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दावत-ए-इस्लामी का सच: खबर ही नहीं थी कि है पाकिस्तानी तंजीम, हरी पगड़ी वालों के नाम से हैं मशहूर

Tue, 05 Jul 2022 07:07 PM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Tue, 05 Jul 2022 07:07 PM IST
सार

उदयपुर हत्याकांड से नाम जुड़ने के बाद दावत-ए-इस्लामी को लेकर खुफिया एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। बरेली मंडल के जिलों में इस संगठन ने दुकानों पर बॉक्स रखे हैं। ताज्जुब की बात यह है कि किसी को पता ही नहीं है यह चंदा कहां जाता है। इसके साथ ही संगठन के पाकिस्तानी होने की बात भी किसी को नहीं पता है।

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donation for dawat-e-islami in bareilly
कपड़ों की दुकान पर रखा दावत-ए-इस्लामी का चंदे का बॉक्स। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पाकिस्तानी तंजीम दावत-ए-इस्लामी का नेटवर्क मंडल भर में फैला हुआ था। इस्लाम के प्रचार-प्रसार के बहाने यह संगठन जिन लोगों के जरिए हर महीने लाखों का चंदा इकट्ठा कर रहा था, उन्हें भी खबर नहीं थी कि यह संगठन पाकिस्तानी है। अब उदयपुर में कन्हैयालाल की तालिबानी ढंग से हत्या के बाद इस संगठन के पाकिस्तानी होने की जानकारी आम होने के बाद लोगों ने उससे किनारा करना शुरू कर दिया है।

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पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दावत-ए-इस्लामी का नेटवर्क सिर्फ भारत में नहीं बल्कि कई और देशों में भी फैला हुआ है। यह तंजीम इस्लाम के प्रचार-प्रसार के बहाने चंदे की शक्ल में पैसे तो इकट्ठी करती है लेकिन यह पैसा किसे दिया जाता है और किस काम में इस्तेमाल होता है, इसकी जानकारी उन लोगों को भी नहीं है जो संगठन के लिए चंदा इकट्ठा करते हैं। अब उदयपुर की घटना के बाद जरूर इस तंजीम को शक की नजर से देखा जा रहा है।

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दावत-ए-इस्लामी का नेटवर्क किस कदर फैला हुआ है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर के मिशन मार्केट में लगभग हर दुकान में उसका चंदे का बॉक्स लगा हुआ था। अब अधिकतर दुकानदारों ने इस बॉक्स को हटा दिया है लेकिन कुछ दुकानदार अब भी चंदे का बॉक्स काउंटर पर लगाए हुए हैं। कुछ दुकानदारों ने बॉक्स को काउंटर से हटाकर इधर-उधर रख दिया है ताकि किसी की नजर उस पर न पड़े। यही स्थिति पुराना शहर के सैलानी और मुन्ना खां के नीम इलाके का भी है। यहां भी कई दुकानों पर दावत-ए-इस्लामी संगठन के चंदे के बॉक्स अब भी लगे हुए है।

हरी पगड़ी वालों के नाम से हैं मशहूर

दावत-ए-इस्लामी के लोग पूरे शहर में हरी पगड़ी वालों के नाम से मशहूर है। कई मुस्लिम लोग इस तंजीम को इस्लाम का बोलबाला करने वाली तंजीम मानती है। हालांकि कई खानकाहों को इनका तरीका भी पसंद नहीं आता है। हरी पगड़ी वाले लोगों की शहर में अच्छी-खासी तादाद है।

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हर महीने अलग-अलग शहरों में इकट्ठी होती है जमात

दावत-ए-इस्लामी संगठन से जुड़े लोग अलग-अलग शहरों में हर महीने एक बार इकट्ठे होते हैं। इसे जमात कहा जाता है। इस दौरान मुस्लिमों को इस्लाम के बारे में जानकारी देने का दावा किया जाता है। हालांकि कई जिलों में इनके मानने वाले लोगों की कम संख्या होने के कारण जमात में ज्यादा भीड़ नहीं जुटती लेकिन यह संगठन लगातार अपनी गतिविधियां बढ़ाने में जुटा हुआ है। दरगाह आला हजरत के प्रभाव वाले बरेली में भी इसकी गतिविधियां काफी समय से चल रही हैं। शहर में कई इलाके हैं जहां दावत-ए-इस्लामी से तमाम लोग संबद्ध हैं और जमात के दौरान भारी संख्या में उन्हें सुनने भी पहुंचते हैं। शहर में हरी पगड़ी वाले सबसे ज्यादा लोग पुराना शहर में है। बताया जाता है कि हर शहर में इनकी कम से कम एक मस्जिद भी बनी हुई है।

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