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गुलाबी सर्दी में मुनाफे की गर्मी देगी ढींगरी मशरूम की खेती

Tue, 01 Feb 2022 01:06 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 01 Feb 2022 01:06 AM IST
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Dhingri mushroom cultivation will give profit in winter
Enoki mushrooms have been used in Eastern medicine for hundreds of years and are now being studied for their anti-tumor properties. - फोटो : Mary Shattock/Flickr
बरेली। ठंड का मौसम गुजरने को है। गरमी आने से पहले किसान अगर मुनाफा कमाना चाहते हैं तो ढींगरी मशरूम का उत्पादन कर सकते हैं। आईवीआरआई कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से यह सुझाव देने के साथ साफ किया गया है कि ढींगरी मशरूम के उत्पादन में समय और स्थान के साथ लागत भी कम लगती है लेकिन पौष्टिकता भरपूर होती है।
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ढींगरी मशरूम को गुलाबी सर्दी का मशरूम और ओएस्टर मशरूम भी कहते हैं। आईवीआरआई कृषि विज्ञान केंद्र के बागवानी विशेषज्ञ रंजीत सिंह ने एडवाइजरी जारी की है कि जल्द गुलाबी सर्दी शुरू हो जाएगी। इस मौसम में ढींगरी मशरूम की खेती किसानों की अतिरिक्त आय का जरिया बन सकती है। एक बार में करीब दो से तीन महीने तक फसल ली जा सकती है। यह मशरूम उगाने के लिए ज्यादा स्थान की जरूरत भी नहीं होती।
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डॉ. सिंह के मुताबिक ढींगरी मशरूम को भूसा, धान के पुआल जैसे फसल अवशेष पर उगाया जा सकता है। यह दूसरे मशरूम से ज्यादा पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ घातक बीमारियों से भी बचाता है। इसमें विटामिन बी, डी, के, ई के अलावा सेलेनियम और जिंक खनिज तत्व होता है। प्लूरोटिन रसायन कैंसररोधी होता है। पांच फीसदी प्रोटीन होती है जो कुपोषण दूर करती है। कार्बोहाइड्रेट और वसा नहीं होती लिहाजा मधुमेह और उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए भी यह पौष्टिक आहार होता है। रेशे की अधिकता होने से इसे पाचनतंत्र के लिए भी उपयुक्त माना जाता है।
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ऐसे उगा सकते हैं ढींगरी मशरूम : दस किलो भूसे को 12 घंटे भिगोते हैं। फिर भाप से निर्जीविकृत करने के बाद भूसे में मशरूम का बीज मिलाकर थैलियों में पैक कर देते हैं। दूसरा तरीका रसायन से शोधन विधि है। इसमें दस किलो भूसे को 90 लीटर पानी में 18 घंटे तक भिगोते हैं। प्रति दस लीटर पानी में 7.5 ग्राम कार्बेडाजिम 125 मिली फॉर्मलीन घोल भी मिलाते हैं। 18 घंटे बाद भूसा बाहर निकालकर पानी छान लेते हैं। फिर स्पान (बीज) मिलाते हैं। भूसे को पॉलीथिन के थैले में भरकर अंधेरे कमरे में रखते हैं। थैलियों में छेद बना देते हैं। कमरे का तापमान 20 से 30 डिग्री सेंटिग्रेड और नमी 75 से 85 फीसदी के बीच रखते हैं।

एक थैले से मिलेगा पांच किलो तक मशरूम : डॉ. सिंह के मुताबिक रसायन शोधन विधि से दो सप्ताह में कवकजाल पूरी तरह फैल जाता है और उसमें मशरूम निकलने लगता है। उप्तादित मशरूम को तोड़कर, धोकर इसका सेवन करने के साथ पैक कर बेचा जा सकता है। एक थैले से करीब पांच किलो तक मशरूम मिलता है। इस तरह दस क्विंटल भूसे में करीब दो माह तक खेती से करीब 40 हजार रुपये तक मुनाफा मिलेगा। कृषि विज्ञान केंद्र से कई किसान ढींगरी मशरूम के उत्पादन का प्रशिक्षण भी प्राप्त कर चुके हैं। प्रशिक्षण लेने के लिए कृषि विज्ञान से संपर्क किया जा सकता है।
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