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Bareilly News: जीएसटी क्लेम मिले और विदेश में भुगतान अटकने की अड़चन थमे तो बढ़े निर्यात
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बरेली। उत्पादों के निर्यात पर पूर्व में वस्तु एवं सेवा कर नहीं लगता था, पर बाद में जीएसटी लगाने का नियम बना। हालांकि, यह डीजीएफटी से निर्यातक को वापस मिल जाती थी। ये व्यवस्था भी खत्म हो गई। अब स्थानीय स्तर पर क्लेम का नियम बना। यह बेहद जटिल प्रक्रिया है। साथ ही, उत्पाद निर्यात के लिए बाजार, उपभोक्ता और भुगतान की अड़चन है। इन समस्याओं का समाधान हो तो बरेली से भी निर्यात बढ़े।
विकास भवन सभागार में बुधवार को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से ''गेटवे टू ग्रोथ : हार्नेसिंग एक्सपोर्ट अपॉर्चुनिटी इन बरेली'' विषय पर आयोजित एक्सपोर्ट प्रमोशन आउटरीच कार्यक्रम में उद्यमियों ने ये मुद्दे उठाए। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) की अपर महानिदेशक वृंदा मनोहर देसाई ने समाधान का आश्वासन दिया। बांस-बेत, जरी, हैंडीक्राफ्ट, राइस मिलर्स ने निर्यात और उससे जुड़ी बारीकियाें की जानकारी मांगी। संयुक्त आयुक्त उद्योग वीरेंद्र कुमार ने उपायुक्त उद्योग को सटीक एक्सपोर्ट प्लान बनाने के निर्देश दिए।
कहा कि पारंपरिक उत्पादों के निर्यात के प्रति कारीगर जागरूक नहीं हैं। डीएम अविनाश सिंह ने निर्यातकों की समस्याओं के समाधान के लिए मासिक जिला स्तरीय एक्सपोर्ट कमेटी मीटिंग करने का भरोसा दिया। डिप्टी डायरेक्टर नवीन गौड़ ने बरेली से छह सदस्य ईपीसीएच से जुड़े होने की बात कही।
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बरेली से 1.64 अरब रुपये का निर्यात
उपायुक्त उद्योग विकास यादव के मुताबिक, बरेली से वर्ष 2025-26 में (अप्रैल से जुलाई) तक मांस, राइस, मेंथा ऑयल, सिंथेटिक, आयरन, स्टील, रबर इक्विपमेंट आदि श्रेणी में 1.64 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ। रिछा, बहेड़ी, धौराटांडा में 350 राइस मिलें हैं। मेंथा के लिए डिस्ट्रिक्ट एक्शन प्लान प्रस्तावित है। उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025-30 समेत गेट-वे पोर्ट अनुदान योजना, स्वदेशी, अंतरराष्ट्रीय मेला, आईएसओ सर्टिफिकेशन, फ्री सैंपल, एमडीएम क्लेम आदि योजनाओं में हुए बदलाव की जानकारी दी।
निर्यात में प्रदेश का पांचवां स्थान
अपर महानिदेशक ने बताया कि निर्यात क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का देश में पांचवां स्थान है। बरेली में मेंथॉल, बोनलेस मीट, सिंथेटिक, खांडसारी शुगर, आर्टिफिशियल आयरन प्रोडक्ट्स आदि का अच्छा निर्यात हुआ है। निर्यात क्षेत्र से कई शुल्क हटाए गए हैं, ताकि उत्पाद सस्ते मूल्य पर विदेश में बेचे जा सकें। भारत और यूके के बीच 24 जुलाई को हुए समझौते की जानकारी दी। फियो डिप्टी डायरेक्टर मनीषा झा ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आयोजित प्रदर्शनी, मेला, विदेश दौरे, व्यापारिक सत्यापन पत्र, नीतिगत प्रतिनिधित्व की जानकारी दी। बहेड़ी के राइस मिलर्स ने चावल के निर्यात प्रक्रिया में सहयोग और इसकी जांच के लिए लैब स्थापना की मांग की। कहा कि अभी चावल की जांच दिल्ली से करा रहे हैं। उद्यमियों ने इंटरनेशनल मेले में मिलने वाले विदेशी खरीदारों से संपर्क की समस्या उठाई। इस पर उचित कार्रवाई का आश्वासन मिला। हस्तशिल्प के सहायक निदेशक पुलकित जैन ने बताया कि जिले के कारीगराें को प्रशिक्षित कर टूल किट दिया जा रहा है। कारीगरों के उत्पाद को जीएसटी फ्री करने की कार्रवाई जारी है। एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (ईसीजीसी) की जानकारी दी। ब्यूरो
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विकास भवन सभागार में बुधवार को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से ''गेटवे टू ग्रोथ : हार्नेसिंग एक्सपोर्ट अपॉर्चुनिटी इन बरेली'' विषय पर आयोजित एक्सपोर्ट प्रमोशन आउटरीच कार्यक्रम में उद्यमियों ने ये मुद्दे उठाए। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) की अपर महानिदेशक वृंदा मनोहर देसाई ने समाधान का आश्वासन दिया। बांस-बेत, जरी, हैंडीक्राफ्ट, राइस मिलर्स ने निर्यात और उससे जुड़ी बारीकियाें की जानकारी मांगी। संयुक्त आयुक्त उद्योग वीरेंद्र कुमार ने उपायुक्त उद्योग को सटीक एक्सपोर्ट प्लान बनाने के निर्देश दिए।
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कहा कि पारंपरिक उत्पादों के निर्यात के प्रति कारीगर जागरूक नहीं हैं। डीएम अविनाश सिंह ने निर्यातकों की समस्याओं के समाधान के लिए मासिक जिला स्तरीय एक्सपोर्ट कमेटी मीटिंग करने का भरोसा दिया। डिप्टी डायरेक्टर नवीन गौड़ ने बरेली से छह सदस्य ईपीसीएच से जुड़े होने की बात कही।
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बरेली से 1.64 अरब रुपये का निर्यात
उपायुक्त उद्योग विकास यादव के मुताबिक, बरेली से वर्ष 2025-26 में (अप्रैल से जुलाई) तक मांस, राइस, मेंथा ऑयल, सिंथेटिक, आयरन, स्टील, रबर इक्विपमेंट आदि श्रेणी में 1.64 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ। रिछा, बहेड़ी, धौराटांडा में 350 राइस मिलें हैं। मेंथा के लिए डिस्ट्रिक्ट एक्शन प्लान प्रस्तावित है। उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025-30 समेत गेट-वे पोर्ट अनुदान योजना, स्वदेशी, अंतरराष्ट्रीय मेला, आईएसओ सर्टिफिकेशन, फ्री सैंपल, एमडीएम क्लेम आदि योजनाओं में हुए बदलाव की जानकारी दी।
निर्यात में प्रदेश का पांचवां स्थान
अपर महानिदेशक ने बताया कि निर्यात क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का देश में पांचवां स्थान है। बरेली में मेंथॉल, बोनलेस मीट, सिंथेटिक, खांडसारी शुगर, आर्टिफिशियल आयरन प्रोडक्ट्स आदि का अच्छा निर्यात हुआ है। निर्यात क्षेत्र से कई शुल्क हटाए गए हैं, ताकि उत्पाद सस्ते मूल्य पर विदेश में बेचे जा सकें। भारत और यूके के बीच 24 जुलाई को हुए समझौते की जानकारी दी। फियो डिप्टी डायरेक्टर मनीषा झा ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आयोजित प्रदर्शनी, मेला, विदेश दौरे, व्यापारिक सत्यापन पत्र, नीतिगत प्रतिनिधित्व की जानकारी दी। बहेड़ी के राइस मिलर्स ने चावल के निर्यात प्रक्रिया में सहयोग और इसकी जांच के लिए लैब स्थापना की मांग की। कहा कि अभी चावल की जांच दिल्ली से करा रहे हैं। उद्यमियों ने इंटरनेशनल मेले में मिलने वाले विदेशी खरीदारों से संपर्क की समस्या उठाई। इस पर उचित कार्रवाई का आश्वासन मिला। हस्तशिल्प के सहायक निदेशक पुलकित जैन ने बताया कि जिले के कारीगराें को प्रशिक्षित कर टूल किट दिया जा रहा है। कारीगरों के उत्पाद को जीएसटी फ्री करने की कार्रवाई जारी है। एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (ईसीजीसी) की जानकारी दी। ब्यूरो