Bareilly 42 वर्ष पुरानी रामलीला के मंच पर किरदारों का महासंग्राम, पिता रावण तो बेटी बनती है राम
उत्तराखंड सांस्कृतिक समाज की ओर से 42 वर्ष से रामलीला का मंचन किया जा रहा है। इसमें लड़कियां प्रमुख किरदार निभाती हैं। इस बार बीए की छात्रा खुशी राम बनी हैं, वहीं उनके पिता भुवन चंद्र जोशी रावण की भूमिका में हैं।
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इस बार मिला राम बनने का अवसर
खुशी ने बताया कि पिछले साल वह दूसरा किरदार निभा रहीं थी। इस बार राम बनने का अवसर मिला है। इससे अपनी संस्कृति को और करीब से जानने का मौका मिला है। पिता भुवन चंद्र जोशी भी रावण का किरदार निभा रहे हैं। वह लंबे समय से मंचन करते आ रहे हैं। उनसे काफी कुछ सीखने को मिलता है। वह घर में भी एक्टिंग की बारीकियां सिखाते रहते हैं।
रामलीला कमेटी के अध्यक्ष रमेश चंद्र पंत ने बताया कि कि 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' का संदेश देने के लिए रामलीला में बालिकाओं को प्रमुख पात्रों की भूमिका दी गई है। इसमें खुशी राम, याशिका पाठक सीता, प्रियांशी पाठक लक्ष्मण, रिषिता भरत व पीहू शत्रुघ्न की भूमिका निभाती हैं। इस रामलीला के सभी कलाकार विद्यार्थी हैं। खुशी स्नातक कर रही हैं। उनका सपना सिविल सर्विसेज में जाने का है। याशिका व रिषिता नौवीं तो प्रियांशी पाचंवी कक्षा में पढ़ती हैं।
स्कूल-कोचिंग से आने के बाद करते हैं रिहर्सल
रामलीला के पात्र स्कूल से लौटने के बाद होमवर्क करके सभी शाम को कोचिंग जाते हैं। कोचिंग से लौटने के बाद सभी साथ में रिहर्सल करते हैं। सभी ने अपने-अपने पात्रों के संवाद की डायरी बना रखी है। बालिकाओं ने संवाद को कंठस्थ कर लिया है।