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डिजी लॉकर में जब्त होंगे आरसी और डीएल
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बरेली। ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर पकड़े गए वाहनों या चालक के कागजात अब परिवहन या पुलिस विभाग जब्त नहीं कर सकेगा। अगर उन्होंने कागजात जब्त किए और संबंधित वाहन चालक ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की तो कागजात जब्त करने वाले पर भी कार्रवाई हो सकती है। एआरटीओ प्रशासन ने बताया कि शासन से जारी आदेश की जानकारी संबंधित विभागों को दे दी गई है। साथ ही गाड़ी मालिकोें को वाहन के कागज डिजिलॉकर में अपलोड करने को कहा गया है।
एआरटीओ प्रशासन आरपी सिंह ने बताया कि प्रमुख सचिव अरविंद कुमार की ओर जारी आदेश में डिजिलॉकर और एम परिवहन एप पर उपलब्ध वाहनों के डॉक्युमेंट्स को वैद्य माने जाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने डिजिलॉकर या एम परिवहन मोबाइल एप पर इलेक्ट्रॉनिक फार्म में अपलोड डॉक्टयुमेंट (आरसी, डीएल व अन्य) को मोटरयान अधिनियम के तहत वैध करार दिया है। कहा है कि किसी भी स्थिति में अगर वाहन के कागजों को जब्त करने की जरूरत हो तो डॉक्युमेंट को ई-चालान सिस्टम से जब्त किया जाए। साथ ही इस संबंध में व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार कर लोगों को सुविधा की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।
यूं जब्त होंगे डॉक्युमेंट
एआरटीओ ने बताया कि अब तक ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों के कागजात जब्त किए जाते हैं। नई व्यवस्था में पुलिस लाइसेंस और अन्य कागजात को डिजी लॉक में जब्त करेगी। ट्रैफिक पुलिस लाइसेंस और अन्य कागजात को स्कैन कर मशीन में लोड कर लेगा और उन्हें लॉक कर देगा। चालान जमा होने के बाद लाइसेंस और अन्य जब्त कागजात अनलॉक हो जाएंगे।
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तो जब्त हो जाएगी गाड़ी
उन्होंने बताया कि डॉक्युमेंट लॉक या अनलॉक हैं या नहीं इसकी जानकारी भी परिवहन विभाग की वेबसाइट या सारथी वाहन पर दिखेगी। वहीं अगर दोबारा पकड़े गए तो चालान मशीन बता देगी कि कौन सा डॉक्युमेंट पहले से लॉक है। इसके बाद डबल चालान होगा। तीसरी बार पकड़े जाने पर लाइसेंस रद्द हो जाएगा और गाड़ी भी जब्त हो सकती है। लोग चालान ऑनलाइन भी जमा कर सकते हैं।
कहीं का भी हो डीएल
यहीं कराएं रिन्यूवल
- नए नियमों के तहत डीएल रिन्यूवल और पता बदलवाने को परिवहन विभाग पहुंचे लोग
बरेली। ड्राइविंग लाइसेंस के रिन्यूवल और पता परिवर्तन के लिए अब लोगों को बेवजह की दौड़भाग नहीं करनी पड़ेगी। बरेली परिवहन विभाग में नए नियमों के तहत डीएल रिन्यूवल और पता परिवर्तन की कार्रवाई शुरू हो गई है। साथ ही अब दो दर्जन से अधिक लोगों ने आवेदन भी कर दिया है। नए नियमों के तहत अन्य जिले या राज्यों में खरीदे वाहन या डीएल के रिन्यूवल के लिए एनओसी की जरूरत नहीं है।
एआरटीओ आरपी सिंह ने बताया कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) के रिन्यूवल और पता परिवर्तन के लिए जारीकर्ता आरटीओ से एनओसी लेने की व्यवस्था समाप्त कर नई व्यवस्था लागू हो गई है। अब ड्राइविंग लाइसेंस कहीं से भी जारी हो सकेगा और स्थानीय कार्यालय पर आवेदन कर नवीनीकरण कराया जा सकेगा। इसमें आवेदक को जारीकर्ता आरटीओ से एनओसी लेने की बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है। अब भले ही आवेदक अपने निवास को बदलकर अन्य राज्य या अन्य जिले में निवास कर रहा हो और यहां पर यदि ड्राइविंग लाइसेंस की वैद्यता समाप्त हो जाती है, तो वह स्थानीय कार्यालय पर आवेदन कर सकता है। साथ ही, ड्राइविंग लाइसेंस पर दर्ज पता बदलवाने के लिए भी स्थानीय आरटीओ के पास आवेदन हो सकता है। इसके लिए पता परिवर्तन से संबंधित दस्तावेज देने होंगे, जिसकी जांच स्थानीय आरटीओ द्वारा की जाएगी। इसमें संतुष्ट हो जाने पर ड्राइविंग लाइसेंस पर दर्ज पते को बदल दिया जाएगा।
यह थी पुरानी नीति
यदि किसी आवेदक का ड्राइविंग लाइसेंस जारी है और वह किसी अन्य जिले में रहने लगा है, ऐसे में पता परिवर्तन के लिए पहले जारीकर्ता आरटीओ से एनओसी की आवश्यकता पड़ती थी। इसके लिए आवेदक को जारीकर्ता आरटीओ कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते थे। एनओसी मिलने के बाद आरटीओ कार्यालय में जमा करना पड़ता था। इस समस्या से अब लोगों को निजात मिलेगी।
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एआरटीओ प्रशासन आरपी सिंह ने बताया कि प्रमुख सचिव अरविंद कुमार की ओर जारी आदेश में डिजिलॉकर और एम परिवहन एप पर उपलब्ध वाहनों के डॉक्युमेंट्स को वैद्य माने जाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने डिजिलॉकर या एम परिवहन मोबाइल एप पर इलेक्ट्रॉनिक फार्म में अपलोड डॉक्टयुमेंट (आरसी, डीएल व अन्य) को मोटरयान अधिनियम के तहत वैध करार दिया है। कहा है कि किसी भी स्थिति में अगर वाहन के कागजों को जब्त करने की जरूरत हो तो डॉक्युमेंट को ई-चालान सिस्टम से जब्त किया जाए। साथ ही इस संबंध में व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार कर लोगों को सुविधा की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।
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यूं जब्त होंगे डॉक्युमेंट
एआरटीओ ने बताया कि अब तक ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों के कागजात जब्त किए जाते हैं। नई व्यवस्था में पुलिस लाइसेंस और अन्य कागजात को डिजी लॉक में जब्त करेगी। ट्रैफिक पुलिस लाइसेंस और अन्य कागजात को स्कैन कर मशीन में लोड कर लेगा और उन्हें लॉक कर देगा। चालान जमा होने के बाद लाइसेंस और अन्य जब्त कागजात अनलॉक हो जाएंगे।
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तो जब्त हो जाएगी गाड़ी
उन्होंने बताया कि डॉक्युमेंट लॉक या अनलॉक हैं या नहीं इसकी जानकारी भी परिवहन विभाग की वेबसाइट या सारथी वाहन पर दिखेगी। वहीं अगर दोबारा पकड़े गए तो चालान मशीन बता देगी कि कौन सा डॉक्युमेंट पहले से लॉक है। इसके बाद डबल चालान होगा। तीसरी बार पकड़े जाने पर लाइसेंस रद्द हो जाएगा और गाड़ी भी जब्त हो सकती है। लोग चालान ऑनलाइन भी जमा कर सकते हैं।
कहीं का भी हो डीएल
यहीं कराएं रिन्यूवल
- नए नियमों के तहत डीएल रिन्यूवल और पता बदलवाने को परिवहन विभाग पहुंचे लोग
बरेली। ड्राइविंग लाइसेंस के रिन्यूवल और पता परिवर्तन के लिए अब लोगों को बेवजह की दौड़भाग नहीं करनी पड़ेगी। बरेली परिवहन विभाग में नए नियमों के तहत डीएल रिन्यूवल और पता परिवर्तन की कार्रवाई शुरू हो गई है। साथ ही अब दो दर्जन से अधिक लोगों ने आवेदन भी कर दिया है। नए नियमों के तहत अन्य जिले या राज्यों में खरीदे वाहन या डीएल के रिन्यूवल के लिए एनओसी की जरूरत नहीं है।
एआरटीओ आरपी सिंह ने बताया कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) के रिन्यूवल और पता परिवर्तन के लिए जारीकर्ता आरटीओ से एनओसी लेने की व्यवस्था समाप्त कर नई व्यवस्था लागू हो गई है। अब ड्राइविंग लाइसेंस कहीं से भी जारी हो सकेगा और स्थानीय कार्यालय पर आवेदन कर नवीनीकरण कराया जा सकेगा। इसमें आवेदक को जारीकर्ता आरटीओ से एनओसी लेने की बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है। अब भले ही आवेदक अपने निवास को बदलकर अन्य राज्य या अन्य जिले में निवास कर रहा हो और यहां पर यदि ड्राइविंग लाइसेंस की वैद्यता समाप्त हो जाती है, तो वह स्थानीय कार्यालय पर आवेदन कर सकता है। साथ ही, ड्राइविंग लाइसेंस पर दर्ज पता बदलवाने के लिए भी स्थानीय आरटीओ के पास आवेदन हो सकता है। इसके लिए पता परिवर्तन से संबंधित दस्तावेज देने होंगे, जिसकी जांच स्थानीय आरटीओ द्वारा की जाएगी। इसमें संतुष्ट हो जाने पर ड्राइविंग लाइसेंस पर दर्ज पते को बदल दिया जाएगा।
यह थी पुरानी नीति
यदि किसी आवेदक का ड्राइविंग लाइसेंस जारी है और वह किसी अन्य जिले में रहने लगा है, ऐसे में पता परिवर्तन के लिए पहले जारीकर्ता आरटीओ से एनओसी की आवश्यकता पड़ती थी। इसके लिए आवेदक को जारीकर्ता आरटीओ कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते थे। एनओसी मिलने के बाद आरटीओ कार्यालय में जमा करना पड़ता था। इस समस्या से अब लोगों को निजात मिलेगी।