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प्रदोषकाल तक मनाया जाएगा धनतेरस का पर्व
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बरेली। कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को सिद्धि योग में भगवान धन्वंतरि के जन्मोत्सव पर 25 अक्तूबर शाम 4:49 बजे के बाद से प्रदोषकाल तक धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा।
समुद्र मंथन के दौरान मां लक्ष्मी के प्राकट्य के बाद भगवान धन्वंतरि अमृत कलश हाथ में लेकर प्रकट हुए। अमृत कलश रोगों का नाश करते हुए लंबी आयु के लिए था। इस अवधारणा को ध्यान में रखते हुए भारत में चिकित्सा वर्ग से जुड़े हुए सभी वैद्य अपने औषधियों में अमृत की भावना करते हुए रोगियों के शीघ्र लाभ की प्रार्थना के साथ धन्वंतरि का जन्म उत्सव भी मनाते हैं। स्कंद पुराण के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी की शाम द्वार के बाहर दीप प्रज्ज्वलित करने से अकाल मृत्यु का नाश होता है। धन त्रयोदशी को यदि कोई व्यक्ति शीघ्र स्वास्थ्य लाभ लेना चाहता है तो उसे भगवान धन्वंतरि और भगवान शिव का ध्यान करते हुए प्रार्थना करनी चाहिए। साथ ही कुम्हार की मिट्टी से बने का अमृत कलश में गंगाजल भरकर अश्वगंधा, आँवला, हरड़ बहेड़ा, तुलसी के पत्ते ग्रहण करना चाहिए।
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समुद्र मंथन के दौरान मां लक्ष्मी के प्राकट्य के बाद भगवान धन्वंतरि अमृत कलश हाथ में लेकर प्रकट हुए। अमृत कलश रोगों का नाश करते हुए लंबी आयु के लिए था। इस अवधारणा को ध्यान में रखते हुए भारत में चिकित्सा वर्ग से जुड़े हुए सभी वैद्य अपने औषधियों में अमृत की भावना करते हुए रोगियों के शीघ्र लाभ की प्रार्थना के साथ धन्वंतरि का जन्म उत्सव भी मनाते हैं। स्कंद पुराण के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी की शाम द्वार के बाहर दीप प्रज्ज्वलित करने से अकाल मृत्यु का नाश होता है। धन त्रयोदशी को यदि कोई व्यक्ति शीघ्र स्वास्थ्य लाभ लेना चाहता है तो उसे भगवान धन्वंतरि और भगवान शिव का ध्यान करते हुए प्रार्थना करनी चाहिए। साथ ही कुम्हार की मिट्टी से बने का अमृत कलश में गंगाजल भरकर अश्वगंधा, आँवला, हरड़ बहेड़ा, तुलसी के पत्ते ग्रहण करना चाहिए।
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