किसान आंदोलनः किसानों को भरोसे में लेकर काम करे सरकार, एमएसपी लागू करे
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किसानों ने कहा कि मंडी में किसानों की समस्याओं का निस्तारण किया जाए
किसानों से बात
यहां मंडियों में गन्ना का भुगतान नहीं हो रहा है। इसके अलावा मंडियों में भ्रष्टाचार फैला हुआ है। छोटे छोटे रूप में बहुत भ्रष्टाचार है। किसान कहीं शिकायत कर नहीं सकता है। किसानों की समस्याओं का हल नहीं हो रहा है। स्थानीय स्तर पर भी हमारी समस्याओं का निस्तारण हो। -छत्रपाल सिंह।
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ठंड की सर्द रातों में किसान इतने दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। जायज मांगे हैं, सरकार को मांगे माननी चाहिए। हम एमएसपी लिखित रूप से जोड़ने की मांग कर रहे हैं और सरकार भी कह रही है कि एमएसपी खत्म नहीं होगा। तो फिर यही बात लिखकर देेने में क्या दिक्कत है। सरकार को यह बात लिखकर देनी चाहिए। इससे किसानों का धरना खत्म हो। - प्रेम नारायण।
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सरकार कह रही है कि नए कानून में बरेली का किसान मध्यप्रदेश, हरियाणा देश के किसी भी हिस्से में अनाज बेंच सकेगा। देश में सबसे अधिक छोटे काश्तकार ही है। मेरे खेत में पांच क्विंटल सरसों हुई तो क्या मैं हरियाणा या दिल्ली बेचने जाऊंगा। यहीं की स्थानीय मंडी में ही बेचूंगा और मंडियों में जबरदस्त भ्रष्टाचार है। सरकार को एमएसपी लागू करनी चाहिए। मंडियों पर उद्योगपतियों का कब्जा न हो। -भारत सिंह।
इस कानून से मंडियों पर उद्योगपतियों के कब्जा कराने की तैयारी है। एमएसपी खत्म हो गई है तो बड़े व्यापारी जैसे चाहेंगे वैसे ही फसल की खरीद करेंगे। किसान के पास कोई रास्ता नहीं होगा। सरकार किसान का हित चाहती है तो हमे भरोसे में लें। उप्र सरकार ने अन्ना मवेशी छुड़वा दिए हैं। किसान ऐसी सर्दी की रातों में फसल रखाता रहता है। इसका भी समाधान सरकार को निकालना चाहिए। - जसवंत सिंह राणा।