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सांसद निधि नहीं खर्च कर पा रहे धर्मेंद्र कश्यप
बरेली।
Updated Sun, 14 May 2017 01:37 AM IST
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Dharmendra Kashyap can not spend MP funds
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
भाजपा के सांसद हर साल मिलने वाली सांसद निधि ही समय पर खर्च नहीं कर पा रहे। लेटलतीफी से सांसदों के काम के उपभोग प्रमाण पत्र समय से नहीं पहुंच रहे। इससे सांसद निधि का बजट छह महीने से लेकर एक साल तक देरी से मिल रहा है। तीन साल की भाजपा सरकार में बरेली और आंवला के दोनों सांसदों ने आदर्श सांसद योजना के तहत अपने गोद लिए गांवों को सांसद निधि से बजट ही नहीं दिया। अन्य मदों से भी इन गांवों को बजट नहीं मिला।
सांसद निधि में प्रत्येक सांसद को हर साल पांच करोड़ रुपये दो किस्तों में मिलते हैं। दूसरी किस्त तब जारी होती है जब पहली किस्त के बजट का उपभोग प्रमाण पत्र पहुंच जाए। आंवला से भाजपा सांसद धर्मेंद्र कश्यप को 2016-17 में सांसद निधि का बजट एक साल बाद भी नहीं मिला क्योंकि डीआरडीए की ओर से पुरानी सांसद निधि का उपभोग प्रमाण पत्र ही नहीं भेजा गया। धर्मेंद्र कश्यप की 2015-16 की सांसद निधि में आधा बजट ही खर्च हो पाया। आधे बजट का उपभोग प्रमाण पत्र देरी से भेजने की वजह से 2015-16 की सांसद निधि की दूसरी 2.5 करोड़ की किस्त वर्ष 2017-18 में मिली है। मतलब, 2016-17 में सांसद निधि के पांच करोड़ रुपये मिलने अभी बाकी हैं। सांसद निधि का बजट बरेली और बदायूं के डीआरडीए (जिला ग्राम्य विकास अभिकरण) में आता है क्योंकि उनके संसदीय क्षेत्र का कुछ हिस्सा पड़ोसी जिले में है।
डीआरडीए ने हमारे काम के प्रस्ताव की फाइलें लटका दीं। इस वजह से सांसद निधि मिलने में देरी हो रही है। बदायूं डीआरडीए से काम के प्रस्ताव देर से स्वीकृत हुए। अब प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी है। डीआरडीए में फाइल लटकाने के दोषी कर्मचारी अफसरों पर कार्रवाई कराएंगे। सांसद निधि से गोद लिए हुए गांव में काम कराए जाएंगे। धर्मेंद्र कश्यप, सांसद आंवला
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सांसद निधि में प्रत्येक सांसद को हर साल पांच करोड़ रुपये दो किस्तों में मिलते हैं। दूसरी किस्त तब जारी होती है जब पहली किस्त के बजट का उपभोग प्रमाण पत्र पहुंच जाए। आंवला से भाजपा सांसद धर्मेंद्र कश्यप को 2016-17 में सांसद निधि का बजट एक साल बाद भी नहीं मिला क्योंकि डीआरडीए की ओर से पुरानी सांसद निधि का उपभोग प्रमाण पत्र ही नहीं भेजा गया। धर्मेंद्र कश्यप की 2015-16 की सांसद निधि में आधा बजट ही खर्च हो पाया। आधे बजट का उपभोग प्रमाण पत्र देरी से भेजने की वजह से 2015-16 की सांसद निधि की दूसरी 2.5 करोड़ की किस्त वर्ष 2017-18 में मिली है। मतलब, 2016-17 में सांसद निधि के पांच करोड़ रुपये मिलने अभी बाकी हैं। सांसद निधि का बजट बरेली और बदायूं के डीआरडीए (जिला ग्राम्य विकास अभिकरण) में आता है क्योंकि उनके संसदीय क्षेत्र का कुछ हिस्सा पड़ोसी जिले में है।
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डीआरडीए ने हमारे काम के प्रस्ताव की फाइलें लटका दीं। इस वजह से सांसद निधि मिलने में देरी हो रही है। बदायूं डीआरडीए से काम के प्रस्ताव देर से स्वीकृत हुए। अब प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी है। डीआरडीए में फाइल लटकाने के दोषी कर्मचारी अफसरों पर कार्रवाई कराएंगे। सांसद निधि से गोद लिए हुए गांव में काम कराए जाएंगे। धर्मेंद्र कश्यप, सांसद आंवला
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