{"_id":"615372588ebc3e0de65e3687","slug":"delay-in-compensation-to-rape-victim-girl-bareilly-news-bly4611920150","type":"story","status":"publish","title_hn":"रेप पीडिता को मुआवजा न मिलने पर डीएम, प्रोबेशन अधिकारी व विधक सेवा के सचिव कोर्ट में तलब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रेप पीडिता को मुआवजा न मिलने पर डीएम, प्रोबेशन अधिकारी व विधक सेवा के सचिव कोर्ट में तलब
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। तीन साल की मासूम से दुष्कर्म के मामले में अदालत के आदेश के छह महीने बाद भी पीड़ित परिवार को मुआवजा नहीं मिला। मासूम की मां कई बार डीएम और डीपीओ से मिली लेकिन फिर भी कोई राहत नहीं मिली। अदालत ने इसे दुखद होने के साथ विधायिका की मंशा और लैंगिक अपराधों के लिए बने कानून के खिलाफ बताते हुए डीएम, डीपीओ और जिला विधिक सेवा के सचिव को स्पष्टीकरण देने को कहा है।
मासूम से दुष्कर्म की घटना फतेहगंज पूर्वी इलाके की थी जिसमें अदालत ने 20 मार्च को अभियुक्त ज्वाला प्रसाद उर्फ ग्वाला प्रसाद को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, इसके साथ उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था। अदालत ने अपने फैसले में पीड़ित मासूम के पुनर्वास के लिए प्रतिकर दिलाने का भी आदेश दिया था, लेकिन छह महीने बाद भी इसका पालन नहीं हुआ। पीड़ित बच्ची की मां कई बार डीएम और जिला प्रोबेशन अधिकारी से भी मिली लेकिन उसे कोई सांत्वनापूर्ण जवाब तक नहीं मिला।
बच्ची की मां की ओर से 28 सितंबर को अदालत में अर्जी दी गई जिसमें कहा गया कि वह डीएम और डीपीओ के दफ्तरों के कई चक्कर काट चुकी है, फिर भी उसे कोई जवाब तक नहीं दिया गया। अदालत ने इस अर्जी पर प्रकीर्ण वाद दर्ज किया। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट अनिल सेठ ने डीएम, जिला प्रोबेशन अधिकारी और जिला विधिक सेवा के सचिव को चार अक्तूबर को अदालत मेें स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
यह अत्यंत आपत्तिजनक...
यह बहुत ही दुखद और संवेदनशील प्रकरण है कि अदालत के आदेश के छह महीने बाद भी पीड़िता को प्रतिकर नहीं मिला। पीड़िता की मां कई बार डीएम और जिला प्रोबेशन अधिकारी से मिली लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली। डीएम के साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने भी कोई कार्रवाई नहीं की। यह अदालत के आदेश का अनुपालन न कराए जाने से संबधित होने के साथ विधायिका की मंशा और लैंगिक अपराधों के लिए बनाए गए कानून के भी खिलाफ है और अत्यंत आपत्तिजनक है। - पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश अनिल सेठ अपने आदेश में
विज्ञापन
मासूम से दुष्कर्म की घटना फतेहगंज पूर्वी इलाके की थी जिसमें अदालत ने 20 मार्च को अभियुक्त ज्वाला प्रसाद उर्फ ग्वाला प्रसाद को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, इसके साथ उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था। अदालत ने अपने फैसले में पीड़ित मासूम के पुनर्वास के लिए प्रतिकर दिलाने का भी आदेश दिया था, लेकिन छह महीने बाद भी इसका पालन नहीं हुआ। पीड़ित बच्ची की मां कई बार डीएम और जिला प्रोबेशन अधिकारी से भी मिली लेकिन उसे कोई सांत्वनापूर्ण जवाब तक नहीं मिला।
विज्ञापन
बच्ची की मां की ओर से 28 सितंबर को अदालत में अर्जी दी गई जिसमें कहा गया कि वह डीएम और डीपीओ के दफ्तरों के कई चक्कर काट चुकी है, फिर भी उसे कोई जवाब तक नहीं दिया गया। अदालत ने इस अर्जी पर प्रकीर्ण वाद दर्ज किया। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट अनिल सेठ ने डीएम, जिला प्रोबेशन अधिकारी और जिला विधिक सेवा के सचिव को चार अक्तूबर को अदालत मेें स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
यह अत्यंत आपत्तिजनक...
यह बहुत ही दुखद और संवेदनशील प्रकरण है कि अदालत के आदेश के छह महीने बाद भी पीड़िता को प्रतिकर नहीं मिला। पीड़िता की मां कई बार डीएम और जिला प्रोबेशन अधिकारी से मिली लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली। डीएम के साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने भी कोई कार्रवाई नहीं की। यह अदालत के आदेश का अनुपालन न कराए जाने से संबधित होने के साथ विधायिका की मंशा और लैंगिक अपराधों के लिए बनाए गए कानून के भी खिलाफ है और अत्यंत आपत्तिजनक है। - पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश अनिल सेठ अपने आदेश में