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बरेली कॉलेज : ‘ए’ ग्रेड के बारे में अब सोचना भी मुश्किल
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बरेली। बरेली कॉलेज अगले साल फिर से नैक मूल्यांकन कराने की तैयारी में है। मगर पूर्व में ‘ए’ ग्रेड का तमगा हासिल कर चुके कॉलेज प्रशासन को अब इस बारे में सोचने पर ही पसीना छूट रहा है। कहा जा रहा है कि पिछले पांच सालों में कॉलेज में शोध से लेकर तमाम स्तर पर गिरावट आई है। ऐसे में दोबारा ‘ए’ ग्रेड हासिल करना मुश्किल होगा। इसको लेकर शुक्रवार को कॉलेज में बैठक बुलाई गई है।
वर्ष 1837 में स्थापित बरेली कॉलेज को वर्ष 2013 में हुए नैक मूल्यांकन में ‘ए’ ग्रेड मिला था। इसका समय समाप्त हो चुका है और आगामी सत्र में कॉलेज दोबारा मूल्यांकन कराने की तैयारी में है। इसको लेकर शुक्रवार को प्राचार्य डॉ. अनुराग मोहन ने नैक प्रभारी और इस कमेटी में शामिल शिक्षकों की बैठक बुलाई है। मगर वर्ष 2013 के बाद कॉलेज में लगातार आई गिरावट के चलते इस बार ‘ए’ ग्रेड मिलने को लेकर शिक्षक आश्वस्त नहीं हैं। वहीं, प्राचार्य डॉ. अनुराग मोहन ने नैक मूल्यांकन के लिए जरूरी कार्यों को देखने के लिए बृहस्पतिवार को कॉलेज कैंपस का निरीक्षण किया।
इन बिंदुओं पर बढ़ेगी मुश्किल
- शिक्षकों के निर्देशन में होने वाले रिसर्च की संख्या कम होने से उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियां भी कम हो गई हैं।
- यूजीसी से पिछले तीन साल में बरेली कॉलेज को कोई भी रिसर्च प्रोजेक्ट नहीं मिला।
- वर्ष 2012 के बाद यूजीसी से पीजी डेवलपमेंट ग्रांट भी नहीं मिली।
- फंड के अभाव में कॉलेज में होने वाले सेमिनार की संख्या भी बहुत कम हो गई।
- कॉलेज में शिक्षक भी कम हैं और सिलेबस भी अपडेट नहीं किया गया है।
उपमुख्यमंत्री ने अफसरों को दिए निर्देश
बरेली। शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने के लिए डिग्री कॉलेजों को नैक मूल्यांकन कराना अनिवार्य होगा। बृहस्पतिवार को लखनऊ में हुई बैठक में उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने इस संबंध में मीटिंग कर कुलपति, कुलसचिव और क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को निर्देश।
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उपमुख्यमंत्री की बैठक में बरेली से रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल और क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. राजेश प्रकाश पहुंचे थे। यह बैठक लखनऊ, योजना भवन में हुई थी। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी ने बताया कि विश्वविद्यालयों को कॉलेजों की मदद करने का निर्देश दिया गया है। कहा है कि अब सभी कॉलेजों को नैक मूल्यांकन कराना होगा ताकि शिक्षा गुणवत्ता और उसके माहौल में सुधार हो सके। उन्होंने कहा है कि हर साल के लिए अब लक्ष्य निर्धारित करके नैक मूल्यांकन कराया जाए ताकि यह प्रक्रिया जल्दी पूरी हो सके।
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वर्ष 1837 में स्थापित बरेली कॉलेज को वर्ष 2013 में हुए नैक मूल्यांकन में ‘ए’ ग्रेड मिला था। इसका समय समाप्त हो चुका है और आगामी सत्र में कॉलेज दोबारा मूल्यांकन कराने की तैयारी में है। इसको लेकर शुक्रवार को प्राचार्य डॉ. अनुराग मोहन ने नैक प्रभारी और इस कमेटी में शामिल शिक्षकों की बैठक बुलाई है। मगर वर्ष 2013 के बाद कॉलेज में लगातार आई गिरावट के चलते इस बार ‘ए’ ग्रेड मिलने को लेकर शिक्षक आश्वस्त नहीं हैं। वहीं, प्राचार्य डॉ. अनुराग मोहन ने नैक मूल्यांकन के लिए जरूरी कार्यों को देखने के लिए बृहस्पतिवार को कॉलेज कैंपस का निरीक्षण किया।
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इन बिंदुओं पर बढ़ेगी मुश्किल
- शिक्षकों के निर्देशन में होने वाले रिसर्च की संख्या कम होने से उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियां भी कम हो गई हैं।
- यूजीसी से पिछले तीन साल में बरेली कॉलेज को कोई भी रिसर्च प्रोजेक्ट नहीं मिला।
- वर्ष 2012 के बाद यूजीसी से पीजी डेवलपमेंट ग्रांट भी नहीं मिली।
- फंड के अभाव में कॉलेज में होने वाले सेमिनार की संख्या भी बहुत कम हो गई।
- कॉलेज में शिक्षक भी कम हैं और सिलेबस भी अपडेट नहीं किया गया है।
उपमुख्यमंत्री ने अफसरों को दिए निर्देश
बरेली। शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने के लिए डिग्री कॉलेजों को नैक मूल्यांकन कराना अनिवार्य होगा। बृहस्पतिवार को लखनऊ में हुई बैठक में उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने इस संबंध में मीटिंग कर कुलपति, कुलसचिव और क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को निर्देश।
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उपमुख्यमंत्री की बैठक में बरेली से रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल और क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. राजेश प्रकाश पहुंचे थे। यह बैठक लखनऊ, योजना भवन में हुई थी। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी ने बताया कि विश्वविद्यालयों को कॉलेजों की मदद करने का निर्देश दिया गया है। कहा है कि अब सभी कॉलेजों को नैक मूल्यांकन कराना होगा ताकि शिक्षा गुणवत्ता और उसके माहौल में सुधार हो सके। उन्होंने कहा है कि हर साल के लिए अब लक्ष्य निर्धारित करके नैक मूल्यांकन कराया जाए ताकि यह प्रक्रिया जल्दी पूरी हो सके।