{"_id":"5e2b36798ebc3e4ad9296fe4","slug":"developement-bareilly-news-bly393297050","type":"story","status":"publish","title_hn":"नकटिया नदी प्रकरण- सरकारी जांच में उलझ गई किसानों की जमीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नकटिया नदी प्रकरण- सरकारी जांच में उलझ गई किसानों की जमीन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किसानों ने खेतों की खुदाई कर नदी का रुख बदलने की अधिकारियों से की थी शिकायत
बरेली। डोहरा रोड पर नकटिया नदी के पुल के पास कई किसानों के खेतों की खुदाई कर नदी का रुख ही मोड़ने के मामले राजस्व टीम ने तहसीलदार सदर को जांच रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें टीम ने यह माना है कि किसानों के खेतों का रकबा सात से आठ मीटर तक कम हुआ है, लेकिन रकबा नदी की धार से कम हुआ या अतिक्रमण से, ये स्पष्ट नहीं हो पा सका है। तहसील प्रशासन का कहना है कि इसके लिए एक विकल्प तूदाबंदी ही है। इधर सरकारी जांच में किसानों की जमीन का मामला उलझ गया है।
हाल में यूनिवर्सिटी के पास पिछले महीने बाढ़ खंड ने नकटिया नदी की सफाई कराई थी। कई किसानों ने एसडीएम सदर ईशान प्रताप सिंह से यह शिकायत की थी कि उनके खेतों की खुदाई करके नदी के प्रवाह की दिशा बदल दी गई है। तहसीलदार आशुतोष गुप्ता ने राजस्व निरीक्षक और लेखपालों की छह सदस्यीय टीम से इस प्रकरण की जांच कराई। खेतों की पैमाइश करने के बाद टीम ने रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि पूर्व में चकबंदी विभाग ने नदी का जो नक्शा तैयार किया है, उसमें कई जगह चौड़ाई अधिक दिखाई गई है। इसके नक्शे में खामी प्रतीत हो रही है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि किसानों के खेतों का रकबा सात से आठ मीटर कम मिला है, लेकिन यह नदी की धारा की ओर ही था, यह स्पष्ट नहीं है। अब तहसील प्रशासन कह रहा है कि किसानों की जमीन का चिह्नित करने के लिए तूदाबंदी कराई जरूरी है। इधर किसानों का कहना है कि वह दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनकी जमीन वापस नहीं मिल पा रही है।
इस मामले की रिपोर्ट मिल गई है। किसानों की जमीन कम मिली है लेकिन उसे चिह्नित करने के लिए तूदाबंदी कराने की जरूरत है। -आशुतोष गुप्ता, तहसीलदार सदर
विज्ञापन
बरेली। डोहरा रोड पर नकटिया नदी के पुल के पास कई किसानों के खेतों की खुदाई कर नदी का रुख ही मोड़ने के मामले राजस्व टीम ने तहसीलदार सदर को जांच रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें टीम ने यह माना है कि किसानों के खेतों का रकबा सात से आठ मीटर तक कम हुआ है, लेकिन रकबा नदी की धार से कम हुआ या अतिक्रमण से, ये स्पष्ट नहीं हो पा सका है। तहसील प्रशासन का कहना है कि इसके लिए एक विकल्प तूदाबंदी ही है। इधर सरकारी जांच में किसानों की जमीन का मामला उलझ गया है।
हाल में यूनिवर्सिटी के पास पिछले महीने बाढ़ खंड ने नकटिया नदी की सफाई कराई थी। कई किसानों ने एसडीएम सदर ईशान प्रताप सिंह से यह शिकायत की थी कि उनके खेतों की खुदाई करके नदी के प्रवाह की दिशा बदल दी गई है। तहसीलदार आशुतोष गुप्ता ने राजस्व निरीक्षक और लेखपालों की छह सदस्यीय टीम से इस प्रकरण की जांच कराई। खेतों की पैमाइश करने के बाद टीम ने रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि पूर्व में चकबंदी विभाग ने नदी का जो नक्शा तैयार किया है, उसमें कई जगह चौड़ाई अधिक दिखाई गई है। इसके नक्शे में खामी प्रतीत हो रही है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि किसानों के खेतों का रकबा सात से आठ मीटर कम मिला है, लेकिन यह नदी की धारा की ओर ही था, यह स्पष्ट नहीं है। अब तहसील प्रशासन कह रहा है कि किसानों की जमीन का चिह्नित करने के लिए तूदाबंदी कराई जरूरी है। इधर किसानों का कहना है कि वह दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनकी जमीन वापस नहीं मिल पा रही है।
विज्ञापन
इस मामले की रिपोर्ट मिल गई है। किसानों की जमीन कम मिली है लेकिन उसे चिह्नित करने के लिए तूदाबंदी कराने की जरूरत है। -आशुतोष गुप्ता, तहसीलदार सदर