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आत्महत्या करने के दो महीने बाद जेद्दा से घर आया शव
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बरेली। सऊदी अरब के शहर जद्दा में खुदकुशी कर लेने वाले मोहम्मद शाहबाज का शव दो महीने बाद बरेली पहुंचा तो उसकी मां मीना होश खो बैठी। मीना दो महीने से जद्दा की मोर्चरी में रखे इकलौते बेटे के शव को भारत लाने के लिए भागदौड़ कर रही थीं।
मीना के पति का इंतकाल कई साल पहले तब हो गया था, जब शाहबाज सिर्फ डेढ़ साल का था। मीना ने परचूनी की दुकान चलाकर जैसे-तैसे पाल-पोसकर बड़ा किया। वह पहले दो बार सऊदी अरब जा चुका था। हालांकि दोनों बार धोखाधड़ी का शिकार हुआ। एजेंट किसी और काम के बहाने उसे ले गया लेकिन काम कुछ औरकराए। दोनों बार वह भागकर लौट आया था। पिछले साल लखनऊ के नियाज नाम के एजेंट ने उसे सऊदी अरब भेजा। उसे एक लेटर दिया जिसमें ऑफिस वर्क करने की बात लिखी थी।
इस बार भी वह धोखाधड़ी का शिकार हो गया। जद्दा में उसे बकरे-घोड़े की सफाई और झाड़ूं-पोछे के काम पर लगा दिया गया। यही नहीं उसके साथ मारपीट भी की गई। परेशान होकर वह काम से भाग गया। इस पर उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। आखिरकार परेशान होकर शाहबाज ने जद्दा में ही 25 मार्च को फंदे पर लटककर आत्महत्या कर ली। दो महीने बाद मंगलवार रात उसका शव दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा।
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साथियों ने दी आत्महत्या की सूचना
सऊदी अरब पुलिस ने शाहबाज के आत्महत्या करने के बाद उसके साथियों को हत्या के शक में गिरफ्तार कर लिया था। जांच के बाद जब साबित हुआ कि शाहबाज ने आत्महत्या की है तो उन्हें छोड़ दिया गया। इसके बाद शाहबाज के साथियों ने ही उसके घर पर सूचना दी थी। इसके बाद से उसका परिवार शव को लाने की कोशिश कर रहा था। दो महीने तक शाहबाज का शव मोर्चरी के रेफ्रिजरेटर में रखा रहा। शाहबाज की मां मीना का कहना है कि वह परचूनी की दुकान चलाती हैं। उन्होंने सऊदी में भारतीय दूतावास के कंसल्टेंट मोहम्मद शाहिद अंसारी से संपर्क किया। इसके बाद मोर्चरी में दो महीने शव रखने का डेढ़ लाख के खर्च के साथ उसे भारत लाने का खर्च भी भारतीय दूतावास ने उठाया।
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मीना के पति का इंतकाल कई साल पहले तब हो गया था, जब शाहबाज सिर्फ डेढ़ साल का था। मीना ने परचूनी की दुकान चलाकर जैसे-तैसे पाल-पोसकर बड़ा किया। वह पहले दो बार सऊदी अरब जा चुका था। हालांकि दोनों बार धोखाधड़ी का शिकार हुआ। एजेंट किसी और काम के बहाने उसे ले गया लेकिन काम कुछ औरकराए। दोनों बार वह भागकर लौट आया था। पिछले साल लखनऊ के नियाज नाम के एजेंट ने उसे सऊदी अरब भेजा। उसे एक लेटर दिया जिसमें ऑफिस वर्क करने की बात लिखी थी।
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इस बार भी वह धोखाधड़ी का शिकार हो गया। जद्दा में उसे बकरे-घोड़े की सफाई और झाड़ूं-पोछे के काम पर लगा दिया गया। यही नहीं उसके साथ मारपीट भी की गई। परेशान होकर वह काम से भाग गया। इस पर उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। आखिरकार परेशान होकर शाहबाज ने जद्दा में ही 25 मार्च को फंदे पर लटककर आत्महत्या कर ली। दो महीने बाद मंगलवार रात उसका शव दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा।
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साथियों ने दी आत्महत्या की सूचना
सऊदी अरब पुलिस ने शाहबाज के आत्महत्या करने के बाद उसके साथियों को हत्या के शक में गिरफ्तार कर लिया था। जांच के बाद जब साबित हुआ कि शाहबाज ने आत्महत्या की है तो उन्हें छोड़ दिया गया। इसके बाद शाहबाज के साथियों ने ही उसके घर पर सूचना दी थी। इसके बाद से उसका परिवार शव को लाने की कोशिश कर रहा था। दो महीने तक शाहबाज का शव मोर्चरी के रेफ्रिजरेटर में रखा रहा। शाहबाज की मां मीना का कहना है कि वह परचूनी की दुकान चलाती हैं। उन्होंने सऊदी में भारतीय दूतावास के कंसल्टेंट मोहम्मद शाहिद अंसारी से संपर्क किया। इसके बाद मोर्चरी में दो महीने शव रखने का डेढ़ लाख के खर्च के साथ उसे भारत लाने का खर्च भी भारतीय दूतावास ने उठाया।