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पशु रोग निदान के लिए शोध कार्य बढ़ाने पर जोर
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आईवीआरआई
- फोटो : सोशल नेटवर्क
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आईवीआरआई नई तकनीक से किसानों को कराए रूबरू
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बरेली। ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत आईवीआरआई में चल रहे कार्यक्रमों की शृंखला में शुक्रवार को महाराष्ट्र के पशु चिकित्साधिकारियों के लिए वर्चुअल कार्यशाला का आयोजन किया गया। इंटरफेस मीट के मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के उप महानिदेशक डॉ. बीएन त्रिपाठी रहे। उन्होंने पशु बीमारियों के निदान के लिए शोध पर जोर दिया।
डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में कृषि और पशुपालन का अहम योगदान है, इसलिए पशु उत्पादकता में और सुधार करना होगा। आईवीआरआई द्वारा विकसित पशुओं के टीके और नैदानिकों के बारे में उन्होंने चर्चा की। नई बीमारियों के निदान के लिए शोध कार्य कर नए टीके विकसित करने को कहा। पशुपालन आयुक्त डॉ. प्रवीण मलिक ने संस्थान निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त की कार्यक्रम आयोजन के लिए सराहना की। पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान की दर बढ़ाने और प्रयोगशालाओं का आईएसओ सर्टिफिकेशन कराने पर जोर दिया। महाराष्ट्र के पशुपालन आयुक्त सचिंद्र प्रताप सिंह ने भी विचार रखे।
सहायक महानिदेशक पशु विज्ञान डॉ. अशोक कुमार ने विकसित शोध और तकनीक का प्रयोग करने और नई बीमारियों के निदान को शोध कार्य करने की बात कही। संस्थान निदेशक डॉ. दत्त ने बताया कि संस्थान ने विभिन्न पशु रोगों की रोकथाम के लिए वैक्सीन विकसित की हैं। इनमें 93 में से 23 का पेटेंट होने, 24 डिजाइन रजिस्टर्ड और 35 तकनीक व्यावसायिक घरानों को हस्तांतरित करने की जानकारी दी।
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डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में कृषि और पशुपालन का अहम योगदान है, इसलिए पशु उत्पादकता में और सुधार करना होगा। आईवीआरआई द्वारा विकसित पशुओं के टीके और नैदानिकों के बारे में उन्होंने चर्चा की। नई बीमारियों के निदान के लिए शोध कार्य कर नए टीके विकसित करने को कहा। पशुपालन आयुक्त डॉ. प्रवीण मलिक ने संस्थान निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त की कार्यक्रम आयोजन के लिए सराहना की। पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान की दर बढ़ाने और प्रयोगशालाओं का आईएसओ सर्टिफिकेशन कराने पर जोर दिया। महाराष्ट्र के पशुपालन आयुक्त सचिंद्र प्रताप सिंह ने भी विचार रखे।
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सहायक महानिदेशक पशु विज्ञान डॉ. अशोक कुमार ने विकसित शोध और तकनीक का प्रयोग करने और नई बीमारियों के निदान को शोध कार्य करने की बात कही। संस्थान निदेशक डॉ. दत्त ने बताया कि संस्थान ने विभिन्न पशु रोगों की रोकथाम के लिए वैक्सीन विकसित की हैं। इनमें 93 में से 23 का पेटेंट होने, 24 डिजाइन रजिस्टर्ड और 35 तकनीक व्यावसायिक घरानों को हस्तांतरित करने की जानकारी दी।
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