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Bareilly News: उपायुक्त का जिला सहकारी बैंक से टूटा भरोसा, एफडी के निकाले 32.13 करोड़
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उप गन्ना आयुक्त ने कहा-अन्य बैंक भले ही ब्याज कम दे, पर समितियों का पैसा सुरक्षित रहेगा
बरेली। जिला सहकारी बैंक में धन की सुरक्षा पर उप गन्ना आयुक्त राजेश मिश्र को भरोसा नहीं है। जिले की सहकारी बैंक की शाखाओं में एफडी के तौर पर जमा 57.84 करोड़ रुपये में से अब तक 32.13 करोड़ रुपये खातों से निकाल लिए हैं। अब वह दूसरी बैंक में रुपये जमाकर एफडी (फिक्स डिपॉजिट-सावधि जमा) करा रहे हैं। परेशान जिला सहकारी बैंक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने उप्र कोऑपरेटिव बैंक के प्रबंध निदेशक से से कहा है कि यदि उप गन्ना आयुक्त के निर्देशों में संशोधन नहीं होता है तो बैंक में विनियोजित (एफडी) धनराशि के आहरण की प्रबल संभावना है और ऐसे में बैंक पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। किसानों को ऋण देना मुश्किल हो सकता है।
मंडल के चारों जिलों में 16 सहकारी गन्ना विकास समितियां और 17 गन्ना विकास परिषद हैं। सहकारी बैंक में इनके एफडी के 10 खाते हैं। इनमें कुल 57.84 करोड़ रुपये बतौर एफडी जमा थे। इसमें 32.13 करोड़ रुपये निकाल कर दूसरी बैंक में एफडी करा ली गई है। पिछले शुक्रवार को भी एफडी तोड़कर 6.50 करोड़ रुपये निकाले गए। यह सब उप गन्ना आयुक्त के सात जुलाई के पत्र के आधार पर हो रहा है। पत्र में उपायुक्त ने कहा है कि मंडलीय फंड निवेश समिति की बैठक में तय हुआ है कि सुरक्षा को देखते हुए संस्थाओं के धन को जिला सहकारी बैंक में विनियोजित न करके अधिकतम ब्याज दर देने वाले बैंकों में गन्ना समितियां और गन्ना विकास परिषद सरप्लस फंड निवेश करेंगी। हालांकि, सहकारी बैंक तीन करोड़ से अधिक धनराशि की एफडी पर 7.51 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दे रहा है, जबकि अन्य कोई भी बैंक इतना ब्याज नहीं दे रहा है। उधर, 25 सितंबर 2023 को गन्ना आयुक्त प्रभु एन. सिंह की तरफ से भी सहकारी गन्ना समितियों के बैंक खातों के रख-रखाव के संबंध में राष्ट्रीयकृत कॉमर्शियल बैंकों के साथ जिला सहकारी बैंक को भी शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। संवाद
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कब बंद हो जाएं...सहकारी बैंकों का कोई भरोसा नहीं
उप गन्ना आयुक्त राजेश मिश्र का कहना है कि लखीमपुर खीरी, गोंडा, बस्ती व हरदोई में जिला सहकारी बैंक की शाखाएं बंद हो गई हैं। बस्ती जिले की सहकारी बैंक की एक शाखा में गन्ना सोसाइटी का 27 लाख रुपये था। यह बैंक शाखा बंद हो गई, इसलिए इन बैंक शाखाओं का कोई भरोसा नहीं है कि यह कब बंद हो जाएं। उन्होंने बताया कि मुख्यालय से ही कहा गया है कि सहकारी बैंकों में एफडी न रखिए, खाता भी बंद कर दीजिए, लेकिन सहकारी बैंक में खाता रखना इसलिए मजबूरी है, क्योंकि किसानों को खाद-बीज के लिए नाबार्ड से मिलने वाला ऋण सहकारी बैंक के माध्यम से मिलता है। उप गन्ना आयुक्त ने कहा कि राष्ट्रीयकृत बैंक में भले ब्याज कम हो पर गन्ना समितियों का पैसा सुरक्षित तो है।
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गन्ना आयुक्त के स्पष्ट निर्देश हैं कि जो बैंक सबसे अधिक ब्याज दे, उसके यहां गन्ना समितियों और विकास परिषद धनराशि जमाकर एफडी कराएंगी। इसके बाद भी उप गन्ना आयुक्त ने सहकारी बैंक से एफडी तुड़वाने का आदेश जारी कर दिया है। जबकि, सहकारी बैंक सर्वाधिक ब्याज दे रही है। - सर्वेंद्र सिंह चौहान, उप महाप्रबंधक-जिला सहकारी बैंक
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बरेली। जिला सहकारी बैंक में धन की सुरक्षा पर उप गन्ना आयुक्त राजेश मिश्र को भरोसा नहीं है। जिले की सहकारी बैंक की शाखाओं में एफडी के तौर पर जमा 57.84 करोड़ रुपये में से अब तक 32.13 करोड़ रुपये खातों से निकाल लिए हैं। अब वह दूसरी बैंक में रुपये जमाकर एफडी (फिक्स डिपॉजिट-सावधि जमा) करा रहे हैं। परेशान जिला सहकारी बैंक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने उप्र कोऑपरेटिव बैंक के प्रबंध निदेशक से से कहा है कि यदि उप गन्ना आयुक्त के निर्देशों में संशोधन नहीं होता है तो बैंक में विनियोजित (एफडी) धनराशि के आहरण की प्रबल संभावना है और ऐसे में बैंक पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। किसानों को ऋण देना मुश्किल हो सकता है।
मंडल के चारों जिलों में 16 सहकारी गन्ना विकास समितियां और 17 गन्ना विकास परिषद हैं। सहकारी बैंक में इनके एफडी के 10 खाते हैं। इनमें कुल 57.84 करोड़ रुपये बतौर एफडी जमा थे। इसमें 32.13 करोड़ रुपये निकाल कर दूसरी बैंक में एफडी करा ली गई है। पिछले शुक्रवार को भी एफडी तोड़कर 6.50 करोड़ रुपये निकाले गए। यह सब उप गन्ना आयुक्त के सात जुलाई के पत्र के आधार पर हो रहा है। पत्र में उपायुक्त ने कहा है कि मंडलीय फंड निवेश समिति की बैठक में तय हुआ है कि सुरक्षा को देखते हुए संस्थाओं के धन को जिला सहकारी बैंक में विनियोजित न करके अधिकतम ब्याज दर देने वाले बैंकों में गन्ना समितियां और गन्ना विकास परिषद सरप्लस फंड निवेश करेंगी। हालांकि, सहकारी बैंक तीन करोड़ से अधिक धनराशि की एफडी पर 7.51 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दे रहा है, जबकि अन्य कोई भी बैंक इतना ब्याज नहीं दे रहा है। उधर, 25 सितंबर 2023 को गन्ना आयुक्त प्रभु एन. सिंह की तरफ से भी सहकारी गन्ना समितियों के बैंक खातों के रख-रखाव के संबंध में राष्ट्रीयकृत कॉमर्शियल बैंकों के साथ जिला सहकारी बैंक को भी शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। संवाद
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कब बंद हो जाएं...सहकारी बैंकों का कोई भरोसा नहीं
उप गन्ना आयुक्त राजेश मिश्र का कहना है कि लखीमपुर खीरी, गोंडा, बस्ती व हरदोई में जिला सहकारी बैंक की शाखाएं बंद हो गई हैं। बस्ती जिले की सहकारी बैंक की एक शाखा में गन्ना सोसाइटी का 27 लाख रुपये था। यह बैंक शाखा बंद हो गई, इसलिए इन बैंक शाखाओं का कोई भरोसा नहीं है कि यह कब बंद हो जाएं। उन्होंने बताया कि मुख्यालय से ही कहा गया है कि सहकारी बैंकों में एफडी न रखिए, खाता भी बंद कर दीजिए, लेकिन सहकारी बैंक में खाता रखना इसलिए मजबूरी है, क्योंकि किसानों को खाद-बीज के लिए नाबार्ड से मिलने वाला ऋण सहकारी बैंक के माध्यम से मिलता है। उप गन्ना आयुक्त ने कहा कि राष्ट्रीयकृत बैंक में भले ब्याज कम हो पर गन्ना समितियों का पैसा सुरक्षित तो है।
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गन्ना आयुक्त के स्पष्ट निर्देश हैं कि जो बैंक सबसे अधिक ब्याज दे, उसके यहां गन्ना समितियों और विकास परिषद धनराशि जमाकर एफडी कराएंगी। इसके बाद भी उप गन्ना आयुक्त ने सहकारी बैंक से एफडी तुड़वाने का आदेश जारी कर दिया है। जबकि, सहकारी बैंक सर्वाधिक ब्याज दे रही है। - सर्वेंद्र सिंह चौहान, उप महाप्रबंधक-जिला सहकारी बैंक