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शराब माफिया के लिए नौकरी दांव पर लगाने से भी पीछे नहीं हटे अफसर
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Even the officers did not back down from putting the job at stake for the liquor mafia
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बरेली। टपरी डिस्टलरी में सौ करोड़ की एक्साइज ड्यूटी की चोरी के खुलासे से पहले रामपुर में 25 हजार लीटर ईएनए (एक्स्ट्रा न्यूट्रल एल्कोहल) पकड़ा गया था जिसमें 15 पुलिस वालों के खिलाफ बर्खास्तगी की संस्तुति की जा चुकी है। इसके बावजूद बरेली में कई अफसर शराब माफिया की मदद करते रहे। यही नहीं, इस बीच रामपुर में शराब माफिया की कठपुतली बनकर नौकरी गंवाने की हद तक पहुंचे कई पुलिस वालों की भी बरेली रेंज में तैनाती हो गई।
टपरी डिस्टिलरी में एक्साइज ड्यूटी चोरी और रामपुर के ईएनए प्रकरण को साथ जोड़कर देखा जाए तो साफ पता चलता है कि पुलिस-प्रशासन के अफसरों से शराब माफिया का गठजोड़ कितना मजबूत था। टपरी डिस्टिलरी में तीन मार्च 2021 को एसटीएफ के छापे में सौ करोड़ के टैक्स की चोरी का खुलासा हुआ था। इससे पहले एसटीएफ ने ही रामपुर में 12 जून 2020 की रात शहजादपुर थाना क्षेत्र में 25 हजार लीटर ईएनए से भरा टैंकर पकड़ा था। हाल ही में सामने आया है कि ईएनए की तस्करी के तार भी बरेली के शराब माफिया से जुड़े हुए थे।
रामपुर में ईएनए पकड़े जाने के बाद मामला पुलिस मुख्यालय तक पहुंचा था। स्थानीय पुलिस की भूमिका संदिग्ध मिलने पर तत्कालीन एडीजी अविनाश चंद्र ने तत्कालीन आईजी राजेश पांडेय को जांच सौंपी थी। जांच में सामने आया था कि ईएनए से शराब बनाने का धंधा भी पुलिस के बड़े अफसरों की सरपरस्ती में चल रहा था। जांच में तत्कालीन एसपी शगुन गौतम, सीओ अशोक पांडेय, इंस्पेक्टर सत्येंद्र सिंह, सब इंस्पेक्टर अनुराग चौधरी, पंकज चौधरी, हेड कांस्टेबल जोगेश सिंह, कांस्टेबल विपिन कुमार, महिपाल, अफजाल अहमद और ड्राइवर इरशाद समेत 18 पुलिस वालों को दोषी पाया गया।
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तत्कालीन आईजी की जांच रिपोर्ट पर तत्कालीन एडीजी ने एसपी समेत तीन पुलिसकर्मियों को छोड़कर बाकी 15 के खिलाफ शासन से बर्खास्तगी की सिफारिश की थी। इन पुलिस वालों को उस समय सस्पेंड भी किया गया था लेकिन बर्खास्त होने के बजाय वे बहाल हो गए और अब खुलासा हुआ है कि इनमें कई पुलिस वालों को बरेली में तैनाती भी दे दी गई। इस खुलासे से सकते में आए अफसर अब छानबीन करा रहे हैं।
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टपरी डिस्टिलरी में एक्साइज ड्यूटी चोरी और रामपुर के ईएनए प्रकरण को साथ जोड़कर देखा जाए तो साफ पता चलता है कि पुलिस-प्रशासन के अफसरों से शराब माफिया का गठजोड़ कितना मजबूत था। टपरी डिस्टिलरी में तीन मार्च 2021 को एसटीएफ के छापे में सौ करोड़ के टैक्स की चोरी का खुलासा हुआ था। इससे पहले एसटीएफ ने ही रामपुर में 12 जून 2020 की रात शहजादपुर थाना क्षेत्र में 25 हजार लीटर ईएनए से भरा टैंकर पकड़ा था। हाल ही में सामने आया है कि ईएनए की तस्करी के तार भी बरेली के शराब माफिया से जुड़े हुए थे।
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रामपुर में ईएनए पकड़े जाने के बाद मामला पुलिस मुख्यालय तक पहुंचा था। स्थानीय पुलिस की भूमिका संदिग्ध मिलने पर तत्कालीन एडीजी अविनाश चंद्र ने तत्कालीन आईजी राजेश पांडेय को जांच सौंपी थी। जांच में सामने आया था कि ईएनए से शराब बनाने का धंधा भी पुलिस के बड़े अफसरों की सरपरस्ती में चल रहा था। जांच में तत्कालीन एसपी शगुन गौतम, सीओ अशोक पांडेय, इंस्पेक्टर सत्येंद्र सिंह, सब इंस्पेक्टर अनुराग चौधरी, पंकज चौधरी, हेड कांस्टेबल जोगेश सिंह, कांस्टेबल विपिन कुमार, महिपाल, अफजाल अहमद और ड्राइवर इरशाद समेत 18 पुलिस वालों को दोषी पाया गया।
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तत्कालीन आईजी की जांच रिपोर्ट पर तत्कालीन एडीजी ने एसपी समेत तीन पुलिसकर्मियों को छोड़कर बाकी 15 के खिलाफ शासन से बर्खास्तगी की सिफारिश की थी। इन पुलिस वालों को उस समय सस्पेंड भी किया गया था लेकिन बर्खास्त होने के बजाय वे बहाल हो गए और अब खुलासा हुआ है कि इनमें कई पुलिस वालों को बरेली में तैनाती भी दे दी गई। इस खुलासे से सकते में आए अफसर अब छानबीन करा रहे हैं।