{"_id":"5db0b6548ebc3e939e471c3d","slug":"cultural-bareilly-news-bly3813983117","type":"story","status":"publish","title_hn":"कौशल विकास के कोर्स में तलाक पीड़ित महिलाओं को आरक्षण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कौशल विकास के कोर्स में तलाक पीड़ित महिलाओं को आरक्षण
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। तीन तलाक पर कानून बनने के बाद अब तलाक पीड़ित महिलाओं उनको आत्मनिर्भर बनाने की भी तैयारी शुरू हो गई है। मोदी सरकार ने कौशल विकास योजना के तहत विभिन्न कोर्स में तलाक पीड़ित महिलाओं को आरक्षण देना शुरू कर दिया है। आरक्षित सीटों पर उनको प्रवेश मिलेगा ताकि वह आत्मनिर्भर बन सकें। इस सत्र से ही इसको शुरू किया गया है।
कौशल विकास के माध्यम से कंप्यूटर, जरी जरदोजी, सिलाई, गारमेंट्स जैसे कोर्स कराए जाते हैं। अभी तक एडमिशन लेने में एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक और अन्य कोटे के तहत प्रवेश होते थे। इसमें तलाक पीड़ित महिलाओं का जिक्र नहीं होता था, लेकिन अब इनको बाकायदा आरक्षण देना शुरू किया गया है। अगर किसी ट्रेड में 50 सीटें हैं तो दो या इससे ज्यादा सीटें तलाक पीड़ित महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। हालांकि संख्या और प्रतिशत अभी निर्धारित नहीं किया गया है। स्कूलों और कॉलेजों में भी इसे लागू किया जा सकता है। कुछ सीटों पर तलाक पीड़ित महिलाओं को शिक्षित करने और उनको आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रवेश दिया जा सकता है। आईटीआई के प्रधानाचार्य राजकुमार शाक्य का कहना है कि इसी बार से तलाक पीड़ित महिलाओं को एडमिशन में वरीयता देना शुरू किया गया है। कुछ प्रवेश भी हुए हैं। जागरूकता होने पर इनकी संख्या बढ़ेगी। सरकार की मंशा है कि इन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
विज्ञापन
कौशल विकास के माध्यम से कंप्यूटर, जरी जरदोजी, सिलाई, गारमेंट्स जैसे कोर्स कराए जाते हैं। अभी तक एडमिशन लेने में एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक और अन्य कोटे के तहत प्रवेश होते थे। इसमें तलाक पीड़ित महिलाओं का जिक्र नहीं होता था, लेकिन अब इनको बाकायदा आरक्षण देना शुरू किया गया है। अगर किसी ट्रेड में 50 सीटें हैं तो दो या इससे ज्यादा सीटें तलाक पीड़ित महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। हालांकि संख्या और प्रतिशत अभी निर्धारित नहीं किया गया है। स्कूलों और कॉलेजों में भी इसे लागू किया जा सकता है। कुछ सीटों पर तलाक पीड़ित महिलाओं को शिक्षित करने और उनको आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रवेश दिया जा सकता है। आईटीआई के प्रधानाचार्य राजकुमार शाक्य का कहना है कि इसी बार से तलाक पीड़ित महिलाओं को एडमिशन में वरीयता देना शुरू किया गया है। कुछ प्रवेश भी हुए हैं। जागरूकता होने पर इनकी संख्या बढ़ेगी। सरकार की मंशा है कि इन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
विज्ञापन