फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   death

बच्चों की मौत पर भी अफसर गंभीर नहीं

Mon, 02 Feb 2015 01:50 AM IST
बरेली
बरेली Updated Mon, 02 Feb 2015 01:50 AM IST
विज्ञापन
हिंसक आवारा कुत्तों एक के बाद एक बच्चों की जान लेने पर भी अफसरों का टालमटोल का खेल चल रहा है। जवाबदेही से बचने के लिए एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाली जा रही है। एसडीएम का कहना है कि उन्होंने एडीएम को जानकारी दे दी है, वह डीएफओ के साथ यहां दौरा करेंगे। उधर, वन विभाग की टीम ने गांवों में कांबिग तो की है लेकिन न आदमखोर कुत्तों को पकड़ने के लिए कुछ किया जा रहा है न मारने के लिए।
विज्ञापन

कुछ ही दिनों में हिंसक कुत्तों के चार बच्चों की जान ले लेने और उसके बाद भी प्रशासन के कुछ भी ठोस कार्रवाई न करने से शहर से लेकर गांवों तक लोग दहशत में हैं। वन विभाग के डिप्टी रेंजर गोविंद राम कहते हैं कि विभाग की चार टीमें कुत्तों की तलाश में लगी हैं। कुत्तों को मारने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। एसडीएम रामेश्वरनाथ तिवारी का कहना है कि एडीएम सोमवार को डीएफओ के साथ यहां दौरा करेंगे। ऐसी जानकारी मिली है। बच्चों को कुत्तों से बचाने के लिए क्या किया जा रहा है, इस सवाल पर वह कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।
विज्ञापन


अस्पताल में रैबीज के इंजेक्शन खत्म
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. केसी जोशी का कहना है कि इन दिनों कुत्ते के हमलों से जख्मी होकर आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इस कारण रैबीज के इंजेक्शन भी खत्म हो गए हैं। उन्होंने बताया कि 15 दिनों में करीब डेढ़ सौ मरीज रैबीज लगवाने अस्पताल पहुंचे हैं। बरेली लिखकर भेज दिया गया है मंगलवार तक रैबीज के इंजेक्शन आने की उम्मीद है। बता दें कि दो साल पहले भी आवारा कुत्तों ने आठ मासूमों की जान ले ली थी। तत्कालीन एसडीएम रमेश चंद्र ने कुत्तों को पकड़ने के लिए एक एनजीओ के जरिए टीम बुलाई थी। मगर आवारा कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी कराने के बाद जंगल में छोड़ दिया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


दहशत में हैं लोग
फोटो-01बीएचआर 1 पी- चौ. वीरेेंद्र सिंह
हम क्या जानें ये जंगली कुत्ते हैं या आवारा। वे मासूमों को मार रहे हैं। प्रशासन को कुछ करना चाहिए। शाम को घर से निकलने में अब डर लगने लगा है। - चौधरी वीरेंद्र सिंह, गुलड़िया भवानी

01बीएचआर 2 पी- सरदार लखविंदर सिंह
प्रशासन और वन विभाग एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहा है। देर शाम बच्चों को घर से बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी है। यह सभी की चिंता का विषय है। -सरदार लखविंद सिंह रिछौला फार्म

01बीएचआर 3 पी-हरदेव सिंह
हम तो रात में खेतों पर काम करते हैं लेकिन इन कुत्तों के आतंक से अब शाम को ही घर में बंद हो जाते हैं। मजदूर भी काम करने से इन्कार कर रहे हैं। अब इन कुत्तों का डर सताने लगा है। -हरदेव सिंह, मनुआपट्टी

01बीएचआर 4 पी- हाजी मंसूब अली खां
गांव-देहात के अलावा अब तो शहर के लोग भी इन कुत्तों के आतंक से डरे हुए हैं। बच्चों को लेकर डर बस गया है। पता नहीं प्रशासन कब जागेगा। -हाजी मंसूब अली खां, शाहगढ़

01बीएचआर 5 पी- अफसर अली
प्रशासन और वन विभाग से विश्वास उठ गया है। वे लोगों को कुत्ते मारने को कह रहे हैं। मगर अफसर क्या कर रहे हैं इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है। -अफसर अली, भैसिया


इनसेट
डीएम ने कहा, टीम बनाकर कुत्तों को पकड़ो

बरेली। आवारा कुत्तों के हमले और मासूमों की मौत का डीएम संजय कुमार ने संज्ञान लिया है। उन्होंने डीएफओ को टीम बनाकर कुत्तों को पकड़ने और काजी हाउस में बंद करने के निर्देश दिए हैं। डीएम के अनुसार एडीएम प्रशासन और डीएफओ को निर्देशित किया गया है कि वे समय-समय पर प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर लोगों की समस्या का समाधान कराएं। जिला पंचायत, नगर निगम और नगर निकायों को भी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। उधर, डीएफओ ने बताया कि डिप्टी रेंजर गोविंद राम की अगुवाई में वन विभाग की तीन टीमें बना दी गई हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed