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बरेली-सितारगंज हाईवे- दरक रहे हाईवे की मरम्मत के नाम पर दो करोड़ खपाने की तैयारी
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एनएचएआई के सर्वे में के मुताबिक, हाईवे दुरुस्त करने के लिए चाहिए करीब ढाई अरब
बरेली। बरेली-सीतापुर फोरलेन की तरह बरेली-सितारगंज वाया पीलीभीत टूलेन हाईवे भी लगातार दरक रहा है। कई जगहों पर पुलिया क्षतिग्रस्त होने के साथ जानलेवा गड्ढे हो गए हैं। इसके लिए करीब ढाई अरब के बजट की जरूरत है, लेकिन एनएचएआई ने रोेड मरम्मत के लिए केवल दो करोड़ का ठेका एक कंपनी को दिया है। जाहिर है कि रोड को सुधारने के नाम पर लीपापोती की जाएगी। एनएचएआई अफसरों का कहना है कि मेन काम के लिए सर्वे हो रहा है। जल्द ही इसके टेंडर कराए जाएंगे।
बरेली से पीलीभीत होते हुए उत्तराखंड के सितारगंज तक करीब 74 किलोमीटर हाईवे के चौड़ीकरण का कांट्रेक्ट वीआईएल नाम की कंपनी को वर्ष 2013 में दिया गया था। करीब तीन अरब की लागत से ये प्रोजेक्ट वर्ष 2016 में ही पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन कंपनी ने सालभर पहले ही इस काम को आधा-अधूरा छोड़ दिया। एनएचएआई कंपनी का कांट्रेक्ट भी टर्मिनेट कर चुकी है। इसके बाद से इस हाईवे की हालत और भी ज्यादा खराब हो गई। रोड पर आए दिन बड़े एक्सीडेंट भी हो रहे हैं। एनएचएआई ने अधूरे पडे़ इस प्रोजेक्ट का सर्वे कराया था। इसके लिए करीब ढाई अरब के बजट की जरूरत बताई गई। इधर एनएचएआई ने ब्रेवियर नाम की कंपनी को लगभग दो करोड़ का ठेका दिया है। इस रकम से गड्ढे भरने और ब्लैक स्पॉट पर रोड सेफ्टी के काम भी कराने हैं। जबकि बरेली से पीलीभीत के बीच कई जगहों पर कई किलोमीटर तक रोड उधड़ चुकी है। इतने कम बजट में हाईवे कितना सही हो पाएगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
‘इस हाईवे के लिए दो करोड़ का ठेका एक कंपनी को दिया गया है। हालांकि यह बजट काफी कम है, फिर भी कोशिश की जाएगी कि जिन जगहों पर ज्यादा खतरा है, वहां गड्ढे भरवाकर सड़क सुरक्षा के काम भी हो जाएं।’
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- अमित प्रकाश, पीडी, एनएचएआई
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बरेली। बरेली-सीतापुर फोरलेन की तरह बरेली-सितारगंज वाया पीलीभीत टूलेन हाईवे भी लगातार दरक रहा है। कई जगहों पर पुलिया क्षतिग्रस्त होने के साथ जानलेवा गड्ढे हो गए हैं। इसके लिए करीब ढाई अरब के बजट की जरूरत है, लेकिन एनएचएआई ने रोेड मरम्मत के लिए केवल दो करोड़ का ठेका एक कंपनी को दिया है। जाहिर है कि रोड को सुधारने के नाम पर लीपापोती की जाएगी। एनएचएआई अफसरों का कहना है कि मेन काम के लिए सर्वे हो रहा है। जल्द ही इसके टेंडर कराए जाएंगे।
बरेली से पीलीभीत होते हुए उत्तराखंड के सितारगंज तक करीब 74 किलोमीटर हाईवे के चौड़ीकरण का कांट्रेक्ट वीआईएल नाम की कंपनी को वर्ष 2013 में दिया गया था। करीब तीन अरब की लागत से ये प्रोजेक्ट वर्ष 2016 में ही पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन कंपनी ने सालभर पहले ही इस काम को आधा-अधूरा छोड़ दिया। एनएचएआई कंपनी का कांट्रेक्ट भी टर्मिनेट कर चुकी है। इसके बाद से इस हाईवे की हालत और भी ज्यादा खराब हो गई। रोड पर आए दिन बड़े एक्सीडेंट भी हो रहे हैं। एनएचएआई ने अधूरे पडे़ इस प्रोजेक्ट का सर्वे कराया था। इसके लिए करीब ढाई अरब के बजट की जरूरत बताई गई। इधर एनएचएआई ने ब्रेवियर नाम की कंपनी को लगभग दो करोड़ का ठेका दिया है। इस रकम से गड्ढे भरने और ब्लैक स्पॉट पर रोड सेफ्टी के काम भी कराने हैं। जबकि बरेली से पीलीभीत के बीच कई जगहों पर कई किलोमीटर तक रोड उधड़ चुकी है। इतने कम बजट में हाईवे कितना सही हो पाएगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
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‘इस हाईवे के लिए दो करोड़ का ठेका एक कंपनी को दिया गया है। हालांकि यह बजट काफी कम है, फिर भी कोशिश की जाएगी कि जिन जगहों पर ज्यादा खतरा है, वहां गड्ढे भरवाकर सड़क सुरक्षा के काम भी हो जाएं।’
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- अमित प्रकाश, पीडी, एनएचएआई