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खतरे में चार ‘पी’.. प्लेनेट, पीपुल, पीस और प्रॉस्पेरिटी
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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ और प्रज्ञा परिषद के संयुक्त तत्वावधान में ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय की दृष्टि में समावेशन और एकात्मता’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री प्रो. संजय पासवान ने कहा कि मेरे हिसाब से पंडित दीनदयाल का एबीसीडी, ए फॉर अंत्योदय, बी फॉर भारत सर्वोपरि, सी फॉर चित्ति (राष्ट्र की चेतना) और डी फॉर डिकोलनाइजेशन इन इंडियन माइंड (उपनिवेशवाद से मुक्ति) है। आज चार ‘पी’.. प्लेनेट (पृथ्वी), पीपुल (जनता), पीस (शांति) और प्रॉस्पेरिटी (समृद्धि) खतरे में है। उन्होंने कहा कि भारत की चित्ति को समझे बिना समरस समाज और कल्याणकारी विश्व की कामना नहीं हो सकी।
उद्घाटन सत्र में प्रज्ञा परिषद के निदेशक प्रो. एनएन पांडेय ने स्वागत भाषण और डॉ. प्रवीण तिवारी ने विषय प्रस्तावना प्रस्तुत की। मुख्य वक्ता विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के राष्ट्रीय सचिव शिवकुमार ने कहा पंडित दीनदयाल कहते थे कि मनुष्य के घर में जन्म लेकर कोई मनुष्य नहीं बन जाता। प्रेम, दया, करुणा और मूल्य उसे मनुष्य बनाते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. अनिल शुक्ला ने कहा, पंडित दीनदयाल का दर्शन अंत्योदय से होकर पुनरोदय तक जाता है। समापन सत्र में मुख्य अतिथि भारतीय शिक्षण मंच के संस्थापक दीपक केलकर ने कहा एकात्मता मम हिताय से सर्वजन हिताय की यात्रा है। विशिष्ठ वक्ता डॉ. देवेश मिश्र ने कहा कि ऐसे मनुष्यों का निर्माण आवश्यक है, जिन्हें दूसरे के कष्ट से कष्ट हो। अध्यक्षीय उद्बोधन प्रो. बीआर कुकरेती ने दिया। क्षेत्रीय संयोजक भगवती प्रसाद ने भी मार्गदर्शन किया। इस दौरान शोधपत्र भी प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में प्रो. नलिनी श्रीवास्तव, डॉ. आशुतोष प्रिय, डॉ. विमल कुमार, डॉ. रश्मि रंजन, डॉ. मीनाक्षी द्विवेदी, डॉ. योगेश शर्मा आदि मौजूद रहे।
जारी हैं शोध कार्यक्रम
डॉ. प्रवीण तिवारी ने बताया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ के बैनर तले यह दूसरा कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसके अंतर्गत इस समय दो पीएचडी और आठ लघु शोध चल रहे हैं, जिन्हें शोधपीठ सहायता करती है।
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उद्घाटन सत्र में प्रज्ञा परिषद के निदेशक प्रो. एनएन पांडेय ने स्वागत भाषण और डॉ. प्रवीण तिवारी ने विषय प्रस्तावना प्रस्तुत की। मुख्य वक्ता विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के राष्ट्रीय सचिव शिवकुमार ने कहा पंडित दीनदयाल कहते थे कि मनुष्य के घर में जन्म लेकर कोई मनुष्य नहीं बन जाता। प्रेम, दया, करुणा और मूल्य उसे मनुष्य बनाते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. अनिल शुक्ला ने कहा, पंडित दीनदयाल का दर्शन अंत्योदय से होकर पुनरोदय तक जाता है। समापन सत्र में मुख्य अतिथि भारतीय शिक्षण मंच के संस्थापक दीपक केलकर ने कहा एकात्मता मम हिताय से सर्वजन हिताय की यात्रा है। विशिष्ठ वक्ता डॉ. देवेश मिश्र ने कहा कि ऐसे मनुष्यों का निर्माण आवश्यक है, जिन्हें दूसरे के कष्ट से कष्ट हो। अध्यक्षीय उद्बोधन प्रो. बीआर कुकरेती ने दिया। क्षेत्रीय संयोजक भगवती प्रसाद ने भी मार्गदर्शन किया। इस दौरान शोधपत्र भी प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में प्रो. नलिनी श्रीवास्तव, डॉ. आशुतोष प्रिय, डॉ. विमल कुमार, डॉ. रश्मि रंजन, डॉ. मीनाक्षी द्विवेदी, डॉ. योगेश शर्मा आदि मौजूद रहे।
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जारी हैं शोध कार्यक्रम
डॉ. प्रवीण तिवारी ने बताया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ के बैनर तले यह दूसरा कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसके अंतर्गत इस समय दो पीएचडी और आठ लघु शोध चल रहे हैं, जिन्हें शोधपीठ सहायता करती है।
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