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तुलसी के पास दीपक जलाने से आती है समृद्धि
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बरेली। कार्तिक के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा अर्थात देव दीपावली मंगलवार को है। इस दिन पूर्णिमा होने से इस इसका महत्व हजारों गुना बढ़ गया है। वर्ष में 12 पूर्णिमा आती है। जिनमें आषाढ़ पूर्णिमा, अश्विन पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा मुख्य हैं। आषाढ़ पूर्णिमा भक्ति है, सावन पूर्णिमा प्रेम है, आश्विन पूर्णिमा समर्पण और कार्तिक पूर्णिमा त्याग है। भागवत आचार्य पंडित राजेंद्र तिवारी कहते हैं कि कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा नदी या तुलसी के पास दीप जलाने से लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं। जिससे घर में सुख समृद्धि आती है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी कार्तिक पूर्णिमा पर भगवान शिव ने अत्याचारी त्रिपुरासुर का वध किया था। देवताओं ने दीप जलाकर के भगवान शंकर का स्वागत किया। इसीलिए इसे देव दीपावली कहते हैं। इस दिन सूर्योदय के बाद किसी पवित्र नदी में या तीर्थ में स्नान करने से समस्त पाप दूर हो जाते हैं। स्कंद पुराण में वर्णन आता है जो व्यक्ति कार्तिक पूर्णिमा के दिन किसी तीर्थ में स्नान कर लेता है उसे 100 अश्वमेघ यज्ञ का फल प्राप्त हो जाता है। किसी पवित्र जलाशय में स्नान करने से अनेक तीर्थों का पुण्य प्राप्त हो जाता है। ऐसे करें गंगा स्नान सूर्योदय से पहले किसी जलाशय या तीर्थ के समीप जाकर कुछ समय मां गंगा का स्मरण करें तथा सूर्य उदय होने तक मां गंगा का ध्यान करें। सूर्योदय होने के पश्चात सर्वप्रथम शरीर में उबटन लगाएं और आचमन करके थोड़ा सा गंगाजल अपने सर में रखें। स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य दें और ब्राह्मणों को श्रद्धा सुमन और दान करना चाहिए। इस दिन सभी देवी देवता गंगा तट पर विराजमान रहते हैं।
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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी कार्तिक पूर्णिमा पर भगवान शिव ने अत्याचारी त्रिपुरासुर का वध किया था। देवताओं ने दीप जलाकर के भगवान शंकर का स्वागत किया। इसीलिए इसे देव दीपावली कहते हैं। इस दिन सूर्योदय के बाद किसी पवित्र नदी में या तीर्थ में स्नान करने से समस्त पाप दूर हो जाते हैं। स्कंद पुराण में वर्णन आता है जो व्यक्ति कार्तिक पूर्णिमा के दिन किसी तीर्थ में स्नान कर लेता है उसे 100 अश्वमेघ यज्ञ का फल प्राप्त हो जाता है। किसी पवित्र जलाशय में स्नान करने से अनेक तीर्थों का पुण्य प्राप्त हो जाता है। ऐसे करें गंगा स्नान सूर्योदय से पहले किसी जलाशय या तीर्थ के समीप जाकर कुछ समय मां गंगा का स्मरण करें तथा सूर्य उदय होने तक मां गंगा का ध्यान करें। सूर्योदय होने के पश्चात सर्वप्रथम शरीर में उबटन लगाएं और आचमन करके थोड़ा सा गंगाजल अपने सर में रखें। स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य दें और ब्राह्मणों को श्रद्धा सुमन और दान करना चाहिए। इस दिन सभी देवी देवता गंगा तट पर विराजमान रहते हैं।
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