फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Devendra was the right hand man of dacoit Kallu, he was named Fauji because of his hair style.

Bareilly News: डकैत कल्लू का दायां हाथ था देवेंद्र, बालों के स्टाइल से नाम पड़ा था फौजी

Mon, 01 Apr 2024 02:28 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 01 Apr 2024 02:28 AM IST
विज्ञापन
Devendra was the right hand man of dacoit Kallu, he was named Fauji because of his hair style.
बरेली। कटरी में आतंक का पर्याय रहे कल्लू डकैत के साथी देवेंद्र फौजी को अब फांसी की सजा सुनाई गई है। देवेंद्र कल्लू का सर्वाधिक विश्वस्त साथी था। कल्लू की मौत के बाद देवेंद्र ने कुछ समय तक गिरोह की कमान भी संभाली थी। जिस मामा नज्जू ने उसे डकैत बनाया, उसी ने जान बचाने के लिए देवेंद्र को आत्मसमर्पण का रास्ता भी दिखाया।
विज्ञापन

वर्ष 2005 से पहले तक कटरी (बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर में गंगा-रामगंगा किनारे का इलाका) में दस्यु सरगना कल्लू यादव का आतंक था। शाहजहांपुर के परौर इलाके का रहने वाला कल्लू जिस गिरोह का बेताज बादशाह था, उसकी नींव नज्जू ने रखी थी। बाद में नज्जू ने कल्लू के नेतृत्व को स्वीकार कर उसका सहयोगी बन गया था। नज्जू का भांजा देवेंद्र पीलीभीत के थाना बीसलपुर के गांव परनिया का निवासी था।
विज्ञापन

कल्लू का एनकाउंटर करने वाले और देवेंद्र से मोर्चा ले चुके तत्कालीन इज्जतनगर थाना प्रभारी विजय राणा अब कासगंज के पटियाली में सीओ हैं। विजय राणा बताते हैं कि देवेंद्र का चाचा तब परनिया गांव का प्रधान था। बचपन से ही देवेंद्र अपने मामा नज्जू के घर पला-बढ़ा था। यही वजह रही जो नज्जू ने युवा भांजे को कल्लू से मिलाकर अपराध की दुनिया में उतार दिया। देवेंद्र के छोटे बाल, मजबूत कद-काठी और धाकड़ स्टाइल को देखकर पहले कल्लू ने ही उसे फौजी कहना शुरू किया, बाद में पूरा गिरोह उसे देवेंद्र फौजी कहने लगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

----

देवेंद्र के सीने में कई राज, न हथियार मिले न फार्मर
कल्लू के एनकाउंटर के बाद तीन जिलों की पुलिस ने कटरी खंगाली थी पर गिरोह के पास मौजूद हथियारों का जखीरा आखिर तक नहीं मिल सका था। इनमें से कई हथियार तो पुलिस से ही छीने गए थे। अगवा किए हरियाणा के तीनों फार्मरों को भी पुलिस नहीं तलाश सकी। बताया गया कि गिरोह ने उन्हें मार दिया है पर उनके शव भी नहीं मिल सके। देवेंद्र फौजी साल भर तक बचे-खुचे गिरोह का नेतृत्व करता रहा पर बाद में उसने भी आत्मसमर्पण कर दिया। देवेंद्र को रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई पर उसके सीने में दबे राज कभी बाहर नहीं आ सके।


सबसे युवा और खूंखार था देवेंद्र : विजय राणा
फोटो- विजय राणा

पटियाली सीओ विजय राणा के मुताबिक तब कल्लू, नज्जू व गिरोह के अन्य बदमाशों की अपेक्षा देवेंद्र की उम्र काफी कम थी। गिरोह में जल्दी ही उसने नंबर दो की हैसियत बना ली थी। उसे गिरोह में शाॅर्प शूटर के तौर पर जाना जाता था। पुलिस से मोर्चे के दौरान वही सबसे आक्रामक तेवर दिखाता था। पुलिस अधिकारियों के बीच यह भी हैरत की बात रही कि देवेंद्र कभी सीधे तौर पर सामने नहीं आता था। जब गिरोह घिरता था तो देवेंद्र खुद के साथ दूसरे साथियों को लेकर निकल भागता था। विजय राणा बताते हैं कि 15 जनवरी 2006 को जब फतेहगंज पूर्वी की कटरी में कल्लू को मुठभेड़ में मारा गया तो देवेंद्र नदी के उस पार से फायरिंग कर रहा था। कल्लू की बंदूक के शांत होते ही देवेंद्र भाग गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed