया। अर्दली को निलंबित कर दिया गया। बताया यह जा रहा है कि शासन ने इस पूरे मामले में फीड बैक लिया, इसमें तहसील में भ्रष्टाचार के मामले में मुहर लग गई। शासन के आदेश पर न सिर्फ अर्दली बल्कि तहसीलदार के खिलाफ भी रविवार देर रात कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। इंस्पेक्टर कोतवाली हिमांशु निगम ने बताया कि तहसीलदार और अर्दली के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम, मारपीट, बंधक बनाने आदि की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।
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अर्दली पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार
शासन तक मामला पहुंचने के बाद अब अर्दली पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। दरअसल, पूरे मामले में तहसीलदार का अर्दली अबरार नोट गिनते नजर आ रहा है। इसका वीडियो भी वायरल हो चुका है। इसके बाद अब अर्दली का बचना मुश्किल है। अर्दली ने भी प्रदीप यादव के साथ मारपीट की थी। भ्रष्टाचार के मामले में योगी सरकार जिस तरह से कार्रवाई कर रही है उससे साफ है कि तहसीलदार का अर्दली अबरार कभी भी गिरफ्तार हो सकता है। अर्दली को शनिवार को ही निलंबित कर दिया गया था अब मुकदमा दर्ज होने के बाद तहसीलदार भी निलंबित होंगे। उनके खिलाफ विभागीय जांच की भी संस्तुति हो सकती है।
पूर्व में तहसील में लेखपालों के मामले आ चुके हैं सामने
तहसील में भ्रष्टाचार, मनमानी व दबंगई का खेल लंबे अर्से से चल रहा है। करीब दस महीने पहले एक लेखपाल का तहसील के अंदर जुआ खेलते हुए वीडियो जारी हुआ था। मामला अधिकारियों तक पहुंचा तो एसडीएम ने उसे निलबिंत कर दिया। लेकिन कुछ समय बाद इन्हीं एसडीएम ने इस लेखपाल को न सिर्फ बहाल कर दिया बल्कि वहीं का चार्ज दिया जहां वह पहले ही मौजूद था। यह मामला भी काफी सुर्खियों में रहा था। इसके अलावा दो दिन पूर्व ही तहसील के लेखपाल राजवीर सिंह व एक कानूनगो के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है। इसमें उनपर साठगांठ करके फर्जी कागजात तैयार करने का आरोप लगा है।
चार दिन तक शासन के इशारे का इंतजार करती रही पुलिस
चूंकि पूरा मामला प्रशासनिक अधिकारियों को था। इसलिए पुलिस शासन के फरमान का इंतजार करती रही। पुलिस के पास तहरीर तो घटना वाले दिन 5 मई को ही आ गई थी लेकिन तहसीलदार व अर्दली के खिलाफ मुकदमा लिखने की हिम्मत पुलिस नहीं जुटा सकी। इधर जिम्मेदार अधिकारी भी इस मामले में शांत बैठे रहे। पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर सवाल तो उठ रहे थे लेकिन उसे तहसीलदार व अर्दली पर मुकदमा दर्ज करने के लिए शासन के इशारे का इंतजार था। रविवार को जैसे ही शासन की तरफ से इशारा मिला पुलिस ने तहसीलदार शेर बहादुर सिंह व अर्दली अबरार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने में देरी नहीं की।
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इज्जतनगर के वीर सावरकर नगर निवासी सेवानिवृत्त बैंक प्रबंधक वीरेंद्र सिंह विष्ट ने पांच मई को कोतवाली में तहरीर दी थी। वीरेंद्र सिंह का कहना है कि आशुतोष सिटी में उनकी 720 वर्ग मीटर जमीन है। इस जमीन पर कुछ भूमाफिया की नजर है। उन्होंने जमीन पर कब्जे का प्रयास किया। उन्होंने तहसीलदार के यहां शिकायत कर अपनी जमीन नपवाने की बात कही। ताकि भूमाफिया जमीन न कब्जा सकें। वीरेंद्र सिंह का आरोप है कि तहसीलदार सदर शेर बहादुर सिंह ने समस्या का निदान करने के बजाय अपने अर्दली अबरार से मिलने की सलाह दी। जब वह अबरार से मिले तो उसने काम करने के एवज में तहसीलदार के नाम पर पांच लाख रुपये मांगे। कहा, तहसीलदार खुद जमीन की नापजोख करवाकर प्लॉट पर कब्जा दिला देंगे। बकौल वीरेंद्र 25 अप्रैल को उसने अर्दली अबरार को 1.80 लाख रुपये दे दिए। इस दौरान उनके साथ मित्र प्रदीप यादव भी था। प्रदीप ने रुपये देते समय अर्दली का वीडियो बना लिया। अर्दली ने कहा कि ईद तक रुक जाओ, इसके बाद काम हो जाएगा। ईद के बाद पांच मई को जब प्रदीप सिंह यादव तहसील पहुंचा और काम के लिए कहा तो यहां तहसीलदार से उसकी कहासुनी हो गई। आरोप है कि तहसीलदार शेर बहादुर सिंह और उनके कर्मचारियों ने तहसील के कमरे में प्रदीप को बंधक बना लिया। इसके बाद उसके खिलाफ ही कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई। प्रदीप को सरकारी कर्मचारियों से मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में जेल भेज दिया गया। घटना वाले दिन ही वीरेंद्र ने कोतवाली में तहरीर दी थी लेकिन तब मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।
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सुर्खियों में आने के बाद मामला दूसरे दिन ही शासन तक पहुंच गया। शासन ने इस मामले में डीएम से रिपोर्ट तलब कर ली। इसके बाद शनिवार को तहसीलदार से चार्ज छीन लिया गया। अर्दली को निलंबित कर दिया गया। बताया यह जा रहा है कि शासन ने इस पूरे मामले में फीड बैक लिया, इसमें तहसील में भ्रष्टाचार के मामले में मुहर लग गई। शासन के आदेश पर न सिर्फ अर्दली बल्कि तहसीलदार के खिलाफ भी रविवार देर रात कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। इंस्पेक्टर कोतवाली हिमांशु निगम ने बताया कि तहसीलदार और अर्दली के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम, मारपीट, बंधक बनाने आदि की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।
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अर्दली पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार
शासन तक मामला पहुंचने के बाद अब अर्दली पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। दरअसल, पूरे मामले में तहसीलदार का अर्दली अबरार नोट गिनते नजर आ रहा है। इसका वीडियो भी वायरल हो चुका है। इसके बाद अब अर्दली का बचना मुश्किल है। अर्दली ने भी प्रदीप यादव के साथ मारपीट की थी। भ्रष्टाचार के मामले में योगी सरकार जिस तरह से कार्रवाई कर रही है उससे साफ है कि तहसीलदार का अर्दली अबरार कभी भी गिरफ्तार हो सकता है। अर्दली को शनिवार को ही निलंबित कर दिया गया था अब मुकदमा दर्ज होने के बाद तहसीलदार भी निलंबित होंगे। उनके खिलाफ विभागीय जांच की भी संस्तुति हो सकती है।
पूर्व में तहसील में लेखपालों के मामले आ चुके हैं सामने
तहसील में भ्रष्टाचार, मनमानी व दबंगई का खेल लंबे अर्से से चल रहा है। करीब दस महीने पहले एक लेखपाल का तहसील के अंदर जुआ खेलते हुए वीडियो जारी हुआ था। मामला अधिकारियों तक पहुंचा तो एसडीएम ने उसे निलबिंत कर दिया। लेकिन कुछ समय बाद इन्हीं एसडीएम ने इस लेखपाल को न सिर्फ बहाल कर दिया बल्कि वहीं का चार्ज दिया जहां वह पहले ही मौजूद था। यह मामला भी काफी सुर्खियों में रहा था। इसके अलावा दो दिन पूर्व ही तहसील के लेखपाल राजवीर सिंह व एक कानूनगो के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है। इसमें उनपर साठगांठ करके फर्जी कागजात तैयार करने का आरोप लगा है।
चार दिन तक शासन के इशारे का इंतजार करती रही पुलिस
चूंकि पूरा मामला प्रशासनिक अधिकारियों को था। इसलिए पुलिस शासन के फरमान का इंतजार करती रही। पुलिस के पास तहरीर तो घटना वाले दिन 5 मई को ही आ गई थी लेकिन तहसीलदार व अर्दली के खिलाफ मुकदमा लिखने की हिम्मत पुलिस नहीं जुटा सकी। इधर जिम्मेदार अधिकारी भी इस मामले में शांत बैठे रहे। पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर सवाल तो उठ रहे थे लेकिन उसे तहसीलदार व अर्दली पर मुकदमा दर्ज करने के लिए शासन के इशारे का इंतजार था। रविवार को जैसे ही शासन की तरफ से इशारा मिला पुलिस ने तहसीलदार शेर बहादुर सिंह व अर्दली अबरार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने में देरी नहीं की।