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यहां तो बिना किताबों के स्कूलों में हो रही पढ़ाई
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बदायूं। शिक्षा विभाग के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के दावे धरातल पर कमजोर दिखाई पड़ रहे हैं। आधुनिक सुविधाओं की दौड़ में छात्रों को पढ़ने के लिए किताबें तक नसीब नहीं हो रहीं है, जबकि शैक्षणिक सत्र शुरू हुए करीब 25 दिन व्यतीत हो चुके हैं। हालत ये है शिक्षा विभाग की अव्यवस्था के कारण छात्र-छात्राएं पुरानी किताबों से ही काम चला रहे हैं। इस कारण कई स्कूलों में बच्चों की संख्या पर भी असर पड़ा है क्योंकि बच्चे बिना किताबों के स्कूल आने से परहेज कर रहे हैं।
एक ओर सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था में सुधार के बड़े-बड़े दावे सरकार और विभाग करते नहीं थक रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शैक्षणिक सत्र शुरू होने के 25 दिन बाद भी किताबें अब तक बच्चों की पहुंच से दूर है। दरअसल, जिले में 1502 प्राथमिक, 356 उच्च प्राथमिक और 300 कंपोजिट विद्यालय हैं। इन स्कूलों में करीब पौने चार लाख छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। नए सत्र शुरू होने के बाद शिक्षकों ने दाखिले को लेकर जोर देना तो शुरू कर दिया है, लेकिन स्कूल पहुंच रहे छात्र-छात्राओं पर किसी का विशेष ध्यान नहीं है। हालात ये है कि अब तक परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को किताबें तक मुहैया नहीं हो पाई हैं। इसकी वजह से अधिकतर छात्र-छात्राएं बिना किताब या पुरानी किताबों से किसी तरह पढ़ाई कर रहे हैं।
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अब शासन स्तर से किताबें नहीं मिली है, जैसे ही किताबें आती है, उनका तुरंत ही वितरण करा दिया जाएगा। फिलहाल शिक्षकों को निर्देशित किया गया है कि वे पुरानी किताबों से ही बच्चों को स्कूल में पढ़ाएं।
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-डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए
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एक ओर सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था में सुधार के बड़े-बड़े दावे सरकार और विभाग करते नहीं थक रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शैक्षणिक सत्र शुरू होने के 25 दिन बाद भी किताबें अब तक बच्चों की पहुंच से दूर है। दरअसल, जिले में 1502 प्राथमिक, 356 उच्च प्राथमिक और 300 कंपोजिट विद्यालय हैं। इन स्कूलों में करीब पौने चार लाख छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। नए सत्र शुरू होने के बाद शिक्षकों ने दाखिले को लेकर जोर देना तो शुरू कर दिया है, लेकिन स्कूल पहुंच रहे छात्र-छात्राओं पर किसी का विशेष ध्यान नहीं है। हालात ये है कि अब तक परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को किताबें तक मुहैया नहीं हो पाई हैं। इसकी वजह से अधिकतर छात्र-छात्राएं बिना किताब या पुरानी किताबों से किसी तरह पढ़ाई कर रहे हैं।
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अब शासन स्तर से किताबें नहीं मिली है, जैसे ही किताबें आती है, उनका तुरंत ही वितरण करा दिया जाएगा। फिलहाल शिक्षकों को निर्देशित किया गया है कि वे पुरानी किताबों से ही बच्चों को स्कूल में पढ़ाएं।
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-डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए