फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Engineer found guilty in tender scam, instead of taking action one was promoted

Bareilly News: टेंडर घोटाले में दोषी मिले अभियंता, कार्रवाई के बजाए एक का कद बढ़़ाया

Sun, 19 Nov 2023 01:36 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 19 Nov 2023 01:36 AM IST
विज्ञापन
Engineer found guilty in tender scam, instead of taking action one was promoted
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

बरेली। लोकायुक्त की जांच में बरेली मंडल में तैनात रहे तीन मुख्य, एक अधीक्षण व दो अधिशासी अभियंताओं को टेंडर घोटाले में दोषी पाया गया है। इन अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए लोकायुक्त के सचिव अनिल कुमार सिंह ने मुख्य सचिव को 20 सितंबर को पत्र भेजा था। पत्र में तीन महीने की अवधि में कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन संस्तुति के 58 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं हो सकी है। इनमें तीन अभियंता सेवानिवृत्त हो चुके हैं। बाकी तीन अभियंता वर्तमान में मेरठ, मुजफ्फरनगर व खुर्जा में तैनात हैं।
स्थिति यह है कि कार्रवाई के बजाय सेवारत तीन दोषी अभियंताओं में से एक एमएम निसार की जिम्मेदारियां बढ़ा दी गई हैं। उन्हें मेरठ में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के मुख्य अभियंता पद के साथ पहली नवंबर को पीडब्ल्यूडी मेरठ का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंप दिया गया है। वहीं दो अन्य दोषी अनिल राना मुजफ्फरनगर और हेमंत सिंह खुर्जा में अधिशासी अभियंता के पद पर सेवारत हैं। तीन महीने में कार्रवाई नहीं होने पर लोकायुक्त की ओर से राज्यपाल को विशेष प्रतिवेदन दिया जाएगा। विभाग के अधिकारी कार्रवाई के लिए अभिलेख जुटाए जाने की प्रक्रिया चलने की बात कह रहे हैं। वहीं शिकायतकर्ता सतीश चंद्र दीक्षित ने आरोप लगाया है कि न्याय देने में विभाग की गंभीरता नजर नहीं आ रही।
विज्ञापन


इन्हें पाया गया दोषी

लोकायुक्त जांच में तीन मुख्य अभियंताओं एमएम निसार, देवेश कुमार तिवारी व देवेंद्र कुमार मिश्र को दोषी पाया गया है। वहीं अधीक्षण अभियंता हरस्वरूप सिंह और अधिशासी अभियंता अनिल राना व हेमंत सिंह भी दोषी पाए गए हैं। इनमें देवेंद्र कुमार मिश्र, देवेश कुमार तिवारी व हरस्वरूप सिंह सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

पीलीभीत जिले के बीसलपुर-खुदागंज मार्ग पर बौनी गांव के निकट पांच करोड़ 14 लाख रुपये की लागत से रपटुआ नाले पर लघु सेतु का निर्माण होना था। अभियंताओं ने चहेती फर्म मेसर्स एएम बिल्डर्स को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रख दिया। इस आरोप के साथ मेसर्स सतीश चंद्र दीक्षित की ओर से लोकायुक्त को दिसंबर 2021 में शिकायत की गई थी। जांच में तत्कालीन मुख्य अभियंता डीके मिश्र, एमएम निसार व अधीक्षण अभियंता हरस्वरूप सिंह दोषी को पाया गया।



डीके मिश्र के बाद देवेश कुमार तिवारी करीब एक महीने मुख्य अभियंता रहे। उन्होंने भी गलत तरीके से मेसर्स सतीश चंद्र दीक्षित की फर्म को तीन महीने के लिए डिबार कर दिया। इसके लिए इन्हें दोषी पाया गया। नियम विरुद्ध संस्तुतियों के लिए पीलीभीत के तत्कालीन अधिशासी अभियंता अनिल राना दोषी पाए गए और बदायूं के तत्कालीन अधिशासी अभियंता हेमंत सिंह को सतीश चंद्र दीक्षित फर्म का अनुभव प्रमाणपत्र निरस्त करने के त्रुटिपूर्ण आदेश के लिए दोषी पाया गया।


शाहजहांपुर जिले में गढि़या रंगीन गोगेपुर मार्ग पर 3.38 करोड़ की लागत से पुल निर्माण के लिए टेंडर निकला था। इसमें सतीश चंद्र दीक्षित की फर्म की निविदा निरस्त करने और नियम विरुद्ध ढंग से उनकी फर्म को काली सूची में डालने के लिए तत्कालीन मुख्य अभियंता एमएम निसार दोषी पाए गए हैं। नियम विरुद्ध संस्तुतियों के लिए तत्कालीन अधीक्षण अभियंता हरस्वरूप सिंह को भी दोषी पाया गया।


शिकायतकर्ता सतीश चंद्र दीक्षित कहते हैं कि पूरी प्रक्रिया के दौरान अभियंताओं ने कदम-कदम पर रोड़े अटकाए। शिकायत के एक वर्ष बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब दिसंबर 2022 में हाईकोर्ट में दस्तक दी। कोर्ट ने लोकायुक्त को जल्द से जल्द प्रकरण निस्तारित करने के निर्देश दिए। इसके बाद जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ी और करीब नौ महीने बाद जांच पूरी हुई। उनके अनुसार न्याय के लिए लड़ाई जारी रहेगी। ब्यूरो


विभागीय कार्रवाई के लिए लोक निर्माण विभाग के मुख्यालय ने आख्या मांगी है। अभिलेख एकत्र कर रहे हैंं, जल्द मुख्यालय को तथ्यों से अवगत कराएंगे। कार्रवाई का निर्णय शासन स्तर से ही होना है।- संजय तिवारी, मुख्य अभियंता
दोषियों के तर्क...
मैंने निविदा समिति की संस्तुतियों के अनुरूप कार्रवाई की है। जहां जरूरत पड़ी विभागीय मुख्यालय की राय ली। लोकायुक्त को भी तथ्यों से अवगत कराया। शासन जहां भी चाहेगा पूरी जानकारी देंगे। मैं दोषी नहीं हूं। शासन को भी तथ्यों से अवगत कराया जाएगा।- एमएम निसार, मुख्य अभियंता मेरठ


---

मैंने कोई गलत कार्रवाई नहीं की है। नियमानुसार निर्णय लिया गया है। इस विषय में जब भी कोई जांच समिति जानकारी मांगेगी, मैं उसे अवगत करा दूंगा।- हेमंत सिंह, अधिशासी अभियंता खुर्जा
मैंने कोई भी संस्तुति नियम विरुद्ध नहीं की है। अधिकारी भी इस तथ्य से अवगत हैं। - अनिल राना, अधिशासी अभियंता, मुजफ्फरनगर


विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed